इस बारे में डॉ रोमेल टिकू कहते हैं कि अभी तक इस बात की पुष्टि नहीं हुई है, किसी मामले में अबतक ये पता नहीं चला है कि एयर-कंडीशनर की वजह से संक्रमण हुआ। "कुछ ऐसी बात जरूर हुई है कि वायरस हवा के कारण रिसाइकल हो रहा था, लेकिन अभी तक इसकी भी पुष्टि नहीं हो सकी है।"
उनके मुताबिक, एयर कंडीशनर के फिल्टर वायरस पकड़ते हैं। एसी के डक्ट और वेंट में वायरस मिले भी हैं, लेकिन इस बात के सबूत नहीं मिले हैं कि वायरस एसी के जरिए सर्कुलेट हो सकता है, वो उसमें कितना एक्टिव रह सकता है और वो वहां कितनी देर बना रह सकता है, क्योंकि इसके वातावरण, तापमान और नमी जैसे कई फेक्टर होते हैं।
डॉ रोमेल के मुताबिक, "अस्पतालों में भी सेंट्रल एसी बंद करने के एहतियाती कदम लिए जा रहे हैं, क्योंकि ये एक नया वायरस है। हो सकता है आज जो हमें पता है वो कल को गलत निकले। या कोई नई चीज आ जाए, जिससे पता चले कि हां, एसी से ये हो रहा है। इसलिए एहतियात बरती जा रही है।"
इस बारे में केंद्र सरकार ने अभी तक कोई दिशा-निर्देश जारी नहीं किया है। हालांकि बीबीसी ने पीआईबी यानी प्रेस इंफोर्मेशन ब्यूरो की फैक्ट चेक टीम को मंगलवार रात एक मेल लिखा था। जिसके जवाब का हमें इंतजार है। डब्ल्यूएचओ से भी अभी हमें इसपर कोई प्रतिक्रिया नहीं मिली है।