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Lungs Problem: इन दो वजहों से फेफड़ों में भरता जा रहा है 'जहर', आप भी तो नहीं कर रहे ये गलतियां?

Sat, 22 Jun 2024 10:05 AM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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फेफड़ों की समस्याओं का जोखिम - फोटो : istock
फेफड़ों की बीमारियों का जोखिम दुनियाभर में बढ़ता जा रहा है। अस्थमा, क्रॉनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (सीओपीडी) और फेफड़ों का कैंसर इस महत्वपूर्ण अंग को प्रभावित करने वाली सबसे प्रमुख समस्याएं हैं। आंकड़े बताते हैं, हर साल लाखों लोगों की मौत फेफड़ों की बीमारियों के कारण हो जाती है। किसी भी उम्र के व्यक्ति को फेफड़ों की समस्या हो सकती है, इसलिए फेफड़ों की अच्छी देखभाल करना और इसे नुकसान पहुंचाने वाली आदतों से बचाव करते रहना जरूरी है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, जीवनशैली की कई गड़बड़ आदतों को फेफड़ों के लिए हानिकारक माना जाता है। कुछ आदतें तो ऐसी हैं जो फेफड़ों में जहर भरने जैसी मानी जाती हैं। दुर्भाग्यवश देश में बड़ी आबादी इसकी शिकार है। आइए जानते हैं कि फेफड़ों के लिए कौन सी आदतें हानिकारक हैं जिससे सभी लोगों को दूरी बना लेनी चाहिए?
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फेफड़ों की बीमारी - फोटो : istock
फेफड़ों की सेहत को लेकर बरतें सावधानी

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं हमारे फेफड़े एक जटिल प्रणाली का हिस्सा हैं, जो ऑक्सीजन लाने और कार्बन डाइऑक्साइड बाहर निकालने के लिए हर दिन हजारों बार फैलते और सिकुड़ते हैं। फेफड़ों की बीमारी तब हो सकती है जब इस प्रणाली के किसी भी हिस्से में समस्या हो जाए। फेफड़े की बीमारियां दुनियाभर में तेजी से बढ़ती जा रही हैं। धूम्रपान, संक्रमण और प्रदूषण जैसे कई पर्यावरणीय कारक फेफड़ों को क्षति पहुंचा सकते हैं। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी को इस अंग को स्वस्थ रखने के लिए निरंतर प्रयास करते रहना चाहिए।

आइए उन आदतों के बारे में जानते हैं जिन्हें फेफड़ों के लिए जहर के जैसा माना जाता है।
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धूम्रपान से फेफड़ों को खतरा - फोटो : istock
धूम्रपान भर रहा है फेफड़ों में जहर

अमेरिकन लंग्स एसोसिएशन का कहना है कि फेफड़ों के कैंसर और सीओपीडी जैसी गंभीर जानलेवा बीमारियों के लिए धूम्रपान प्रमुख कारक है। अस्थमा से पीड़ित लोगों में धूम्रपान की आदत अस्थमा अटैक को ट्रिगर कर सकती है या उन्हें बदतर बना सकती है। धूम्रपान न करने वाले लोगों की तुलना में धूम्रपान करने वालों में सीओपीडी से मरने की आशंका 13 गुना अधिक देखी जाती है।

सिगरेट आपके फेफड़े के ऊतकों को प्रभावित करते हैं जिससे फेफड़ों की सामान्य कार्यप्रणाली बाधित हो जाती है। सिगरेट के हर कश में 7,000 से ज़्यादा रसायन होते हैं  जिसमें कार्बन मोनोऑक्साइड भी शामिल है। लंबे समय तक इन रसायनों के संपर्क के कारण फेफड़े गंभीर रोगों का शिकार होते जाते हैं। 

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फेफड़ों की समस्या - फोटो : istock
प्रदूषकों से रहें सावधान

धूम्रपान की ही तरह प्रदूषण वाली जगहों पर रहना भी सेहत के लिए खतरनाक माना जाता है। इनडोर और आउटडोर प्रदूषक फेफड़ों की बीमारी का कारण बन सकते हैं। कभी-कभी कुछ प्रदूषकों से बचना मुश्किल हो सकता है, खासकर अगर आप खराब वायु गुणवत्ता वाली जगहों पर रहते हैं तो इससे जोखिम और भी बढ़ जाता है।

प्रदूषित हवा में कई प्रकार के रसायनों का मिश्रण होता है जो फेफड़ों की कार्यक्षमता को नुकसान पहुंचाते हैं।
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फेफड़ों से संबंधित बीमारियों का जोखिम - फोटो : istock
फेफड़ों की समस्याओं के लिए ये जोखिम कारक भी खतरनाक

फेफड़ों की समस्याओं के लिए कई जोखिम कारक हैं जिनपर ध्यान देना और बचाव के लिए उपाय करते रहना जरूरी है। 
  • अधिक वजन या मोटापा होना।
  • फेफड़ों की समस्याओं का पारिवारिक इतिहास होना।
  • गंभीर वायरल श्वसन संक्रमण और एलर्जी का जोखिम।
  • उच्च रक्तचाप वाले लोगों को भी विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। 

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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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