फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

बड़ी कामयाबी: आपमें हृदय रोगों का जोखिम है या नहीं? इस टेस्ट से आसानी से कर सकेंगे पता, जानिए विस्तार से

Fri, 08 Jul 2022 06:14 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
विज्ञापन
1 of 5
हृदय रोगों के जोखिम को कैसे पहचानें - फोटो : iStock
करीब एक दशक पहले तक हृदय रोगों को उम्र बढ़ने के साथ होने वाली समस्या के तौर पर जाना जाता था, हालांकि अब कम उम्र के लोग भी इसके शिकार पाए जा रहे हैं। कार्डियोवस्कुलर रोग (सीवीडी) दुनियाभर में बढ़ती मृत्युदर का प्रमुख कारण है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ)  के अनुसार दुनियाभर में हृदय की बीमारियों से होने वाली युवाओं की मौत में अकेले भारत से 20 फीसदी मामले सामने आते हैं।

हाल के वर्षों में कई सिलेब्रिटीज की युवा अवस्था में ही दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि चूंकि हृदय रोगों का खतरा समय के साथ सभी उम्र के लोगों में बढ़ता जा रहा है, ऐसे में इसको लेकर विशेष सावधानी बरतते रहने की आवश्यकता है। 

आमतौर पर सीवीडी के लक्षण तभी उभरते हैं, जब दिल में रक्त पहुंचाने वाली धमनियों को नुकसान होना शुरू हो चुका होता है। इसके कई कारण हो सकते हैं, इसमें लाइफस्टाइल की गड़बड़ी, खान-पान में पौष्टिकता की कमी, हाई ब्लड प्रेशर, धूम्रपान, और मोटापा को प्रमुख जोखिम कारक के तौर पर देखा जा रहा है। हृदय रोगों के जोखिम का पता लगाने के लिए शोध कर रही वैज्ञानिकों की टीम ने जेनेटिक सीक्वेसिंग के ऐसे तरीके के बारे में पता लगाया है जिसके आधार पर इस बात का अंदाजा लगाया जा सकेगा कि आपमें हृदय रोगों के विकसित होने का जोखिम कितना अधिक है? आइए इस बारे में जानते हैं।  
विज्ञापन

2 of 5
हृदय रोगों के पहले से लग सकेगा अंदाजा - फोटो : istock
हृदय रोगों के खतरे की जांच

नेक्सट जेनरेशन सीक्वेसिंग के आविष्कार के साथ अब रोगी के जीन्स में होने वाले बदलाव की जांच के लिए पूरी जेनेटिक सीक्वेसिंग की जा सकती है। इस तकनीक से सीवीडी जैसी आम तौर पर होने वाली बीमारियों का जेनेटिक आधार समझने में मदद मिलती है। सीवीडी जैसे रोग, अपनी प्रकृति के अनुसार पॉलिजेनिक (कई जीन्स) का नतीजा होते हैं। इसकी जांच के लिए पॉलिजेनिक रिस्क स्कोर (पीआरएस) का तरीका अपनाकर किसी खास रोग के लिए किसी व्यक्ति के जेनेटिक जोखिम का पता लगाया जाता है। यानि कि अब इस बात का अंदाजा लगाया जा सकेगा कि आपमें आनुवांशिक तौर पर हृदय रोगों का खतरा कितना है?
विज्ञापन

3 of 5
हृदय रोग के जोखिम को जानने के लिए तरीका - फोटो : iStock
पॉलिजेनिक रिस्क स्कोर क्या होता है?

पॉलिजेनिक रिस्क स्कोर मानव जीनोम में कई बदलाव को एकीकृत करता है। इसमें उन लोगों का पता लगाने की क्षमता होती  है, जिसमें हृदय रोग जैसी बीमारियों के पनपने का खतरा होता है। हाल ही में कई केंद्रों पर की गई स्टडी से यह पता चला है कि दक्षिण एशियाई लोगों में कोरोनरी धमनी के रोगों का खतरा काफी होता है। इसमें शोधकर्ताओं ने पाया कि अन्य देशों की तुलना में भारतीय लोगों में हृदय और रक्त की धमनियों से संबंधित रोग होने की आशंका तीन गुना ज्यादा होती है। 

4 of 5
हृदय की समस्याओं का लगेगा अंदाजा - फोटो : Pixabay
कार्डियोजेन टेस्ट से पता चलेगा हृदय रोगों का खतरा

मेडजेनोम के जीन्ससेंस द्वारा जारी कार्डियोजेन टेस्ट व्यक्ति को भविष्य में होने वाले हृदय संबंधी रोगों के लिए जीन्स के जोखिम का पता लगाने वाला टेस्ट है। डॉ. वेदम रामप्रसाद (वैज्ञानिक और सीईओ, मेड जीनोम लैब) बताते हैं,  यह किसी मनुष्य के डीएनए में 6 मिलियन से ज्यादा साइट्स को एकीकृत करता है और उसे यह बताता है कि उसे दिल के दौरों का खतरा कितना है?

इसे कार्डियोजेन रिस्क स्कोर (केआरएस) कहा जाता है, जिससे 90 फीसदी की सटीकता के साथ हृदय संबंधी रोग होने के खतरे की भविष्यवाणी की जा सकती है। केआरएस के आधार पर यह पहचाना जा सकता है कि भविष्य में किस व्यक्ति को दिल के दौरे पड़ने की ज्यादा आशंका है, किसे हल्के दौरे पड़ने और किसे इसकी औसत आशंका है। 
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
हार्ट अटैक जैसे जोखिमों को किया जा सकेगा कम - फोटो : iStock
पहले ही जान सकेंगे अपना जोखिम

विशेषज्ञों का कहना है कि इस परीक्षण के आधार पर अपने जोखिम कारकों को जानकर बचाव किया जा सकता है। इससे हृदय रोगों के कारण मृत्यु के जोखिम को कम करने में भी मदद मिल सकेगी।  हालांकि दिल के रोगों के विकास का खतरा क्लिनिकल कारकों, जैसे रक्तचाप, कोलेस्ट्रोल और धूम्रपान के स्तर पर भी निर्भर करता है। क्लिनिकल जोखिम और केआरएस के मिश्रण से मरीज को दिल के रोगों के संभावित जोखिम का पता चलता है। कार्डियोजेन टेस्ट की सुविधा का लाभ मरीज घर बैठे उठा सकते हैं। कार्डियोजेन टेस्ट को 18 वर्ष से अधिक उम्र के लोग एक ही बार कराके भविष्य में हृदय रोगों के जोखिम का पता लगा सकते हैं।


---------------
नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें