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मेंटल हेल्थ डे 2026: स्ट्रेस, एंग्जायटी और डिप्रेशन में क्या अंतर है? तीनों की पहचान कैसे करें

Sat, 10 Oct 2026 02:25 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

World Mental Health Day 2026: स्ट्रेस, एंग्जायटी और डिप्रेशन अलग-अलग स्थितियां हैं, हालांकि इनके कुछ लक्षण एक जैसे लग सकते हैं। तनाव अक्सर किसी दबाव से संबंधित होता है, एंग्जायटी में लगातार चिंता और आशंका रहती है, जबकि डिप्रेशन में लंबे समय तक उदासी या रुचि की कमी हो सकती है। लगातार परेशानी होने पर विशेषज्ञ से सलाह लें।
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मेंटल हेल्थ की समस्याएं - फोटो : Amarujala.com/AI
मेंटल हेल्थ की समस्याएं वैश्विक स्तर पर स्वास्थ्य के लिए गंभीर जोखिम बनी हुई हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, सेहत को ठीक रखने की बात आते ही हम हार्ट और ब्रेन को ठीक रखने के लिए तो प्रयास करते रहते हैं पर मानसिक स्वास्थ्य की तरफ लोगों का ध्यान नहीं जाता है। जबकि मेंटल हेल्थ और शारीरिक स्वास्थ्य एक दूसरे से सीधे तौर पर संबंधित होते हैं. इनमें से किसी एक में भी होने वाली दिक्कत का असर दूसरे पर हो सकता है।

आज की भागदौड़ भरी जिंदगी में काम का दबाव, परिवार की जिम्मेदारियां और भविष्य की चिंता कई लोगों को मानसिक रूप से परेशान कर रही हैं। कभी किसी परेशानी को लेकर तनाव होता है, कभी बिना किसी स्पष्ट वजह के घबराहट बनी रहती है और कभी किसी काम में मन ही नहीं लगता। लोग अक्सर इन सभी स्थितियों को एक ही नाम दे देते हैं, लेकिन स्ट्रेस, एंग्जायटी और डिप्रेशन एक जैसी समस्याएं नहीं हैं। इनके लक्षण एक-दूसरे से मिलते-जुलते हो सकते हैं, पर ये तीनों ही बिल्कुल अलग-अलग समस्याएं हैं।

आइए जानते हैं कि स्ट्रेस-एंग्जायटी और डिप्रेशन में क्या अंतर होता है?
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स्ट्रेस की दिक्कत - फोटो : Freepik.com
आज विश्व मानसिक स्वास्थ्य दिवस है। मानसिक स्वास्थ्य के प्रति लोगों में जागरूकता बढ़ाने, मानसिक समस्याओं से जुड़े कलंक को दूर करने और सही समय पर विशेषज्ञों की मदद लेने के लिए लोगों को प्रेरित करने के उद्देश्य से हर साल 10 अक्तूबर को मेंटल हेल्थ डे मनाया जाता है।

स्ट्रेस की समस्या के बारे में जानिए

किसी दबाव, चुनौती या मुश्किल परिस्थिति में आपको स्ट्रेस यानी तनाव की दिक्कत हो सकती है। आमतौर पर परीक्षा, नौकरी के दबाव, आर्थिक परेशानी, परिवार में विवाद या समय पर काम पूरा करने की चिंता के कारण आपको स्ट्रेस की दिक्कत हो सकती है।
 
  • तनाव होने पर सिरदर्द, मांसपेशियों में खिंचाव, चिड़चिड़ापन, नींद की परेशानी और ध्यान लगाने में दिक्कत हो सकती है। 
  • कुछ लोगों की धड़कन तेज हो जाती है या पेट से जुड़ी परेशानी होने लगती है। 
  • तनाव लगातार बना रहे तो रोजमर्रा का जीवन प्रभावित हो सकता है, तो इसे नजरअंदाज नहीं करना चाहिए। 
  • तनाव अपने आप में हमेशा मानसिक बीमारी नहीं होती, लेकिन लंबे समय तक बनी रहने वाली समस्या मानसिक रोगों का कारण बन सकती है।
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एंग्जायटी में क्या दिक्कतें होती हैं? - फोटो : Adobe stock photos
एंग्जायटी में क्या होता है?

एंग्जायटी यानी चिंता में किसी खतरे, समस्या या अनहोनी की आशंका बनी रह सकती है। कई बार चिंता की वजह स्पष्ट होती है, जबकि कुछ लोगों को बिना किसी बड़ी वजह के भी बेचैनी महसूस होती है। लोगों को लगता है कि कुछ गलत होने वाला है, वे बार-बार एक ही बात सोचते हैं या भविष्य को लेकर परेशान रहते हैं।
 
  • इसके साथ दिल की धड़कन तेज होने, पसीना आने, बेचैनी, मांसपेशियों में तनाव और नींद आने में परेशानी जैसे लक्षण भी हो सकते हैं। 
  • जब चिंता जरूरत से ज्यादा हो, उस पर काबू पाना मुश्किल हो और वह कामकाज या रिश्तों पर असर डालने लगे तो ये एंग्जायटी का संकेत हो सकता है।

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डिप्रेशन का खतरा - फोटो : adobe stock images
डिप्रेशन कैसे अलग है?

डिप्रेशन में लंबे समय तक उदासी, खालीपन या निराशा महसूस हो सकती है। पहले जिन कामों में खुशी मिलती थी, उनमें रुचि कम हो सकती है। आपको थकान, नींद और भूख में बदलाव, ध्यान लगाने में परेशानी या खुद को बेकार समझने जैसी समस्याएं भी हो सकती हैं।
 
  • डिप्रेशन की समस्या रोजमर्रा की जिंदगी को भी प्रभावित कर सकती है। हर व्यक्ति में इसके लक्षण अलग हो सकते हैं और कुछ लोग बाहर से सामान्य दिखाई देते हुए भी इससे जूझ सकते हैं। अमर उजाला में प्रकाशित रिपोर्ट में हमने बताया कि किस तरह से हंसता-बोलता इंसान भी डिप्रेशन का शिकार हो सकता है।
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स्ट्रेस और मेंटल हेल्थ - फोटो : Adobe Stock Photo
तीनों में अंतर कैसे पहचानें?
 
  • स्ट्रेस: किसी दबाव या मुश्किल परिस्थिति से जुड़ा तनाव।
  • एंग्जायटी: किसी खतरे या अनहोनी की लगातार आशंका और बेचैनी।
  • डिप्रेशन: लंबे समय तक उदासी, निराशा या रुचि में कमी।


इन स्थितियों के लक्षण एक-दूसरे से मिल सकते हैं। लंबे समय का तनाव, एंग्जायटी या डिप्रेशन के साथ भी मौजूद हो सकता है। इसलिए सिर्फ लक्षणों के आधार पर बीमारी की पहचान नहीं की जा सकती। अगर परेशानी लगातार बनी हुई है, नींद या कामकाज प्रभावित हो रही है या रोजमर्रा के काम काज में मुश्किल हो रहा हो तो मनोवैज्ञानिक से सलाह लें। 



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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