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Ramsay Hunt syndrome: इस बीमारी की चपेट में हैं जस्टिन बीबर, चिकनपॉक्स संक्रमण आप में भी बढ़ा देता है इसका खतरा

Mon, 13 Jun 2022 07:47 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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जस्टिन बीबर की समस्या - फोटो : Twitter
कनाडा के पॉप स्टार सिंगर जस्टिन बीबर के चेहर का हिस्सा आंशिक रूप से  लकवाग्रस्त हो गया है। यह खबर उनके प्रशंसकों के लिए किसी सदमे से कम नहीं है। मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि वह रामसे हंट सिंड्रोम नामक एक संक्रमण की चपेट में हैं। यह वायरस न्यूरोलॉजिकल समस्याओं का कारक माना जाता है, इससे चेहरे की नसें प्रभावित हो सकती हैं।

जस्टिन बीबर ने एक पोस्ट के माध्यम से बताया कि इस स्थिति में उनके लिए पलकें झपकाना या फिर मुस्कुराना तक कठिन हो गया है। इस घटना के चलते उनके आने वाले दिनों के प्रस्तावित शोज को कैंसिल कर दिया गया है।

रामसे हंट सिंड्रोम को स्वास्थ्य विशेषज्ञ गंभीर स्थिति के रूप में देखते हैं। अगर इसपर समय रहते ध्यान न दिया जाए तो लकवा के साथ-साथ यह सुनने की क्षमता को भी प्रभावित कर सकता है। रामसे हंट सिंड्रोम उसी वायरस के कारण होता है जो चिकनपॉक्स बीमारी फैलाती है। आमतौर पर चिकनपॉक्स के ठीक होने के बाद भी वायरस कुछ स्थितियों में आपकी नसों में रह सकता है। कुछ वर्षों बाद यह फिर से सक्रिय हो सकता है। इस स्थिति में यह आपके चेहरे की नसों को प्रभावित करता है। ऐसे में  रामसे हंट सिंड्रोम की समस्या किसी को भी हो सकती है। आइए इस संक्रमण के बारे में आगे विस्तार से जानते हैं।
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रामसे हंट सिंड्रोम की समस्या - फोटो : Istock
रामसे हंट सिंड्रोम और इसके लक्षण

मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि रामसे हंट सिंड्रोम की स्थिति चेहरे पर लकवा से लेकर स्थाई रूप से सुनने की क्षमता तक को प्रभावित करने वाली समस्याएं बढ़ा सकती है। इसलिए समय रहते इसके लक्षणों की पहचान कर इलाज कराने की सलाह दी जाती है। समय पर इलाज मिलने से जटिलताओं के जोखिम को कम किया जा सकता है। कुछ लोगों को इस स्थिति में कान में दर्द, बहरापन, कानों में बजने (टिनिटस), आंख बंद करने में कठिनाई, चक्कर आने जैसी दिक्कतें हो सकती हैं। हालांकि इस स्थिति में प्रमुख रूप से दो लक्षण देखने को मिलते हैं- 
  • कान में या उसके आसपास द्रव से भरे फफोले निकलना।
  • चेहरे की मांसपेशियों में कमजोरी या लकवा।
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चिकन पॉक्स के बाद बढ़ जाता है खतरा - फोटो : Pixabay
क्यों होता है रामसे हंट सिंड्रोम?

विशेषज्ञ बताते हैं, रामसे हंट सिंड्रोम का जोखिम उन लोगों में अधिक होता है जिन्हें चिकनपॉक्स हुआ है। चिकनपॉक्स से ठीक होने के बाद भी कुछ लोगों में वायरस शरीर में रह जाता है। यह कुछ वर्षों में फिर से सक्रिय होकर द्रव से भरे फफोलों के साथ  कुछ प्रकार के लक्षणों को बढ़ा सकता है। हालांकि यह स्थिति 60 साल के ऊपर के लोगों में अधिक देखी जाती रही है। बच्चों में इसके मामले काफी दुर्लभ रहे हैं। जिन लोगों को पहले से ही प्रतिरक्षा प्रणाली में कमजोरी की समस्या है, यह संक्रमण उन लोगों के लिए और भी गंभीर हो सकता है।

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चेहरे की तंत्रिकाओं से संबंधित समस्याएं - फोटो : Pixabay
गंभीर स्थितियों में किस तरह की हो सकती हैं दिक्कतें?

रामसे हंट सिंड्रोम का समय पर इलाज न हो पाने या फिर आपमें पहले से ही इम्युनिटी की समस्या स्थिति को गंभीर भी बना सकती है। वैसे तो ज्यादातर लोगों में रामसे हंट सिंड्रोम के कारण होने वाली सुनने या चेहरे पर लकवा की समस्या कुछ दिनों में इलाज के बाद ठीक हो जाती है, हालांकि गंभीर स्थितियों में यह दिक्कत स्थाई रूप से बनी भी रह सकती है। इस संक्रमण की स्थिति में चेहरे की कमजोरी के कारण पलकें बंद करना भी मुश्किल हो जाता है। इस तरह की दिक्कत वाले लोगों में कॉर्निया के क्षतिग्रस्त होने का जोखिम भी बढ़ जाता है। 
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रामसे हंट सिंड्रोम का इलाज - फोटो : istock
रामसे हंट सिंड्रोम का इलाज और बचाव

रामसे हंट सिंड्रोम का शीघ्र उपचार और निदान आवश्यक हो जाता है। इलाज के रूप में स्थति के आधार पर डॉक्टर्स एंटीवायरल दवाएं, कॉर्टिकोस्टेरॉइड्स और एंटी-एंग्जाइटी दवाइयों को प्रयोग में ला सकते हैं। डॉक्टर्स बताते हैं कि लक्षण शुरू होने के 3 दिनों के भीतर उपचार शुरू कर दिया जाए है, तो ठीक होने की संभावना अधिक होती है।

इस संक्रमण से बचाव के लिए चिकनपॉक्स के लिए वैक्सीनेशन कराने को कारगर माना जाता है। एक अनुमान के अनुसार, संयुक्त राज्य अमेरिका में प्रत्येक एक लाख लोगों में से हर साल करीब पांच लोगों में रामसे हंट सिंड्रोम का निदान किया जाता है।


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स्रोत और संदर्भ: 
Ramsay Hunt syndrome (herpes zoster oticus)

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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