वायु प्रदूषण के दुष्प्रभावों को लेकर अध्ययन
- फोटो : Freepik.com
रिपोर्ट ने बढ़ाई चिंता
अंतरराष्ट्रीय स्तर पर माने गए साइंटिफिक मॉडल का इस्तेमाल करके शोधकर्ताओं ने सिर्फ हवा में मौजूद प्रदूषण को मापने के बजाय, यह भी कैलकुलेट किया कि कितना पार्टिकुलेट मैटर असल में फेफड़ों के अलग-अलग हिस्सों में जाता है और जमा होता है।
अध्ययनकर्ताओं ने कहा, दिल्ली के लोगों के फेफड़ों में बारीक पार्टिकुलेट मैटर का जमाव भारत के एयर क्वालिटी स्टैंडर्ड के हिसाब से जितना होना चाहिए, उससे लगभग 10 गुना ज्यादा था। वहीं वर्ल्ड हेल्थ ऑर्गनाइजेशन (डब्ल्यूएचओ) की गाइडलाइंस के तहत अनुमानित लेवल से लगभग 40 गुना ज्यादा था।
विशेषज्ञों ने कहा, ये सेहत के लिहाज से बहुत गंभीर संकेत है और भविष्य में फेफड़े और सांस के मरीजों की संख्या में भारी उछाल आने की आशंका है।
---------------------
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।
अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।