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सेहत की बात: लिवर में फैट तो नहीं जमा हो रहा? कैसे लगाएं इसका पता

Fri, 09 Oct 2026 10:16 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Fatty Liver Disease: फैटी लिवर ऐसी समस्या है, जिसमें लिवर की कोशिकाओं में जरूरत से ज्यादा चर्बी जमा होने लगती है। शुरुआती दौर में इसके स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते। मोटापा, डायबिटीज और हाई कोलेस्ट्रॉल इसका खतरा बढ़ाते हैं। सही खानपान, नियमित व्यायाम से लिवर को स्वस्थ रखने में मदद मिल सकती है।
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लिवर की जांच - फोटो : Amarujala.com/AI
लिवर हमारे शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंगों में से एक है। यह भोजन को पचाने, पोषक तत्वों को प्रोसेस करने, ऊर्जा जमा करने के साथ शरीर से हानिकारक पदार्थों को बाहर निकालने के लिए दिन-रात काम करता रहता है। हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, जिस तरह से लोगों के खान-पान और लाइफस्टाइल में गड़बड़ी बढ़ती जा रहा है, इसने लिवर की सेहत को गंभीर रूप से नुकसान पहुंचाया है। यही कारण है कि भारत में बड़ी संख्या में युवाओं में फैटी लिवर की समस्या का निदान किया जा रहा है।

हाल ही में अमर उजाला में प्रकाशित रिपोर्ट में हमने बताया कि अब बड़ी संख्या में बच्चे भी लिवर में फैट जमा होने की समस्या का शिकार हो रहे हैं।  विश्व गैस्ट्रोएंटरोलॉजी कांग्रेस-2026 में विशेषज्ञों ने बताया कि भारतीय बच्चों में फैटी लिवर की बीमारी का अनुमान 35.4% तक है।

जब लिवर की कोशिकाओं में जरूरत से ज्यादा फैट जमा होने लगता है, तो इसकी कार्यक्षमता प्रभावित हो सकती है। चिंता की बात यह है कि शुरुआती दौर में इसके लक्षण अक्सर दिखाई नहीं देते। 

ऐसे में सवाल ये है कि आप कैसे जान सकते हैं कि कहीं आप भी तो इसका शिकार नहीं हो गए हैं?
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लिवर की बढ़ती समस्याएं - फोटो : Adobe Stock
स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, चूंकि फैटी लिवर की समस्या में शुरुआत में स्पष्ट लक्षण नहीं दिखते हैं, इसलिए ज्यादातर लोगों को इस बीमारी का पता तब चल पाता है, जब वे किसी दूसरी परेशानी के लिए खून की जांच या अल्ट्रासाउंड करवाते हैं।  अध्ययनों में पाया गया है कि मोटापा, डायबिटीज, हाई कोलेस्ट्रॉल और शारीरिक गतिविधियों की कमी जैसी स्थितियां इस बीमारी का खतरा बढ़ाती जा रही हैं।

क्या कोई संकेत ऐसे हैं, जिनसे फैटी लिवर की समस्या का पता लगाया जा सके?


फैटी लिवर के क्या लक्षण हो सकते हैं?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, आमतौर पर शुरुआती अवस्था में फैटी लिवर के कोई स्पष्ट लक्षण नहीं नजर आते। हालांकि, कुछ लोगों को लिवर की समस्याओं के कारण लगातार थकान, कमजोरी या पेट के दाहिने ऊपरी हिस्से में दर्द या असहजता महसूस हो सकती है।
 
  • वैसे तो ये लक्षण पेट की दूसरी समस्याओं में भी देखे जाते हैं इसलिए अकेले इन लक्षणों से फैटी लिवर की पुष्टि नहीं होती। 
  • फैटी लिवर की बीमारी या लिवर में दिक्कतें बढ़ने पर पीलिया, पेट या पैरों में सूजन या पाचन की दिक्कतें बढ़ जाती हैं।
  • अगर आपको कुछ समय से इस तरह की दिक्कतें हो रही हैं तो समय रहते जांच जरूर करा लें।
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खून की जांच से लगता है लिवर का पता - फोटो : Freepik.com
लिवर में फैट की समस्या का पता कैसे लगाएं?

फैटी लिवर का पता लगाने के लिए डॉक्टर आपकी मेडिकल हिस्ट्री, वजन, डायबिटीज और दूसरी जोखिमों का आकलन करते हैं। 
  • लिवर फंक्शन टेस्ट की मदद से खून में एएलटी और एएसटी जैसे एंजाइम की जांच की जाती है। इनका बढ़ा होना लिवर में परेशानी का संकेत हो सकता है।
  • लिवर में फैट जमा होने का पता लगाने के लिए डॉक्टर अल्ट्रासाउंड कराने की भी सलाह दे सकते हैं, जिससे स्थिति का सही तरीके से आकलन हो सके।
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आहार में करें सुधार - फोटो : Freepik.com
अब जानिए फैटी लिवर से बचने के लिए क्या करें?

फैटी लिवर के खतरे को कम करने के लिए खानपान और लाइफस्टाइल में सुधार को डॉक्टर सबसे जरूरी मानते हैं।
 
  • अगर आपका वजन अधिक है, तो इसे कम करने से फायदा हो सकता है। 
  • मीठी और,तली हुई चीजों के अलावा प्रोसेस्ड फूड्स कम से कम खाएं, ये लिवर के लिए मुश्किलें बढ़ा सकती हैं।
  • भोजन में हरी सब्जियां-फल, साबुत अनाज और उचित मात्रा में प्रोटीन वाली चीजों को शामिल करें।
  • नियमित शारीरिक गतिविधि आपके वजन, डायबिटीज और कोलेस्ट्रॉल को कंट्रोल करने में मदद करती है। जिससे लिवर में फैट जमा होने का खतरा कम हो सकता है।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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