कोरोना महामारी ने दुनियाभर में ऐसी प्रतिकूल परिस्थितियों को जन्म दे दिया है, जिसमें लोगों के लिए फिलहाल सामान्य जीवनयापन करना कठिन हो गया है। कोरोना महामारी के ऐसे अंधाकर में आयुर्वेद एक उजाले की तरह दिखाई दे रहा है। आयुर्वेद ने हजारों वर्षों तक एक सुनहरा अतीत देखा है। बहुत सारे अनुसंधानों के साथ इस परंपरा को तैयार किया गया है। कोरोना की दूसरी लहर के दौरान मची हाहाकार में इस प्राचीन चिकित्सा पद्धति ने लोगों को एक नई उम्मीद दी है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक आयुर्वेदिक चिकित्सा पद्धति में कई सारी ऐसी दिव्य औषधियां हैं जिनके उपयोग से कोरोना जैसी गंभीर महामारी से निजात पाया जा सकता है।
कोरोना की दूसरी महामारी के दौरान वैकल्पिक चिकित्सा के रूप में सामने आए आयुर्वेद को लेकर लोगों के मन में तमाम तरह के सवाल हैं। कई आयुर्वेद विशेषज्ञ यह दावा कर रहे हैं कि इस चिकित्सा पद्धति से कोरोना के रोगियों का सफल इलाज किया गया है, तमाम ऐसे अध्ययन हुए हैं जो कोरोना में आयुर्वेद को काफी प्रभावी साबित करते हैं। ऐसे में क्या यह माना जा सकता है कि आयुर्वेदिक चिकित्सा, ऐलोपैथ से बेहतर साबित हो सकती है? आइए इस विषय पर विशेषज्ञों की राय जानते हैं।