फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

कोरोना संक्रमण के बीच बढ़ती गर्मी से बचने को क्या एसी चलाना नुकसानदेह है? 

Sat, 18 Apr 2020 06:16 PM IST
निलेश कुमार बीबीसी हिंदी
विज्ञापन
1 of 6
एसी यानी एयर कंडीशनर
गर्मी में एसी यानी एयर कंडीशनर की जरूरत महसूस होना लाजमी है। लेकिन सोशल मीडिया और व्हाट्सएप पर कई मैसेज ऐसे दावे के साथ शेयर किए जा रहे हैं कि एसी से कोरोना वायरस के संक्रमण फैलने का खतरा बढ़ जाता है। इन मैसेज से लोगों के मन में एसी को लेकर आशंका है। लेकिन क्या सच में ऐसा है? इस मामले में एम्स के निदेशक रणदीप गुलेरिया ने एक टीवी चैनल से बात करते हुए कहा कि एसी चलाने से इतना मसला नहीं है, जितना क्रॉस वेंटिलेशन से है।

घर और कार का एसी
डॉ गुलेरिया के मुताबिक, अगर आपके घर में विंडो एसी लगा है, तो आपके कमरे की हवा आपके ही कमरे में रहेगी, बाहर या दूसरे कमरों में नहीं जाएगी। इसलिए घर में विंडो एसी या गाड़ी में लगा एसी चलाने में कोई दिक्कत नहीं है। लेकिन ध्यान रखने की जरूरत है कि कमरे में लगे विंडो एसी का एग्जॉस्ट अच्छी तरह से बाहर हो, जिससे वो किसी ऐसे एरिया में ना जा रहा हो जहां लोग इकट्ठे हों।
विज्ञापन

2 of 6
दफ्तर या सार्वजनिक जगहों पर लगा एसी
डॉ गुलेरिया के मुताबिक, दफ्तर या सार्वजनिक जगहों अगर सेंट्रल एसी है, तो इसका मतलब है - सारे कमरों में हवा सर्कुलेट हो रही है, तब ये डर रहता है कि अगर दूसरे कमरे में या फिर ऑफिस के किसी दूसरे हिस्से में कोई खांस रहा है या उसे इंफेक्शन है तो एसी के डक्ट से एक कमरे से दूसरे कमरे तक उसके फैलने का खतरा है।

अस्पतालों में बंद किए गए सेंट्रल एसी
जिन अस्पतालों में कोरोना मरीजों को भर्ती किया जा रहा है, उनमें सेंट्रल एसी बंद किए जा रहे हैं और उनकी जगह विंडो एसी लगाए जा रहे हैं। डॉ गुलेरिया के मुताबिक, अस्पतालों में एसी जरूरी भी है क्योंकि जैसे-जैसे गर्मी बढ़ेगी, डॉक्टर्स या हेल्थकेयर वर्कर्स की परेशानी भी बढ़ेगी, क्योंकि वो सब पीपीई पहनकर मरीजों को देखते हैं। जिससे वो गर्मी में पसीना-पसीना हो जाते हैं। अगर इतनी गर्मी में बिना एसी के मरीज देखना पड़ेगा, तो एक और समस्या खड़ी हो जाएगी।
विज्ञापन

3 of 6
Research
क्या कहती है रिसर्च
अमरीका के सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन ने भी एक रिसर्च की थी, जिसमें ये देखने की कोशिश की गई कि क्या चीन के एक रेस्टोरेंट में कोविड-19 का प्रसार एयर-कंडीशनिंग से जुड़ा था? इस अध्ययन को गुआंगझू सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन की एथिक्स कमिटी ने भी अप्रूव किया है। रिसर्च के मुताबिक 26 जनवरी से 10 फरवरी 2020 तक नोवल कोरोना वायरस ने तीन परिवारों के 10 लोगों को प्रभावित किया, जिन सभी ने चीन के ग्वांगझू शहर में स्थिति एक ही एयर कंडीशन्ड रेस्टोरेंट में खाना खाया था। सभी के टेबलों की दूरी करीब एक मीटर थी।

इनमें से एक परिवार वुहान से ट्रेवल करके लौटा था। 24 जनवरी को परिवार A ने उस रेस्टोरेंट में खाना खाया। परिवार B और C उसके नजदीक वाले टेबल पर बैठे थे। परिवार A के एक सदस्य में अगले दिन लक्षण दिखने लगे और पांच फरवरी को उस परिवार के चार अन्य सदस्य और परिवार B के तीन और परिवार सी के दो सदस्य बीमार पड़ गए। उस रेस्टोरेंट में सेंट्रल एयर कंडीशनर था, इस पांच मंजीला इमारत में कोई खिड़की भी नहीं थी।

इस स्टडी का ये निष्कर्ष निकला कि एयर-कंडीशन्ड वेंटिलेशन की वजह से ड्रॉपलेट ट्रांसमिशन हुआ। इंफेक्शन की मुख्य वजह हवा का बहाव था। रिसर्च में सलाह दी गई कि कोविड-19 के प्रसार को रोकने के लिए वेंटीलेशन को बेहतर किए जाने की जरूरत है।

4 of 6
Research Study - फोटो : पेक्सेल्स
अध्ययन की सीमाएं
अमरीका के सेंटर फॉर डिजीज कंट्रोल एंड प्रिवेंशन ने भी माना कि उनके अध्ययन की अपनी सीमाएं थीं, क्योंकि उन्होंने एयरबोर्न ट्रांसमिशन रूट पर स्टडी नहीं की थी और वो वहां खाना खाने वाले दूसरे लोगों के सैंपल को भी स्टडी नहीं कर पाए थे। रिसर्च के मुताबिक, रेस्टोरेंट का कोई भी कर्मचारी या वहां खाना खाने वाले दूसरे लोग इंफेक्ट नहीं हुए थे। साथ ही एयर कंडीशनर के सभी स्मीयर सैंपल भी नकारात्मक थे।

