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Mask History: 111 साल पहले ही बन गया था सर्जिकल मास्क, चीन के वैज्ञानिक को जाता है श्रेय

Thu, 27 May 2021 06:42 PM IST
तेजस्वी मेहता लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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मास्क का निर्माण लगभग 111 साल पहले ही हो गया था - फोटो : Pixabay

आज मास्क हम सभी के जीवन का महत्वपूर्ण हिस्सा बन गया है लेकिन क्या कभी आपने सोचा है कि पहली बार यह मास्क कब उपयोग में आया होगा या इसे बनाया किस तरह होगा? दरअसल मास्क का निर्माण लगभग 111 साल पहले ही हो गया था। इतने सालों बाद मास्क इतना उपयोग में आएगा कि इसके बिना जीवन की कल्पना ही असंभव हो जाएगी। यह भला किसने और कब सोचा होगा। अगली स्लाइड्स से जानते हैं मास्क के इतिहास से जुड़ी महत्वपूर्ण बातें। 

 




 

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उत्तर-पूर्वी चीन में एक बहुत घातक बीमारी फैल गई थी - फोटो : istock

संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए बना था मास्क 
दुनिया के पहले सर्जिकल मास्क को चीनी वैज्ञानिक वू लीन तेह ने बनाया था। कहा जाता है कि 1910 में उत्तर-पूर्वी चीन में एक बहुत घातक बीमारी फैल गई थी। इस बीमारी का संक्रमण सबसे पहले पहाड़ी चूहों का शिकार करने वाले व्यापारियों में पाया गया था। तब वैज्ञानिक तेह ने संक्रमण को फैलने से रोकने के लिए मास्क का आविष्कार किया था। 

 

 

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त्वचा को ढंक कर रखना पसंद करती थीं - फोटो : Pixabay

महिलाओं ने पहने मास्क
19वीं सदी में लंदन में पढ़ी-लिखी महिलाओं की संख्या अधिक थी जो अपनी त्वचा को ढंक कर रखना पसंद करती थीं। इससे उनकी त्वचा पर किसी बाहरी तत्व का प्रभाव नहीं पड़ता था। वे गहनों के ऊपर जालीदार कपड़े पहनना पसंद करती थीं। जालीदार कपड़ा महिलाओं को बारिश, धूलकणों व सूरज की तेज रोशनी से बचाता था और गहनों को भी सुरक्षित रखता था। यही उनके लिए मास्क था। 

 

 

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धूल-मिट्टी और प्रदूषण से बचाया जा सके। - फोटो : pixabay

कोरोना के पहले यूं होता था मास्क का प्रयोग
कोरोना महामारी के पहले भी लोगों द्वारा मास्क का उपयोग होता था लेकिन लोगों का ज्यादा इसकी और ध्यान ही नहीं गया। सर्जिकल मास्क का उपयोग अक्सर डॉक्टरों द्वारा ही किया जाता था। बाकी गर्मियों में लोग स्कार्फ, रूमाल आदि का प्रयोग मास्क के रूप में किया करते थे ताकि चेहरे को धूल-मिट्टी और प्रदूषण से बचाया जा सके। 

 

 

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हाथों में ग्लव्स और सिर पर टोपी पहना करते थे - फोटो : पेक्सेल्स

ग्रेट प्लेग में पहना जड़ी-बूटी का मास्क
1665 में जब ग्रेट प्लेग आया तो उस दौरान मरीजों का इलाज कर रहे डॉक्टर चमड़े से बना ट्यूनिक, आंखों पर कांच के चश्मे, हाथों में ग्लव्स और सिर पर टोपी पहना करते थे। ये उस समय पीपीई किट की तरह ही होता था। ब्लैक प्लेग में इस्तेमाल किए जाने वाले मास्क को खुशबूदार जड़ी-बूटियों से भरा जाता था, ताकि गंध को शरीर के भीतर पहुंचने से रोका जा सके। बाद में भी ये मास्क इस्तेमाल होते रहे लेकिन उस समय इन्हें मास्क नहीं कहा जाता था लेकिन काम जड़ी- बूटी युक्त ये कपड़े मास्क का ही कर रहे थे और सामान्य लोग इन्हें नहीं पहना करते थे। 

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