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मानसिक स्वास्थ्य: किसी करीबी को डिप्रेशन हो तो उससे कैसी बात करें? सलाह न दें, ऐसे करें मदद

Sat, 10 Oct 2026 05:17 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

World Mental Health Day:  डिप्रेशन से जूझ रहे करीबी की मदद के लिए उसकी बात ध्यान से सुनें, बिना जज किए उसकी भावनाओं को समझें और व्यावहारिक मदद दें। खुश रहो या दूसरों को देखो जैसी बातें कहने से बचें। परेशानी लंबे समय तक बनी रहे तो उसे समय रहते मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ के पास ले जाएं।
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मेंटल हेल्थ की समस्याएं - फोटो : Amarujala.com/AI
मानसिक स्वास्थ्य की बढ़ती समस्याओं को लेकर दुनियाभर के विशेषज्ञ अलर्ट कर रहे हैं।  विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की रिपोर्ट के मुताबिक दुनियाभर में 1.2 अरब से ज्यादा लोग किसी न किसी मानसिक स्वास्थ्य समस्या से जूझ रहे हैं। मसलन हर 7 में से 1 व्यक्ति इसका शिकार हो सकता है।

मेंटल हेल्थ की बात होते ही सबसे पहले हमारे दिमाग में स्ट्रेस-एंग्जायटी और डिप्रेशन का ख्याल आता है। आमतौर पर लोग इन्हें एक ही मान लेते हैं, जबकि ये तीनों बिल्कुल अलग-अलग स्थितियां हैं। डिप्रेशन को मेंटल हेल्थ की गंभीर समस्या के रूप में जाना जाता है। सामान्यतौर पर अगर कोई हंसता-बोलता है तो उसे देखकर हम मान लेते हैं कि वह खुश होगा, लेकिन जरूरी नहीं कि जो इंसान बाहर से खुश दिखाई दे, वह अंदर से भी अच्छा महसूस कर रहा हो। हंसता-बोलता इंसान भी  डिप्रेशन का शिकार हो सकता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, डिप्रेशन के मरीजों को अपनों के साथ की जरूरत होती है, कई बार सिर्फ किसी का साथ मिल जाने से समस्या काफी कम हो सकती है। हालांकि डिप्रेशन के मरीजों से बातचीत करते समय भी कुछ सावधानियां जरूरी हैं। आइए इस बारे में जान लेते हैं।
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मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा - फोटो : adobe stock images
डिप्रेशन की समस्या में मदद

जब कोई अपना मानसिक परेशानी से गुजर रहा हो, तो उसे ठीक देखने की इच्छा स्वाभाविक है। ऐसे में हम अक्सर उसे समझाने, सलाह देने या उसका मन बदलने की कोशिश करते हैं। लेकिन कई बार मदद करने के इरादे से कही गई बात भी उसे दुख पहुंचा सकती है।
 
  • डिप्रेशन से जूझ रहे व्यक्ति को हमेशा यह नहीं पता होता कि वह ऐसा क्यों महसूस कर रहा है? मरीज रोजमर्रा के कामों में रुचि खो सकता है या छोटी-छोटी बातों पर चिड़चिड़ा हो सकता है।
  • ऐसे समय में उसे डांटने या जबरन खुश करने के बजाय उसकी बात सुनना और बिना किसी फैसले के उसका साथ देना ज्यादा जरूरी है।
  • सही बातचीत उसे अकेलापन महसूस होने से बचा सकती है, जिसका डिप्रेशन की समस्या में सबसे ज्यादा खतरा देखा जाता रहा है।
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मेंटल हेल्थ की दिक्कतें - फोटो : Adobe Stock
डिप्रेशन के मरीजों से कैसे डील करें?

मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, अगर आपको लग रहा है कि आपका कोई करीबी पहले से ज्यादा उदास, चुप या लोगों से दूर रहने लगा है, तो उससे अकेले में और आराम से बात करें। 
 
  • उसे ऐसा महसूस कराएं कि आप उसका साथ देने के लिए आए हैं न कि उसको जज करने या उसकी समस्या को और बढ़ाने। 
  • डिप्रेशन के मरीजों को अक्सर ऐसे लोगों की जरूरत होती है जो उसकी बात बिना जज किए बस सुन ले। इसलिए बात करते समय उसे बीच में न रोकें और न ही हर बात का समाधान तुरंत बताने लगें। उसे अपनी भावनाएं जाहिर करने का समय दें।
  • अगर वह उस वक्त बात नहीं करना चाहता, तो दबाव न डालें। उसे भरोसा दिलाएं कि जब भी वह बात करना चाहेगा, आप सुनने के लिए मौजूद हैं। 

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डिप्रेशन की समस्या - फोटो : Freepik.com
डिप्रेशन के शिकार लोगों से कौन सी बातें नहीं करनी चाहिए?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, कुछ बातें डिप्रेशन से जूझ रहे व्यक्ति को यह महसूस करा सकती हैं कि उसकी परेशानी को गंभीरता से नहीं लिया जा रहा। आमतौर पर ऐसे लोगों से कुछ तरह की बातें करने से बचना चाहिए।
 
  • 'इतना मत सोचो, सब ठीक हो जाएगा।' इससे उसकी तकलीफ छोटी बताने जैसा लग सकता है।
  • 'तुम्हारे पास तो सब कुछ है, फिर दुख किस बात का?' डिप्रेशन केवल बाहरी परिस्थितियों से तय नहीं होता।
  • 'खुश रहा करो, सकारात्मक सोचो।' इससे व्यक्ति पर खुद को ठीक दिखाने का दबाव पड़ सकता है।
  • 'दूसरों की जिंदगी में तुमसे बड़ी परेशानियां हैं।' दूसरों से तुलना करने से वह अपनी बात बताने में हिचक सकता है।
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मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं के मामले - फोटो : Freepik.com
समय रहते डॉक्टर के पास ले जाएं

अगर आपके किसी करीबी में उदासी, निराशा या रोजमर्रा के कामों में रुचि की कमी लगातार बनी हुई है तो समय रहते उसे मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ के पास लेकर जाएं। 
 
  • डिप्रेशन का इलाज संभव है। जरूरत के अनुसार मनोचिकित्सा और दवाओं की मदद से लक्षणों को कंट्रोल किया जा सकता है। 
  • अगर वह खुद को नुकसान पहुंचाने या जान देने की बात करे, तो इसे हल्के में न लें। उसे अकेला न छोड़ें।
  • डिप्रेशन जैसी गंभीर समस्याओं में जितनी जल्दी डॉक्टरी मदद मिल जाए समस्या के ठीक होने की संभावना उतनी बढ़ जाती है।


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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