ट्रांसमिशन के संभावित रूट का अध्ययन करने से ये पता चला था कि आउटब्रेक का कारण ड्रोपलेट ट्रांसमिशन हो सकता है। हालांकि रिसर्च कहती है कि सिर्फ यही इसका कारण नहीं रहा होगा, बड़े रेस्पिरेटरी ड्रॉपलेट कुछ ही वक्त के लिए हवा में रहते हैं और बहुत कम दूरी तक जा सकते हैं। इसलिए रिसर्च में ये कहा गया कि एयर कंडीशनर के स्ट्रांग एयरफ्लो की वजह से ड्रॉपलेट एक टेबल से दूरे और फिर तीसरे टेबल तक पहुंचे हो सकते हैं।

इस बारे में दिल्ली के साकेत स्थित मैक्स अस्पताल में इंटरनल मेडिसिन के एसोसिएट डायरेक्टर, डॉ रोमेल टिकू कहते हैं , "आम तौर पर ऐसा नहीं होता कि कोई खांसेगा और वायरस हवा से एयर कंडीशनर के जरिए सर्कुलेट हो जाएगा और सब लोग इंफेक्ट हो जाएंगे। इसका अभी तक कोई सबूत नहीं मिला है। हां, ये जरूर हो सकता है कि इससे सरफेस कंटामिनेशन हो जाए। अगर किसी मरीज ने खांसा, तो एयर कंडीशनिंग के कारण आस-पास की ग्राउंडिंग कंटामिनेट हो सकती है। लेकिन इस बात का कोई सबूत नहीं है कि एयर कंडिशनर वायरस कैरी कर रहा है।"
विज्ञापन

5 of 6
उद्धव ठाकरे, सीएम, महाराष्ट्र(File Photo) - फोटो : एएनआई
महाराष्ट्र सरकार की सलाह
कुछ दिनों पहले महाराष्ट्र के मुख्यमंत्री ने लोगों को सलाह दी थी कि वो एयर कंडिशनर का इस्तेमाल ना करें। उन्होंने कहा था कि केंद्र की एडवाइजरी है कि गैर जरूरी कूलिंग, नमी से बचना चाहिए। 21 मार्च को महाराष्ट्र सरकार ने एयर कंडिशनर के इस्तेमाल को सीमित करने के लिए सर्कुलर भी जारी किया। सर्कुलर में लिखा था, "सूरज की रोशनी अंदर आने देने के लिए खिड़कियां खुली रखनी चाहिए और बहुत जरूरी हो तभी एसी चलाए जाने चाहिए।"

महाराष्ट्र के स्वास्थ्य मंत्री राजेश टोपे ने कहा था कि कोविड-19 वायरस, एसी डक्ट और वेंट के जरिए जा सकता है। वहीं मार्च में ही कर्नाटक सरकार ने भी रेस्टोरेंट्स से एयर कंडीशनर बंद करने के लिए कहा था। फिलहाल तो पूरे देश में लॉकडाउन है और रेस्टोरेंट समेत सार्वजनिक जगहें बंद हैं, साथ ही बहुत से लोग दफ्तरों के बजाए घर से काम कर रहे हैं, इसलिए वो सेंट्रल एसी से बचे हुए हैं।

लेकिन सवाल ये भी अहम है कि क्या सेंट्रल एसी सच में वायरस को फैलाने में मदद करते हैं?
विज्ञापन
विज्ञापन

6 of 6
AC
इस बारे में डॉ रोमेल टिकू कहते हैं कि अभी तक इस बात की पुष्टि नहीं हुई है, किसी मामले में अबतक ये पता नहीं चला है कि एयर-कंडीशनर की वजह से संक्रमण हुआ। "कुछ ऐसी बात जरूर हुई है कि वायरस हवा के कारण रिसाइकल हो रहा था, लेकिन अभी तक इसकी भी पुष्टि नहीं हो सकी है।"

उनके मुताबिक, एयर कंडीशनर के फिल्टर वायरस पकड़ते हैं। एसी के डक्ट और वेंट में वायरस मिले भी हैं, लेकिन इस बात के सबूत नहीं मिले हैं कि वायरस एसी के जरिए सर्कुलेट हो सकता है, वो उसमें कितना एक्टिव रह सकता है और वो वहां कितनी देर बना रह सकता है, क्योंकि इसके वातावरण, तापमान और नमी जैसे कई फेक्टर होते हैं।

डॉ रोमेल के मुताबिक, "अस्पतालों में भी सेंट्रल एसी बंद करने के एहतियाती कदम लिए जा रहे हैं, क्योंकि ये एक नया वायरस है। हो सकता है आज जो हमें पता है वो कल को गलत निकले। या कोई नई चीज आ जाए, जिससे पता चले कि हां, एसी से ये हो रहा है। इसलिए एहतियात बरती जा रही है।"

इस बारे में केंद्र सरकार ने अभी तक कोई दिशा-निर्देश जारी नहीं किया है। हालांकि बीबीसी ने पीआईबी यानी प्रेस इंफोर्मेशन ब्यूरो की फैक्ट चेक टीम को मंगलवार रात एक मेल लिखा था। जिसके जवाब का हमें इंतजार है। डब्ल्यूएचओ से भी अभी हमें इसपर कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें