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Covid-19: नए वैरिएंट्स से खतरे के साथ लॉन्ग कोविड भी बड़ा चैलेंज, संक्रमण के एक साल बाद तक भी नहीं जा रहे लक्षण

Sat, 07 May 2022 02:06 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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लॉन्ग कोविड की बनी रहने वाली समस्याएं - फोटो : iStock
पिछले दो साल से अधिक समय से वैश्विक स्तर पर जारी कोरोना के संक्रमण ने लोगों की सेहत को कई तरह से प्रभावित किया है। कोरोना के सामने आए वैरिएंट्स के कारण जहां कुछ लोगों में गंभीर रोग के मामले देखने को मिले वहीं ज्यादातर लोगों में संक्रमण से ठीक हो जाने के लंबे समय बाद तक भी बने लॉन्ग कोविड के लक्षण मुश्किलें बढ़ाने वाली हैं। शुरुआती संक्रमण से ठीक हो जाने के बाद भी महीनों तक महसूस होने वाली दिक्कतों को लॉन्ग कोविड या पोस्ट कोविड सिंड्रोम के रूप में जाना जाता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक यह वैश्विक स्तर पर उभरती बड़ी चुनौती है, जिसने स्वास्थ्य क्षेत्र पर दबाव बढ़ा दिया है।

लॉन्ग कोविड के खतरे को जानने के लिए शोध कर रही वैज्ञानिकों की टीम ने पाया कि बड़ी संख्या में कोरोना संक्रमण से ठीक हो चुके लोगों में छह महीने से एक साल तक भी लॉन्ग कोविड के लक्षण मौजूद रह सकते हैं।

यूके नेशनल हेल्थ सर्विस की एक रिपोर्ट में शोधकर्ताओं ने बताया कि संक्रमण से ठीक हो जाने के एक साल बाद तक भी चार में से सिर्फ एक व्यक्ति ही पूरी तरह से ठीक महसूस कर पा रहा है। कई लोगों में लॉन्ग कोविड सिंड्रोम के लक्षण गंभीर भी हो सकते हैं, जिनको लेकर उन्हें लगातार डॉक्टरी सहायता की आवश्यकता हो सकती है। आइए जानते है कि इस संकट को लेकर विशेषज्ञों का क्या कहना है?
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पोस्ट कोविड सिंड्रोम - फोटो : iStock
लंबे समय तक परेशान कर सकती है लॉन्ग कोविड की समस्या

द लैंसेट रेस्पिरेटरी मेडिसिन जर्नल में प्रकाशित शोध में वैज्ञानिकों ने बताया कि कोरोना से ठीक हो जाने के एक साल बाद तक, अस्पताल में भर्ती रह चुके चार में से तीन लोग अब भी किसी न किसी समस्या के शिकार हैं। सिर्फ एक व्यक्ति को पूरी तरह से लक्षणों से मुक्त देखा जा रहा है। यह आंकड़े काफी चिंताजनक हैं। कुछ स्थितियां लोगों में लॉन्ग कोविड के जोखिम को बढ़ा देती हैं। जो लोग मोटापा के शिकार हैं या फिर इलाज के दौरान जिन्हें वेंटिलेटर पर रखने की जरूरत पड़ी थी, उनमें एक साल बाद तक भी कई तरह की समस्याएं बनी हुई हैं।
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संक्रमण से ठीक होने के बाद भी लक्षण - फोटो : iStock
लॉन्ग कोविड के जोखिम

लॉन्ग कोविड के जोखिमों के बारे में ब्रिटेन के लीसेस्टर यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं के नेतृत्व में किए गए इस शोध से पता चलता है कि पुरुषों की तुलना में महिलाओं में पोस्ट कोविड समस्याओं का खतरा अधिक होता है। एक साल से अधिक समय तक कई लोगों में थकान, मांसपेशियों में दर्द, कमजोरी, नींद की समस्या और सांस फूलने की दिक्कत बनी हुई है। शोधकर्ताओं का कहना है कि प्रभावी उपचार के बिना, लॉन्ग कोविड सिंड्रोम के लक्षण नई दीर्घकालिक समस्याओं का कारण भी बन सकते हैं।

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पोस्ट कोविड में हो सकती हैं कई तरह की समस्याएं - फोटो : pixabay
शोध में क्या पता चला?

शोधकर्ताओं ने लॉन्ग कोविड के खतरे को जानने के लिए 2,320 प्रतिभागियों के डेटा का अध्ययन किया। इसमें कई स्तर पर किए गए जांच में अध्ययनकर्ताओं ने पाया कि 319 लोगों में साल भर से अधिक समय तक गंभीर शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य की समस्याएं बनी हुई हैं। वहीं 179 लोगों में संज्ञानात्मक समस्याओं के मामले देखे गए। 645 लोगों में एक साल से अधिक समय तक हल्के मानसिक और शारीरिक लक्षण बने हुए पाए गए हैं। शोधकर्ताओं का कहना है कि लक्षणों की गंभीरता कई कारकों पर निर्भर करती है।
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लॉन्ग कोविड के खतरे को जानिए - फोटो : iStock
अध्ययन का निष्कर्ष

अध्ययन के निष्कर्ष में वैज्ञानिकों ने बताया कि मोटापा, व्यायाम की कमी, संक्रमण के दौरान गंभीर लक्षणों का अनुभव और इंफ्लामेटरी  बायोमार्कर सी-रिएक्टिव प्रोटीन के स्तर में वृद्धि के कारण पोस्ट कोविड सिंड्रोम की समस्या गंभीर लक्षणों को जन्म दे सकती है। जिन लोगों में गंभीर और मध्यम लक्षण वाले संज्ञानात्मक हानि के मामले रिपोर्ट किए गए हैं, उनमें इंफ्लामेटरी बायोमार्कर इंटरल्यूकिन-6 (IL-6) का स्तर अधिक पाया गया। संक्रमण से ठीक होने के बाद भी लोगों को सावधानी बरतते रहने की आवश्यकता है।
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लॉन्ग कोविड का जीवन की गुणवत्ता पर असर - फोटो : Pixabay
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?

लीसेस्टर विश्वविद्यालय के प्रोफेसर क्रिस्टोफर ब्राइटलिंग कहते हैं, कोरोना संक्रमण के साथ-साथ पोस्ट कोविड सिंड्रोम के मामले भी स्वास्थ्य क्षेत्र के लिए बड़ी चुनौती बने हुए हैं। सभी लोगों को यह बात ध्यान रखने की आवश्यकता है कि प्रभावी उपचार के बिना लॉन्ग कोविड के लक्षणों को कम नहीं किया जा सकता है। इसको गंभीरता से न लेना दीर्घकालिक स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है। संक्रमण के बाद जीवन की गुणवत्ता में सुधार करने के लिए लक्षणों पर विशेष ध्यान देते रहने की आवश्यकता है। 


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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