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खुशखबरी: अधिक जोखिम वाले कोरोना मरीजों को अस्पताल में भर्ती होने से बचा सकती है ये दवा, अध्ययन में दावा

Tue, 31 Aug 2021 02:53 PM IST
सोनू शर्मा हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, वाशिंगटन
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
कोरोना को खत्म करने के लिए दुनियाभर में टीकाकरण अभियान तो चल ही रहे हैं, लेकिन इसके बावजूद संक्रमण के मामलों में बढ़ोतरी देखने को मिल रही है। इसके अलावा कोरोना मरीजों का एंटीबॉडी उपचार भी चल रहा है, जिसे हल्के संक्रमण वाले मरीजों पर काफी असरदार बताया गया है। अब इसको लेकर एक नया अध्ययन किया गया है, जिसमें दावा किया जा रहा है कि दो मोनोक्लोनल एंटीबॉडी उपचारों का संयोजन हल्के से मध्यम बीमारी से संक्रमित होने पर उच्च जोखिम वाले कोरोना मरीजों को अस्पताल में भर्ती होने से बचा सकता है। इस अध्ययन को द लैंसेट के ई-क्लिनिकल मेडिसिन जर्नल में प्रकाशित किया गया है। यह मोनोक्लोनल एंटीबाडी कॉकटेल केसिरिविमैब और इमडेविमैब का मिश्रण है। इसे अमेरिका की एफडीए से आपात इस्तेमाल की मंजूरी मिली हुई है। आपको बता दें कि अमेरिका के पूर्व राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप जब कोरोना से संक्रमित हुए थे, तब उनके इलाज में भी दो एंटीबॉडीज के एक कॉकटेल का इस्तेमाल किया गया था। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
एंटीबॉडी कॉकटेल का इस्तेमाल कोरोना के वैसे हल्के से मध्यम मरीजों में किया जाता है, जो ऑक्सीजन सपोर्ट पर नहीं हैं, लेकिन उन्हें गंभीर बीमारी का खतरा हो सकता है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
ई-क्लिनिकल मेडिसिन जर्नल के मुताबिक, कोरोना से संक्रमित 1,400 मरीजों पर इस 'कॉम्बो' कॉकटेल का अध्ययन किया गया। इसमें से 696 मरीजों को दिसंबर 2020 से लेकर अप्रैल के बीच ड्रग का मिश्रण दिया गया, जबकि अन्य मरीजों को नहीं दिया गया था। उपचार के बाद 14, 21 और 28 दिनों में मरीजों की बीमारी की स्थिति का मूल्यांकन किया गया। इससे पता चला कि उपचारित समूह के मरीजों के अस्पताल में भर्ती होने की संख्या काफी कम थी। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
शोधकर्ताओं ने बताया कि 14 दिनों में उपचारित समूह के महज 1.3 फीसदी लोगों को अस्पताल में भर्ती होने की जरूरत पड़ी, जबकि जिन मरीजों का इलाज नहीं हुआ था, उनमें ये संख्या 3.3 फीसदी थी। वही, 21 दिन के बाद भी उपचारित समूह के महज 1.3 फीसदी लोग ही अस्पताल में भर्ती हुए, जबकि बिना इलाज वाले मरीजों में ये संख्या 4.2 फीसदी थी। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
अध्ययन में पाया गया कि 28 दिन की समाप्ति पर उपचारित समूह के 1.6 फीसदी मरीज अस्पताल में भर्ती थे, जबकि बिना इलाज वाले मरीजों में यह संख्या 4.8 फीसदी थी। ऐसे में निष्कर्ष निकलता है कि इलाज किए गए मरीजों के अस्पताल में भर्ती होने की दर में 60 से 70 फीसदी की कमी आई थी। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
मेयो क्लीनिक में संक्रामक रोग विशेषज्ञ और स्टडी के वरिष्ठ लेखक रेमण्ड रेजनेबल ने कहा, 'एक बार फिर, इस वास्तविक दुनिया के अध्ययन से पता चलता है कि जब कई प्रकार की बीमारियों के कारण उच्च जोखिम वाले मरीज कोरोना के हल्के या मध्यम संक्रमण का शिकार होते हैं, तो मोनोक्लोनल इंजेक्शन का यह संयोजन (मिश्रण) उन्हें अस्पताल में भर्ती हुए बिना ठीक होने का मौका देता है। दूसरे शब्दों में कहें तो, वे घर पर ही सुरक्षित रूप से ठीक हो जाते हैं।'  

स्रोत और संदर्भ:    
Casirivimab–Imdevimab treatment is associated with reduced rates of hospitalization among high-risk patients with mild to moderate coronavirus disease-19 
https://www.thelancet.com/journals/eclinm/article/PIIS2589-5370(21)00382-5/fulltext 

अस्वीकरण नोट: यह लेख द लैंसेट के ई-क्लिनिकल मेडिसिन जर्नल में प्रकाशित स्टडी के आधार पर तैयार किया गया है। लेख में शामिल सूचना व तथ्य आपकी जागरूकता और जानकारी बढ़ाने के लिए साझा किए गए हैं। किसी भी तरह की बीमारी के लक्षण हों अथवा आप किसी रोग से ग्रसित हों तो अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें। 
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