करीब एक दशक पहले तक हृदय रोगों को उम्र बढ़ने के साथ होने वाली समस्या के तौर पर जाना जाता था, हालांकि अब कम उम्र के लोग भी इसके शिकार पाए जा रहे हैं। कार्डियोवस्कुलर रोग (सीवीडी) दुनियाभर में बढ़ती मृत्युदर का प्रमुख कारण है। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार दुनियाभर में हृदय की बीमारियों से होने वाली युवाओं की मौत में अकेले भारत से 20 फीसदी मामले सामने आते हैं।
हाल के वर्षों में कई सिलेब्रिटीज की युवा अवस्था में ही दिल का दौरा पड़ने से मौत हो गई। स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि चूंकि हृदय रोगों का खतरा समय के साथ सभी उम्र के लोगों में बढ़ता जा रहा है, ऐसे में इसको लेकर विशेष सावधानी बरतते रहने की आवश्यकता है।
आमतौर पर सीवीडी के लक्षण तभी उभरते हैं, जब दिल में रक्त पहुंचाने वाली धमनियों को नुकसान होना शुरू हो चुका होता है। इसके कई कारण हो सकते हैं, इसमें लाइफस्टाइल की गड़बड़ी, खान-पान में पौष्टिकता की कमी, हाई ब्लड प्रेशर, धूम्रपान, और मोटापा को प्रमुख जोखिम कारक के तौर पर देखा जा रहा है। हृदय रोगों के जोखिम का पता लगाने के लिए शोध कर रही वैज्ञानिकों की टीम ने जेनेटिक सीक्वेसिंग के ऐसे तरीके के बारे में पता लगाया है जिसके आधार पर इस बात का अंदाजा लगाया जा सकेगा कि आपमें हृदय रोगों के विकसित होने का जोखिम कितना अधिक है? आइए इस बारे में जानते हैं।