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स्टडी: शराब पीने वालों में बढ़ रही है नकारात्मक मानसिकता की समस्या, अध्ययन में सामने आईं ये रोचक बातें

Thu, 14 Apr 2022 11:59 AM IST
शिवानी अवस्थी हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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पेय पर शोध - फोटो : self
खाने की चीजों या पेय पदार्थों से व्यक्ति की मानसिकता पर असर पड़ता है। खाद्य पदार्थ और पेय पदार्थों से सकारात्मकता और नकारात्मकता आती है। जैसे नारियल का पानी, संतरे का रस और देशी गाय का दूध आदि को सात्विक पेय माना जाता है, जिसके सेवन से व्यक्ति को सकारात्मकता मिलती है। इससे उनके आसपास के समाज को भी शारीरिक और आध्यात्मिक स्तर पर लाभ होता है। लेकिन वाइन, बियर और ब्रांडेड बोतलबंद पानी आदि के सेवन से व्यक्ति की सकारात्मक ऊर्जा नष्ट हो जाती है और नकारात्मकता को बढ़ावा मिलता है। महर्षि अध्यात्म विश्वविद्यालय ने लंदन की अंतरराष्ट्रीय वैज्ञानिक परिषद में अलग अलग पेय पर शोध प्रस्तुत किया। आठ दिनों तक एक महिला और पुरुष को आठ अलग- अलग पेय दिए गए और उन्हें निगरानी में रखते हुए उनके रवैये पर ध्यान दिया गया। इस शोध में जो परिणाम सामने आए, वह आश्चर्यजनक थे। पेय पदार्थों के सेवन से व्यक्ति में पाई जाने वाली सकारात्मकता और नकारात्मकता पर महर्षि अध्यात्म विश्वविद्यालय द्वारा किए गए शोध परिणाम के बारे में जानें। 
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पेय पर शोध - फोटो : Maharshi Adhyatma Vishwavidyalay
महर्षि अध्यात्म विश्वविद्यालय का पेय पर शोध 

लंदन, यू.के. की 'कॉन्फ्रेंस सीरीज एल.एल.सी. लिमिटेड कॉन्फ्रैंसीज' ने महर्षि अध्यात्म विश्वविद्यालय के शाॅन क्लार्क ने 'फूड एंड बॅवरेजस' की 31वीं जागतिक परिषद का आयोजन किया था। यहां क्लार्क ने 'मद्यपान का व्यक्ति पर आध्यात्मिक स्तर पर होने वाला परिणाम' पर शोध निबंध प्रस्तुत किया। इस शोध के लेखक महर्षि अध्यात्म विश्वविद्यालय के संस्थापक परात्पर गुरु डॉ. जयंत बाळाजी आठवले हैं और शॉन क्लार्क सहलेखक हैं। महर्षि अध्यात्म विश्वविद्यालय द्वारा वैज्ञानिक परिषदों का यह 88 वां प्रस्तुतीकरण था।
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पेय पर शोध - फोटो : Pixabay
8 अलग पैय के सेवन का व्यक्ति पर असर

इस शोध को लेकर विश्वविद्यालय ने एक प्रयोग में 8 पेय पदार्थों और उनके सेवन से व्यक्तियों पर होने वाले असर को 'यूनिवर्सल ऑरा स्कैनर' नामक ऊर्जा मापक उपकरण द्वारा मापा। इसके परिणाम से पता चला कि शोध के लिए उपयोग किए गए सभी मद्यों में 11.5 प्रतिशत 'अल्कोहल' होते हुए भी 'रेड वाइन' का वलय सर्वाधिक नकारात्मक था । इसके बाद 'व्हिस्की' और  'बियर' का भी उपयोग किया गया। प्रसिद्ध प्रतिष्ठानों के बोतलबंद पानी में भी नकारात्मक स्पंदन थे। वहीं आठ पेय पदार्थों में जब नारियल का पानी, संतरे का ताजा रस, देशी गाय के दूध और गोवा स्थित आध्यात्मिक शोध केंद्र के पानी पर शोध किया गया तो पाया गया कि इनके सेवन से व्यक्ति में नकारात्मक वलय न होकर केवल सकारात्मक वलय हुआ था।

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पेय पर शोध - फोटो : Pixabay
देशी गाय के दूध के सेवन से बढ़ी सबसे ज्यादा सकारात्मकता

विशेषज्ञों की निगरानी में एक पुरुष और एक महिला को रोजाना 8 अलग अलग पेय को आठ दिनों तक दिया गया। 'यूनिवर्सल ऑरा स्कैनर' नामक उपकरण से उन दोनों के द्वारा प्रतिदिन पेय सेवन करने से पहले और सेवन करने के 5 मिनट और 30 मिनट बाद निरीक्षण किया गया। जिसमें दोनों के सकारात्मक वलय पर भारतीय गाय के दूध का सर्वाधिक अच्छा परिणाम पाया गया। उनका सकारात्मक वलय 500 से 600 प्रतिशत बढ़कर दोनों का नकारात्मक वलय 91 प्रतिशत तक घट गया था।
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पेय पर शोध - फोटो : Pixabay
बीयर में सबसे ज्यादा नकारात्मकता

संतरे के रस के सेवन के परिणाम में भी सकारात्मक वलय 358 प्रतिशत बढ़ गया और नकारात्मक वलय 85 प्रतिशत घट गया। 'व्हिस्की', 'बियर' और 'वाइन' आदि नकारात्मक परिणाम करने वाले पेय से 5 मिनट में ही दोनों व्यक्तियों का सकारात्मक ऊर्जा का वलय पूर्णतः नष्ट हो गया। सबसे ज्यादा नकारात्मकता 'बीयर' में पाई गई। बीयर का सेवन करने पर व्यक्ति की नकारात्मकता लगभग 5000 प्रतिशत तक बढ़ गई। उसके बाद रेड वाइन का नकारात्मक परिणाम दिखाई दिया। शोध के दौरान रेड वाइन का सेवन करने वाली महिला का नकारात्मक वलय आधे घंटे में ही 3691 प्रतिशत और पुरुष का 1396 प्रतिशत बढ़ गया । 'कोला' पेय का भी दोनों पर नकारात्मक परिणाम हुआ।
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पेय पर शोध - फोटो : istock
पार्टी में बढ़ा नकारात्मता का स्तर 

शोध विषय को लेकर एक और प्रयोग किया गया, जिसमें संगीत, पश्चिमी नृत्य और शाकाहारी खाद्य पदार्थ रखकर एक पार्टी आयोजित की गई। इस पार्टी में 10 लोगों को शामिल किया गया, जिनमें से कुछ व्यक्तियों को एक समान 'अल्कोहल' वाले पेय और कुछ व्यक्तियों को अल्कोहल विरहित पेय दिए गए। उनका सेवन दो घंटों में करना था। जब वलय का निरीक्षण किया गया जो पाया गया कि पार्टी में सम्मिलित प्रत्येक व्यक्ति के वलय की सकारात्मकता पूर्णतः नष्ट हो गई थी । जिन लोगों ने पार्टी में बिना अल्कोहल वाले पेय का सेवन किया था, उनकी सकारात्मकता वहां के संगीत और वातावरण के कारण नष्ट हो गई थी।
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स्रोत और संदर्भ

Maharshi Adhyatma Vishwavidyalay Study Report 
 
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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