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Hypotension: ब्लड प्रेशर बढ़ने से भी ज्यादा खतरनाक है लो बीपी, जा सकती है जान; जानिए कैसे करें इसकी पहचान

Thu, 03 Jul 2025 07:48 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • हाई ब्लड प्रेशर निश्चित ही एक गंभीर समस्या है पर क्या आप जानते हैं कि ब्लड प्रेशर बढ़ने की ही तरह इसका लो होना भी आपकी सेहत के लिए बहुत नुकसानदायक हो सकता है।
  • सामान्य ब्लड प्रेशर की रेंज 120/80 mmHg है, अगर ब्लड प्रेशर अक्सर 90/60 mmHg से कम बना रहता है तो इसे हाइपोटेंशन यानी लो ब्लड प्रेशर कहा जाता है।
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ब्लड प्रेशर लो होने की समस्या - फोटो : Freepik.com
Low Blood Pressure (Hypotension): ब्लड प्रेशर का नाम सुनते ही आपके मन में भी सबसे पहले इसके बढ़ने यानी हाई ब्लड प्रेशर की बात आती होगी। यह एक गंभीर स्वास्थ्य स्थिति है, जिसके कारण हार्ट अटैक, स्ट्रोक जैसी जानलेवा समस्याओं का जोखिम काफी बढ़ जाता है। आंकड़ों पर नजर डालें तो पता चलता है कि भारत में, लगभग 28.1% वयस्क उच्च रक्तचाप से पीड़ित हैं, शहरी क्षेत्रों (32.6%) में, ग्रामीण क्षेत्रों (25.9%) की तुलना में ये समस्या अधिक देखी जाती रही है।  

हाई ब्लड प्रेशर निश्चित ही एक गंभीर समस्या है पर क्या आप जानते हैं कि ब्लड प्रेशर बढ़ने की ही तरह इसका लो होना भी आपकी सेहत के लिए बहुत नुकसानदायक हो सकता है। इतना ही नहीं लो ब्लड प्रेशर की समस्या पर अगर समय रहते ध्यान न दिया जाए या फिर इसका इलाज न हो पाए तो इसके कारण जान जाने तक का भी खतरा हो सकता है।
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ब्लड प्रेशर पर दें ध्यान - फोटो : Freepik.com
लो ब्लड प्रेशर और इसके दुष्प्रभाव

लो ब्लड प्रेशर और इसके कारण सेहत पर होने वाले दुष्प्रभावों को जानने से पहले पहले ये जान लेना जरूरी है कि आखिर ब्लड प्रेशर होता क्या है?

जिस तरह नाम से ही स्पष्ट है कि ब्लड प्रेशर का मतलब रक्त का दवाब है। ब्लड प्रेशर, रक्त के उस दबाव को कहा जाता है जो शरीर में रक्त के संचार के दौरान आपके धमनियों की दीवारों पर पड़ता है। दवाब अधिक होने का मतलब हाई ब्लड प्रेशर वहीं दवाब कम होने का मतलब लो ब्लड प्रेशर है।
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ब्लड प्रेशर लो रहने के दुष्प्रभाव - फोटो : Freepik.com
लो ब्लड प्रेशर रेंज और इसके कारण होने वाली दिक्कतें

जब भी ब्लड प्रेशर की बात होती है, हम अक्सर उच्च रक्तचाप को लेकर ही चिंतित होते हैं। लेकिन क्या आप जानते हैं कि लो बीपी भी उतना ही नहीं, कई बार उससे भी ज्यादा खतरनाक हो सकता है?

अगर ब्लड प्रेशर बहुत कम हो जाए, तो शरीर के प्रमुख अंगों  जैसे मस्तिष्क, किडनी और हृदय  तक पर्याप्त रक्त नहीं पहुंचता, जिससे उनका कार्य रुक सकता है, यही स्थिति जानलेवा बन सकती है।

सामान्य ब्लड प्रेशर का रेंज 120/80 mmHg है, अगर ब्लड प्रेशर अक्सर 90/60 mmHg से कम बना रहता है तो इसे हाइपोटेंशन यानी लो ब्लड प्रेशर कहा जाता है।

जर्नल ऑफ द अमेरिकन कॉलेज ऑफ कार्डियोलॉजिस्ट में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, लो सिस्टोलिक बीपी (90 से कम) वाले व्यक्तियों में मृत्यु दर अधिक पाई गई। अगर ब्लड प्रेशर लगातार सामान्य से कम बना रहता है तो ऐसे मरीजों को तुरंत मेडिकल इमरजेंसी की जरूरत होती है।

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थकान-कमजोरी के कारण - फोटो : Freepik.com
लो बीपी और इसके कारण होने वाली समस्याएं

ब्लड प्रेशर अक्सर सामान्य से कम बना रहना आपके संपूर्ण स्वास्थ्य के लिए कई प्रकार से नुकसानदायक हो सकता है। 

लो ब्लड प्रेशर के कारण दिमाग तक ऑक्सीजन युक्त रक्त का संचार कम हो जाता है। ब्रेन को पर्याप्त रक्त और ऑक्सीजन न मिलने पर बेहोशी, चक्कर या यहां तक कि स्ट्रोक भी हो सकता है। इसके अलावा ब्लड प्रेशर लो रहने से दिल को शरीर के अंगों तक रक्त पंप करने में दिक्कत होती है, जिससे हृदय गति भी रुक सकती है।
  • किडनी को लगातार रक्त की जरूरत होती है। लो बीपी में रक्त प्रवाह बाधित हो जाता है, जिससे किडनी से संबंधित समस्याएं हो सकती हैं।
  • गर्भवती महिलाओं के लिए लो बीपी और भी खतरनाक हो सकता है। लो बीपी भ्रूण तक ऑक्सीजन की आपूर्ति कम कर सकता है, जिससे गर्भपात या जन्म दोष का खतरा बढ़ जाता है।
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ब्लड प्रेशर को रखें कंट्रोल - फोटो : Freepik.com
लो ब्लड प्रेशर के लक्षण और इससे बचाव के तरीके

लो ब्लड प्रेशर के कारण कई तरह की दिक्कतें हो सकती हैं। इसके लक्षणों में चक्कर आना-बेहोशी, थकान और कमजोरी बने रहने के साथ धुंधला दिखाई देना, हाथ-पैर ठंडे रहने जैसी कई दिक्कतें हो सकती हैं। 

लो ब्लड प्रेशर की समस्या से बचे रहने के लिए कुछ उपाय किए जा सकते हैं। जिन लोगों को अक्सर लो बीपी की समस्या अधिक रहती है उन्हें डॉक्टर की सलाह से थोड़ा अधिक नमक खाना चाहिए। शरीर को हाइड्रेटेड रखने, छोटे-छोटे मील्स लेकर भी आप ब्लड प्रेशर कंट्रोल रख सकते हैं।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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