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World Liver Day 2022: कोविड-19 ने बढ़ा दी हैं लिवर की समस्याएं, ये लक्षण बताते हैं स्वस्थ नहीं है आपका सबसे महत्वपूर्ण अंग

Tue, 19 Apr 2022 01:03 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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लिवर की बढ़ती समस्याओं के कारण - फोटो : iStock
कोरोना वायरस संक्रमण ने हमारे शरीर को कई तरह से प्रभावित किया है। पिछले दो साल से जारी इस वैश्विक महामारी का शरीर के कई अंगों पर गंभीर दुष्प्रभाव देखने को मिला है। अध्ययनों से पता चलता है कि कोरोना वायरस ने फेफड़े और हृदय जैसे अंगों को गंभीर क्षति पहुंचाई है, वहीं हाल ही में सामने आए कोरोना के कुछ वैरिएंट्स के अन्य अंगों पर भी दुष्प्रभावों के बारे में पता चलता है। रिपोर्ट्स के मुताबिक कोविड-19 महामारी की शुरुआत के बाद से वैश्विक स्तर पर लिवर रोगों के मामलों में इजाफा हुआ है, ऐसे में सवाल खड़ा होता है कि क्या कोरोना संक्रमण लिवर की समस्याओं का भी कारण बन सकता है?

अध्ययनों में वैसे तो प्रत्यक्ष तौर पर कोरोना संक्रमण के कारण लिवर की समस्याओं के बारे में ज्यादा देखने को नहीं मिलता है, हालांकि वैज्ञानिकों का कहना है कि महामारी ने अप्रत्यक्ष तौर पर लिवर की समस्याओं को जरूर बढ़ा दिया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, सभी लोगों को लिवर रोगों के लक्षणों के बारे में विशेष सावधानी और सतर्कता बरतते रहनी चाहिए, ताकि शरीर के इस सबसे महत्वपूर्ण अंग की सेहत का ख्याल रखा जा सके।

वैश्विक स्तर पर बढ़ते लिवर रोगों के बारे में जागरूकता बढ़ाने के लिए हर साल 19 अप्रैल को वर्ल्ड लिवर डे मनाया जाता है। आइए जानते हैं कौन से लक्षण लिवर की बीमारियों की तरफ संकेत हो सकते हैं जिनका सभी लोगों को ध्यान रखना चाहिए?  
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कोरोना संक्रमण और लिवर की समस्याएं - फोटो : pixabay
कोविड-19 और लिवर की समस्याएं

कोविड-19 और लिवर रोगों के जोखिम को जानने के लिए अध्ययन कर रही शोधकर्ताओं की एक टीम ने महामारी के कारण लिवर की समस्याओं में वृद्धि का दावा किया है। लिवर इंटरनेशनल जर्नल में प्रकाशित इस शोध में वैज्ञानिकों ने बताया कि महामारी के पहले वर्ष के दौरान जीवनशैली में आए बदलाव के कारण दुनियाभर में लिवर रोगियों की संख्या में बढ़ोतरी आई है।

जापान में ओसाका सिटी यूनिवर्सिटी के शोधकर्ताओं के नेतृत्व में किए गए अध्ययन से पता चलता है कि कोविड महामारी के बाद से मेटाबॉलिक डिस्फंक्शन के कारण फैटी लिवर डिजीज के मामले काफी बढ़े हैं। शोध में पाया गया कि महामारी के दौरान रात में देर से भोजन करने, शराब के सेवन में वृद्धि के साथ तंबाकू-धूम्रपान जैसे कारकों के चलते फैटी लिवर डिजीज के मामलों में वृद्धि दर्ज की गई है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक सभी लोगों को फैटी लिवर डिजीज के लक्षणों को लेकर विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है। 
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फैटी लिवर की दिक्कत - फोटो : iStock
फैटी लिवर के लक्षणों के बारे में जानिए

क्लीवलैंड क्लीनिक की रिपोर्ट के मुताबिक फैटी लिवर की समस्या में कुछ लोगों में इसके लक्षण लंबे समय तक नजर ही नहीं आते हैं। ऐसे में पेट से संबंधित अन्य संकेतों पर भी विशेष ध्यान देते रहने की आवश्यकता होती है। सामान्यतौर पर फैटी लिवर डिजीज के कारण लोगों को इस तरह की दिक्कतों का अनुभव हो सकता है।
  • पेट में दर्द, विशेषकर ऊपरी दाहिने हिस्से में।
  • मतली, भूख न लगना या वजन कम होना।
  • त्वचा और आंखों का पीला होना (पीलिया)।
  • पेट और पैर में सूजन की समस्या (एडिमा)।
  • अत्यधिक थकान या भ्रम की स्थिति।
  • कमजोरी बने रहना।

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शराब के कारण बढ़ती लिवर की समस्याएं - फोटो : Pixabay
किन लोगों में होता है अधिक खतरा?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक कुछ स्थितियां आपमें  फैटी लिवर की समस्या को बढ़ा सकती हैं, इस बारे में सभी लोगों को विशेष सावधानी बरतते रहने की आवश्यकता है। 
  • पोस्टमेनोपॉजल महिलाओं में फैटी लिवर की समस्या का खतरा बढ़ जाता है। 
  • पेट की चर्बी बढ़ना, मोटापा।
  • हाई ब्लड प्रेशर, मधुमेह या हाई कोलेस्ट्रॉल।
  • ऑब्सट्रक्टिव स्लीप एपनिया की समस्या भी फैटी लिवर को बढ़ा सकती है।
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लिवर को स्वस्थ रखने के उपाय जरूरी - फोटो : iStock
फैटी लिवर डिजीज से बचाव कैसे करें?

स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक दैनिक जीवन में कुछ साधारण से उपाय करके फैटी लिवर डिजीज की समस्या से बचाव किया जा सकता है। 
  • शराब से सेवन से परहेज करें। 
  • अपना वजन नियंत्रित रखें।
  • पोषक तत्वों से भरपूर आहार लें। सेचुरेटेड फैट, ट्रांस फैट और कार्बोहाइड्रेट का सेवन कम करें।
  • ब्लड शुगर, ट्राइग्लिसराइड और कोलेस्ट्रॉल के स्तर को प्रबंधित करने के उपाय करते रहें।
  • रोजाना कम से कम 30 मिनट के व्यायाम का लक्ष्य रखें। 
 
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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