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Long Covid: कोरोना के पांच या अधिक लक्षण वाले मरीजों को 'लॉन्ग कोविड' का ज्यादा खतरा

Thu, 29 Oct 2020 12:17 AM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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लॉन्ग कोविड (Long Covid) - फोटो : Freepic / Amar Ujala
सामान्यत: यह जरूरी नहीं कि कोरोना से पीड़ित दो व्यक्ति में समान लक्षण हों। उनमें देखे गए कोरोना के लक्षण संक्रमण की गंभीरता को निर्धारित कर सकते हैं। कोरोना वायरस के मरीजों में गंभीर संक्रमण 'लॉन्ग कोविड' के खतरे को भी बढ़ा सकता है। इसका मतलब ये है कि जो लोग कोरोना से ठीक हुए हैं, उनमें हफ्तों या फिर महीनों तक लक्षण देखे जा सकते हैं। खासकर कोरोना के उच्च जोखिम वर्ग जैसे, बुजुर्ग, अधिक वजन वाले लोग, अस्थमा के मरीजों में 'लॉन्ग कोविड' का खतरा ज्यादा हो सकता है। इसके अलावा  वे लोग जिनमें पहले हफ्ते में ही कोविड-19 के पांच से अधिक लक्षण रहे हैं, उन्हें भी इसका सबसे ज्यादा खतरा है। किंग्स कॉलेज लंदन में हुए एक अध्ययन में यह दावा किया गया है। 
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कोरोना वायरस संक्रमण (File Photo) - फोटो : Social media
किंग्स कॉलेज लंदन के अध्ययन के मुताबिक, 20 में से एक व्यक्ति आठ हफ्ते तक बीमार रहा है। इस अध्ययन में यह भी बताया गया है कि बिना लक्षण या फिर हल्के लक्षण वाले मरीजों में भी ठीक होने के बाद कोरोना के लक्षण पाए गए हैं, जो महीनों तक जारी रह सकते हैं। यह स्थिति लॉन्ग कोविड की है। किंग्स कॉलेज, लंदन द्वारा किए गए इस अध्ययन में पाया गया कि जिन लोगों में कोरोना संक्रमण के पहले सप्ताह में पांच या अधिक लक्षण थे, उन्हें लॉन्ग कोविड होने का अधिक खतरा था। 
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कोरोना वायरस जांच (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
ब्रिटेन और स्वीडन के करीब चार हजार मरीजों पर हुए इस अध्ययन के मुताबिक, चार में से एक मरीज में कोरोना के साइड इफेक्ट देखे जा सकते हैं, जो रिकवरी के बाद भी हो सकते हैं। ये साइड इफेक्ट हल्के या मध्यम प्रकृति के या फिर न्यूरोलॉजिकल प्रभाव के रूप में हो सकते हैं। पिछले हफ्ते ब्रिटेन में हुए एक अन्य अध्ययन में यह भी देखा गया है कि लॉन्ग कोविड की संभावना का पता व्यक्ति की उम्र, उसके श्वसन स्वास्थ्य, लिंग और वजन के जरिए भी लगाया जा सकता है। 

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Coronavirus Reinfection - फोटो : iStock
ब्रिटेन की ही ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी में हुए एक शोध अध्ययन के मुताबिक, कोरोना से रिकवर होने वाले मरीजों में कई महीनों तक कोरोना वायरस का असर दिख रहा है। लॉन्ग कोविड से जूझ रहे लोगों में थकान की शिकायत कॉमन है। वहीं इसके अन्य लक्षणों में सांस लेने में परेशानी, सिर दर्द, मांसपेशियों और जोड़ों में दर्द, देखने-सुनने की समस्याएं, गंध और स्वाद महसूस करने की क्षमता का कम हो जाना आदि शामिल हैं। लॉन्ग कोविड से जूझ रहे लोगों में डिप्रेशन और एंग्जाइटी की समस्या भी दिखती है।
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Long Covid - फोटो : Amar Ujala
कोरोना संक्रमण के बाद दिल, फेफड़ों, किडनी और लिवर को भी नुकसान होने की संभावना रहती है। लॉन्ग कोविड को लेकर ऑक्सफोर्ड यूनिवर्सिटी की रिसर्च कहती है कि,
  • कोरोना से रिकवरी के बाद भी मरीजों में समस्याएं बरकरार हैं
  • ठीक से नहीं काम कर रहे हैं फेफड़े और दिल
  • 64 फीसदी मरीजों को सांस लेने में तकलीफ है
  • 26 फीसदी मरीजों को हार्ट संबंधी दिक्कतें होती
  • 29% को किडनी और 10% को लिवर संबंधी समस्या होती है
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नमूना लेते स्वास्थ्यकर्मी (फाइल फोटो) - फोटो : PTI
किंग्स कॉलेज के अध्ययन में शोधकर्ताओं ने एक और दिलचस्प अवलोकन किया। जिन मरीजों की कोरोना टेस्टिंग में देर हुई या फिर परीक्षण में कोई गलती हुई हो, उनमें भी पोस्ट कोविड के लक्षणों के विकसित होने की अधिक संभावना है। दिलचस्प बात यह भी है कि पहले सप्ताह में कोरोना के लक्षणों को छह अलग-अलग प्रकार के संक्रमणों में वर्गीकृत किया जा सकता है, जो आगे यह निर्धारित कर सकता है कि किनमें हल्का या गंभीर संक्रमण विकसित होने का अधिक जोखिम है।
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
इस संबंध में एक और अध्ययन में ऐसे ही परिणाम दिखते हैं। रोम के अस्पताल में हुए इस अध्ययन में पता चला है कि 143 मरीजों में से 87 फीसदी में ठीक होने के दो महीने बाद भी कई लक्षण दिखाई दिए हैं। इन मरीजों में खांसी, मांसपेशियों में दर्द, थकान, दस्त के अलावा फेफड़ों, दिल और किडनी में समस्या जैसे लक्षण पाए गए हैं। अमेरिकन मेडिकल एसोसिएशन के जर्नल JAMA में प्रकाशित अध्ययन में क्रॉनिक 'लॉन्ग कोविड' के आधे से अधिक मरीजों में थकान सबसे आम लक्षण मिला है।
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