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Excessive Screen Time: मोबाइल-कंप्यूटर का ज्यादा इस्तेमाल नुकसानदायक, जानलेवा बीमारियों का बढ़ जाता है जोखिम

Tue, 22 Feb 2022 08:09 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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बढ़ा हुआ स्कीन टाइम है हानिकारक - फोटो : iStock
कोरोना महामारी ने हमारी जीवनशैली को गंभीर रूप से प्रभावित किया है। संक्रमण के दौरान लगे लॉकडाउन के कारण वर्क फ्रॉम होम और ऑनलाइन क्लासेज जैसी आदतों को बीमारी से बचाव के लिहाज से तो फायदेमंद माना जा रहा है, हालांकि इसके कुछ ऐसे दुष्प्रभाव देखे जा रहे हैं जिसके कारण लोगों में कई तरह की गंभीर स्वास्थ्य समस्याओं का जोखिम कई गुना तक बढ़ गया है।  स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, घर पर रहने के कारण हम सभी का स्क्रीन टाइम काफी बढ़ गया है, जिसे सेहत के लिहाज से नुकसानदायक माना जाता है। स्क्रीन टाइम का मतलब मोबाइल-कंप्यूटर  पर बिताया जाने वाला समय होता है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, स्क्रीन टाइम का बढ़ना हमारी आंखों, मानसिक स्वास्थ्य, नींद के सामान्य पैटर्न को प्रभावित करती है। लगातार बने रहने वाली इस आदत के कई गंभीर दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं। सबसे खास बात स्क्रीन टाइम के कारण लोगों में नींद से संबंधित दिक्कतें काफी ज्यादा बढ़ गई हैं, जिसका नकारात्मक असर पूरे स्वास्थ्य पर देखने को मिलता है। इन खतरों को ध्यान में रखते हुए सभी लोगों को मोबाइल-कंप्यूटर के इस्तेमाल को सीमित रखने की आवश्यकता है। आइए जानते हैं कि कैसे जाने की आपका स्क्रीन टाइम काफी बढ़ गया है? इसके क्या लक्षण महसूस हो सकते हैं?
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बढ़ रहे हैं नींद संबधी विकार - फोटो : Pixabay
नींद विकार के बढ़े मामले
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि मोबाइल-कंप्यूटर के ज्यादा इस्तेमाल का सबसे ज्यादा असर हमारी नींद पर देखा जा रहा है। इन डिवाइसों की स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी हमारी नेचुरल सर्कडियन रिदम को प्रभावित करती है, जिसके कारण लोगों में नींद की समस्या काफी बढ़ गई है। नीली रोशनी के लगातार संपर्क में रहने के कारण नींद को नियंत्रित करने वाले हार्मोन मेलाटोनिन का प्रभाव कम होने लगता है। नींद की कमी के कारण तनाव, चिंता बढ़ने के साथ शरीर पर अन्य कई दुष्प्रभाव देखने को मिल सकते हैं।
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मानसिक स्वास्थ्य पर असर - फोटो : Pixabay
बढ़ रही है तनाव की समस्या
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, बढ़ा हुआ स्क्रीन टाइम समय के साथ हमें चिड़चिड़ा बनाता जा रहा है। लोगों के मस्तिष्क में कई ऐसे रसायनिक परिवर्तन देखे जा रहे हैं जो मानसिक सेहत को गंभीर तौर से प्रभावित कर सकता है। यही कारण है कि लोगों में तनाव-चिंता और अवसाद के मामले पिछले कुछ वर्षों में काफी अधिक देखे जा रहे हैं। अध्ययनों से पता चलता है कि बढ़े हुए स्क्रीन टाइम के कारण संज्ञानात्मक कार्य में कमी, ब्रेन फॉग और याददाश्त से संबंधित दिक्कतें भी बढ़ सकती हैं। 
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युवाओं में मोटापे की समस्या - फोटो : istock
मोटापे के शिकार हो रहे हैं लोग
डिजिटल डिवाइसों का अधिक उपयोग स्वाभाविक तौर पर हमारी शारीरिक निष्क्रियता को बढ़ा देता है। इसके परिणामस्वरूप वजन बढ़ाने जैसी दिक्कतें बढ़ रही हैं। मोबाइल-कंप्यूटर के इस्तेमाल के साथ-साथ कुछ खाते रहने की आदत इस समस्या को और बढ़ा देती है। प्रतिदिन दो घंटे का अतिरिक्त स्क्रीन टाइम मोटे होने का खतरा 8 गुना तक बढ़ा देता है। मोटापे को हृदय रोग, डायबिटीज जैसी गंभीर और जानलेवा बीमारियों का खतरा काफी बढ़ जाता है।


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
 
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