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बड़ा सवाल: जानिए कैसे हुआ कोरोना के ओमिक्रॉन वैरिएंट का उदय? क्या है इसका एड्स कनेक्शन

Wed, 01 Dec 2021 01:36 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोरोना के नए वैरिएंट्स का उदय - फोटो : Pixabay
दुनियाभर के लिए मौजूदा समय में कोरोना का ओमिक्रॉन वैरिएंट बड़ी चिंता का विषय बना हुआ है। अब तक हुए अध्ययनों के आधार पर दावा किया जा रहा है कि कोरोना के इस वैरिएंट में 30 से अधिक म्यूटेशन देखे गए हैं जो इसे अब तक का सबसे संक्रामक वैरिएंट बनाते हैं। सबसे पहले दक्षिण अफ्रीका में देखे गए कोरोना के इस वैरिएंट ने तेजी से अपने पैर फैलाने शुरू कर दिए हैं। अब तक 10 से अधिक देशों में  ओमिक्रॉन से संक्रमण के मामले सामने आ चुके हैं। कई देशों ने कोरोना से एहतियात के दौर पर अंतरराष्ट्रीय यातायात को प्रतिबंधित करना शुरू कर दिया है। इन सबके बीच लोगों के मन में एक सवाल अब भी बना हुआ है कि आखिर सबसे पहले  ओमिक्रॉन से संक्रमित कौन हुआ या फिर किस व्यक्ति से ओमिक्रॉन संक्रमण की शुरुआत हुई है?

इसी को लेकर हाल ही में साउथ अफ्रीका का एक वैज्ञानिक ने बड़ा दावा किया है। वैज्ञानिक का कहना है कि ऐसा संदेह है कि कोरोना का यह नया वैरिएंट किसी एचआईवी/ एड्स के साथ लंबे समय तक कोविड -19 संक्रमण के रोगी से फैला होगा। कोरोना के इस नए वैरिएंट पर नजर रखने वाले वैज्ञानिक का कहना है कि इम्यूनोकंप्रोमाइज्ड व्यक्ति के कोविड से संक्रमित होने की अवधि लंबी हो सकती है जिसमें वायरस को उत्वरिवर्तित होने का समय मिल जाता है। ओमिक्रॉन का उदय संभवत: इसी तरीके से हुआ होगा।
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कोरोना का नया वैरिएंट ओमिक्रॉन - फोटो : Pixabay
कैसे होता है वायरस का म्यूटेशन?
वायरस में म्यूटेशन के बारे में समझने की कोशिश करें तो वैज्ञानिक बताते हैं, वायरस के आनुवंशिक कोडिंग में कुछ त्रुटियों के कारण म्यूटेशन होता है। आमतौर पर यह स्थिति तब आती है जब वायरस रेप्लीकेट कर रहा होता है। कभी-कभी आनुवंशिक कोड में ये परिवर्तन वायरस में एक प्रोटीन को बदल देते हैं जिससे वायरस की प्रकृति में बदलाव आ जाता है। यही कारण है कि म्यूटेशन के बाद वायरस अधिक संक्रामक और घातक हो जाते हैं। ओमिक्रॉन के मामले में भी संभवत: ऐसा ही कुछ हुआ होगा। 
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अध्ययन में सामने आई कई रोचक बातें - फोटो : Pixels
इम्युनोकॉम्प्रोमाइज्ड रोगियों में वायरस का म्यूटेशन
नेचर जर्नल में फरवरी में प्रकाशित एक अध्ययन में एक इम्युनोकॉम्प्रोमाइज्ड मरीज के डेटा के बारे में बताया गया था जिसकी कोविड संक्रमित रहने के 102 दिनों के बाद मृत्यु हो गई थी। 102 दिनों की अवधि में 23 अलग-अलग दिनों में लिए गए नमूनों के अध्ययन में कैम्ब्रिज विश्वविद्यालय की एक टीम ने  पाया कि इम्युनोकॉम्प्रोमाइज्ड मरीज के शरीर में वायरस में होने वाले म्यूटेशन इसे अधिक आसानी से फैलने और एंटीबॉडी से बचने में सक्षम बनाते हैं। 

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कोविड रिसर्च (सांकेतिक) - फोटो : पीटीआई
इस अध्ययन में भी सामने आई म्यूटेशन वाली बात
इसके अलावा पिछले साल द न्यू इंग्लैंड जर्नल ऑफ मेडिसिन (एनईजेएम) में प्रकाशित एक जर्नल में हार्वर्ड मेडिकल स्कूल के शोधकर्ताओं ने इम्युनोकॉम्प्रोमाइज्ड कोविड पॉजिटिव रोगी के मामले का वर्णन किया था। वह रोगी 152 दिनों तक कोरोना से संक्रमित रहा। इस दौरान अलग-अलग समय पर लिए गए सैंपलों के अध्ययन में वैज्ञानिकों ने पाया था कि संक्रमण की अवधि के दौरान वायरस के स्पाइक प्रोटीन में 12 म्यूटेशनों की पहचान की गई थी, जो इसे प्रतिरक्षा से बचने के योग्य बना रहे थे। 
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तेजी से बढ़ रहे हैं म्यूटेशन - फोटो : iStock
ओमिक्रॉन वैरिएंट के उदय को लेकर अध्ययन
इस तरह के रिपोर्टस के आधार पर अब वैज्ञानिक इस बात का कयास लगा रहे हैं कि संभवत: ओमिक्रॉन वैरिएंट भी किसी इम्युनोकॉम्प्रोमाइज्ड कोविड पॉजिटिव रोगी के माध्यम से भी उपजा हो सकता है। इतना ही नहीं तमाम अध्ययनों के माध्यम से वैज्ञानिक चिकित्सकों को भी सतर्क कर रहे हैं। वैज्ञानिकों का कहना है कि इम्युनोकॉम्प्रोमाइज्ड कोविड रोगियों का इलाज करते समय विशेष सावधानी बरतने की आवश्यकता है, क्योंकि ऐसे रोगी वायरस के म्यूटेशन के प्रमुख वाहक बन सकते हैं।
 
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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से प्राप्त जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। अमर उजाला इस दावे की पुष्टि नहीं करता है, यह वैज्ञानिक का मत है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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