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Measles Outbreak: मप्र में दो बच्चों की मौत, WHO ने भारत में संक्रमण के जोखिमों को लेकर किया अलर्ट

Sun, 25 Feb 2024 01:05 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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measles in india - फोटो : Amarujala
खसरा (Measles) एक अत्यधिक संक्रामक रोग है, जो पैरामाइक्सोविरिडे फैमिली के वायरस के कारण होता है। भारत में टीकाकरण और अन्य प्रभावी उपायों की मदद से पिछले एक-दो दशकों में खसरे के प्रकोप में काफी सुधार कर लिया गया है, हालांकि समय-समय पर इसके कुछ मामले सामने आते रहे हैं।

हालिया रिपोर्ट्स के मुताबिक मध्यप्रदेश के कुछ हिस्सों में खसरे के मामले बढ़े हैं। मैहर जिले में खसरे से दो बच्चों की मौत हो गई है, 17 अन्य में इस संक्रामक वायरल रोग का पता चला है।  जिले के स्वास्थ्य अधिकारियों ने इस बढ़ते संक्रमण को लेकर सभी लोगों को अलर्ट रहने की सलाह दी है। 

विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) ने एक हालिया रिपोर्ट में बताया था साल 2022 में भारत में अनुमानित 11 लाख बच्चों को खसरे के टीके की पहली खुराक नहीं मिली है। जिससे भारत उन दस देशों में शामिल हो गया, जहां महामारी के बाद भी खसरे के टीकाकरण में सबसे ज्यादा अंतर है। कोरोना महामारी के दौरान बढ़ी स्वास्थ्य असुविधाओं के कारण वैक्सीनेशन में बड़ा गैप आया है, जिसने बच्चों में एक बार फिर से इस गंभीर संक्रमण के जोखिमों को बढ़ा दिया है। चूंकि इस संक्रामक रोग के एक व्यक्ति से दूसरे में आसानी से फैलने का खतरा रहता है इसलिए विशेषज्ञों ने सभी लोगों से लगातार सावधानी बरतते रहने की अपील की है।
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बच्चों में खसरा की समस्या - फोटो : pixabay
देश में फिर से बढ़ रहा है खसरा का खतरा

नवंबर 2023 में सामने आई एक रिपोर्ट में डब्ल्यूएचओ ने भारत सहित कई अन्य देशों में बच्चों में खसरा के खतरे को लेकर अलर्ट किया था।

गौरतलब है कि वैक्सीनेशन और बचाव के उपायों में तेजी लाकर भारत में इस संक्रामक रोग की रफ्तार को काफी कम कर लिया गया है। अगस्त 2023 की रिपोर्ट के मुताबिक भारत में 2017 से 2021 के बीच खसरे के मामलों में 62% की गिरावट आई है, यानी प्रति दस लाख की जनसंख्या पर ये मामले 10.4 से घटकर 4 रह गए थे। हालांकि वैक्सीनेशन की दर में आई कमी ने एक बार फिर से इसके जोखिमों को बढ़ा दिया है। 

आइए खसरा रोग के बारे में विस्तार से समझते हैं।
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खसरा के जोखिम कारक - फोटो : Pexels
खसरा के बारे में जानिए

खसरा, बच्चों में होने वाला संक्रामक रोग है, छोटे बच्चों में इसके मामले गंभीर और घातक भी हो सकते हैं। खसरा संक्रमण के कारण त्वचा पर लाल, धब्बेदार दाने होने लगते हैं। चेहरे पर और कान के पीछे इसका असर अधिक दिखाई देता है, इसके शरीर के अन्य हिस्सों में भी फैलने का खतरा भी रहता है। संक्रमण में होने वाले दानों के साथ संक्रमितों में बुखार, सूखी खांसी, नाक बहने, गला खराब होने और कुछ बच्चों में कंजंक्टिवाइटिस की भी समस्या देखी जाती रही है।

रिपोर्ट्स से पता चलता है कि वैक्सीनेशन की बढ़ी वैश्विकदर के बाद अब भी दुनियाभर में हर साल दो लाख से अधिक बच्चों की मौत हो जाती है। 

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चिकन पॉक्स - फोटो : Pixabay
बच्चों में खसरा की पहचान कैसे की जाए?

डॉक्टर बताते हैं, खसरे के लक्षण, वायरस के संपर्क में आने के लगभग 10 से 14 दिन बाद दिखाई देते हैं। इसमें कई प्रकार की समस्याएं जैसे बुखार सूखी खांसी, बहती नाक, गले में खराश आंखों में सूजन, गाल की अंदरूनी परत में लालिमा की दिक्कत होने लगती है। इन स्थितियों के कारण भोजन को निगलने में भी कठिनाई महसूस हो सकती है। गंभीर स्थितियों में इसके जानलेवा दुष्प्रभाव भी हो सकते हैं जिसको लेकर सभी लोगों को सावधानी बरतते रहना जरूरी है।

खसरे के दाने लगभग सात दिनों तक रह सकते हैं। जिन बच्चों का टीकाकरण नहीं हुआ है उनमें इस संक्रामक रोग के गंभीर रूप लेने का खतरा देखा जाता रहा है। 
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खसरे का टीका - फोटो : Pixabay
खसरे से बचाव में टीकाकरण से मिल सकता है लाभ

खसरे का टीकाकारण भविष्य में आपको इस गंभीर रोग और इसके कारण होने वाली गंभीरता से बचाने में मदद कर सकती है। चिकनपॉक्स (वैरिसेला) वैक्सीन, मेसल्स मम्प्स रुबेला (एमएमआरवी) टीके की मदद से बच्चों में इस संक्रामक रोग के जोखिमों से बचाया जा सकता है। बच्चों को स्कूल में प्रवेश करने से पहले की आयु 12 से 15 महीने की उम्र के बीच और फिर 4 से 6 साल की उम्र के बीच एमएमआरका टीका लगाकर इस संक्रामक रोग के जोखिमों से बचाया जा सकता है।

कोरोना के दौरान देशभर में इन टीकों में आए गैप ने देश में फिर से इस संक्रमण के खतरे को बढ़ा दिया है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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