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Breast Cancer: 100 साल की उम्र में हुआ ब्रेस्ट कैंसर, एक साल में ही हो गईं ठीक; आप इस बीमारी से कैसे बचें?

Fri, 27 Jun 2025 07:13 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • 100 साल की उम्र में अमेरिका में लेयने हॉरविच नामक महिला में ब्रेस्ट कैंसर का पता चला। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक डॉक्टरों ने उनमें स्टेज 1 ब्रेस्ट कैंसर का निदान किया, हालांकि अच्छी खबर ये है कि एक साल के भीतर ही  वह इस बीमारी को मात भी दे चुकी हैं।
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महिलाओं में ब्रेस्ट कैंसर के मामले (सांकेतिक) - फोटो : Freepik.com
Breast Cancer: दुनियाभर में कैंसर की बीमारी मौत का प्रमुख कारण बनी हुई है, हर साल इससे लाखों लोगों की मौत हो जाती है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, साल 2023 में कैंसर से लगभग 10 मिलियन (एक करोड़) लोगों की मृत्यु हुई, ये प्रतिदिन लगभग 26,300 मौतों के बराबर है। 2050 तक कैंसर के मामलों में और भी बढ़ोतरी को लेकर विशेषज्ञों ने चिंता जताई है।

महिलाओं में स्तन कैंसर के मामले तेजी से बढ़ते जा रहे हैं। इस रोग का खतरा 20 से लेकर 100 साल तक सभी उम्र की महिलाओं में देखा जा रहा है।

एक हालिया रिपोर्ट में 100 साल की उम्र में अमेरिका में लेयने हॉरविच नामक महिला में ब्रेस्ट कैंसर का पता चला। मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक डॉक्टरों ने उनमें स्टेज 1 ब्रेस्ट कैंसर का निदान किया, हालांकि अच्छी खबर ये है कि एक साल के भीतर ही वह इस बीमारी को मात भी दे चुकी हैं और 101 साल की उम्र में, वह कैंसर मुक्त हो गई हैं।

हॉरविच अपनी लंबी उम्र और अच्छे स्वास्थ्य के लिए सक्रिय जीवनशैली को श्रेय देती हैं,  90 की उम्र तक वह टेनिस खेलती थीं। 
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ब्रेस्ट कैंसर का बढ़ता जोखिम - फोटो : Freepik.com
100 साल की उम्र में कैंसर को दिया मात

लेन की ऑन्कोलॉजिस्ट डॉ. कैथरीन पेस कहती हैं, 100 साल की उम्र में कैंसर होने पर कुछ ही लोग शायद ठीक हो पाएं या इससे मुकाबले का विकल्प चुनते हैं। हालांकि उन्होंने दवाओं और अन्य उपचार प्रक्रियाओं के साथ सक्रिय जीवनशैली और स्वास्थ्य को ठीक रखने वाले आहार पर ध्यान दिया। लिहाजा एक साल के भीतर ही वो कैंसर फ्री हो गई हैं।

चूंकि ये बीमारी सभी उम्र की महिलाओं को प्रभावित करती है, इसलिए कम उम्र से ही ब्रेस्ट कैंसर को लेकर अलर्ट हो जाना जरूरी है।
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ब्रेस्ट कैंसर का जोखिम - फोटो : Freepik.com
20 से 100 साल की उम्र तक, कोई भी हो सकता है इसका शिकार

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, 100 साल की महिला में स्तन कैंसर होना दुर्लभ है, लेकिन यह असामान्य नहीं है। स्तन कैंसर का जोखिम आम तौर पर उम्र के साथ बढ़ता है। पर हाल के वर्षों में 20 की उम्र वाली लड़कियों से लेकर 100 साल तक की महिलाओं को इसका शिकार पाया गया है। 

अधिकांश महिलाओं में स्तन कैंसर का निदान 50 वर्ष की आयु तक होता है। कुछ युवा महिलाओं में निदान के समय कैंसर काफी अधिक उन्नत हो सकता है और इसका इलाज करना भी कठिन हो सकता है। समय रहते इसके लक्षणों का पता लगाना और इलाज प्राप्त करना जरूरी हो जाता है।

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दो बार भी हो सकता है कैंसर - फोटो : Freepik.com
एक से अधिक बार भी हो सकता है ब्रेस्ट कैंसर

रिपोर्ट्स से पता चलता है कि ब्रेस्ट कैंसर एक बार ठीक होने के बाद फिर से भी हो सकता है।हाल ही में मशहूर अभिनेत्री अरुणा ईरानी ने एक इंटरव्यू में बताया कि वह दो बार स्तन कैंसर का शिकार हुई हैं।

डॉक्टर बताते हैं, वैसे तो पहली बार कैंसर का पता चलने के बाद प्रारंभिक उपचार का उद्देश्य सभी कैंसर कोशिकाओं को नष्ट करना होता है, लेकिन कई मामलों में कैंसर कोशिकाएं उपचार से बच जाती हैं और फिर से कैंसर को बढ़ावा दे सकती हैं। प्रारंभिक उपचार के कुछ महीनों या वर्षों बाद फिर से कैंसर हो सकता है।
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ब्रेस्ट कैंसर की करते रहें जांच - फोटो : Freepik.com
महिलाएं खुद से करती रहें जांच

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, प्रारंभिक स्तर पर स्तन कैंसर की पहचान और उपचार से इसके पूर्ण रूप से ठीक होने की संभावना बढ़ जाती है। भले ही आप स्वस्थ हैं फिर भी स्तन की निरंतर जांच जरूर करते रहें।
  • 20 से अधिक उम्र की सभी महिलाओं को नियमित रूप से अपने स्तनों की खुद से जांच करते रहना चाहिए।
  • अगर आपके स्तन के आकार में कोई बदलाव नजर आता है या फिर छूने पर किसी तरह की गांठ महसूस होती है तो आपको सावधान हो जाना चाहिए।
  • अधिकांश महिलाओं में स्तन कैंसर के मामले में शुरुआत में इन दोनों लक्षणों का अनुभव होता है।
  • स्तनों में दर्द रहना या निप्पल से किसी प्रकार का डिस्चार्ज होते रहना भी अलार्मिंग है, जिसको लेकर सभी लोगों को सतर्कता बरतनी चाहिए। 


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नोट: यह लेख अमर उजाला के विशेष कार्यक्रम 'संवाद' में हुई बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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