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Covid-19 In India: डॉ गुलेरिया बोले-देश में प्रतिबंधों की जरूरत नहीं, BHU वैज्ञानिक ने दी राहत भरी जानकारी

Sat, 24 Dec 2022 01:41 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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भारत में कोरोना का खतरा - फोटो : iStock
कुछ देशों में कोरोना के बिगड़ते हालात को देखते हुए भारत में, लोगों में डर साफ देखा जा रहा है। एहतियाती तौर पर सरकार, स्थिति पर गंभीरता से नजर बनाए हुए है, मामलों के जीनोम सीक्वेंसिंग के निर्देश दिए गए हैं। देश में टेस्टिंग भी बढ़ा दी गई है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों से लगातार कोविड एप्रोप्रिएट बिहेवियर का पालन करते रहने की अपील कर रहे हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि फिलहाल भारत में स्थिति काफी नियंत्रित है, लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है।  

एम्स के पूर्व निदेशक डॉ. रणदीप गुलेरिया कहते हैं, भारत में वर्तमान कोविड परिदृश्य को देखते हुए फिलहाल अंतरराष्ट्रीय उड़ानों को प्रतिबंधित करने या लॉकडाउन लगाने जैसी जरूरत नजर नहीं आती है।

न्यूज एजेंसी पीटीआई से बातचीत में डॉ. गुलेरिया ने बताया, भारतीय लोगों में  'हाइब्रिड इम्युनिटी' देखी जा रही है, ऐसे में अगर यहां संक्रमण बढ़ता भी है तो भी गंभीर मामले या रोगियों के अस्पालों में भर्ती होने की जरूरत नहीं होनी चाहिए। हालांकि सभी लोगों को बचाव के उपायों का लगातार पालन करते रहने की जरूरत है। थोड़ी सी सावधानी बरतकर हम संक्रमण की एक और लहर के जोखिम को कम कर सकते हैं। अच्छे टीकाकरण कवरेज और प्राकृतिक संक्रमण के कारण भारतीय आबादी में पहले से ही हाइब्रिड प्रतिरक्षा है, इसलिए लोगों को पैनिक नहीं होना चाहिए।
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संक्रमण से बचाव के करें उपाय - फोटो : Pixabay
बचाव  के उपायों में न बरतें लापरवाही

सफदरजंग अस्पताल में पल्मोनरी, क्रिटिकल केयर विभाग के डॉ नीरज गुप्ता  कहते हैं, चीन और कुछ अन्य देशों में कोविड-19 के बढ़ते मामलों को देखते हुए हमें पहले से अलर्ट रहने की आवश्यकता है। कोविड एप्रोप्रिएट बिहवियर जैसे मास्क लगाना, हाथों की स्वच्छता और सोशल डिस्टेंसिंग जैसे उपाय भारत में संक्रमण के प्रसार को रोकने में मददगार हो सकते हैं।

पिछले वर्षों में जिस तरह से हमने कोविड को नियंत्रित किया है, टीकाकरण और संक्रमण के चलते लोगों में बेहतर प्रतिरक्षा देखी जा रही है, ऐसे में चिंता करने की जरूरत नहीं है।
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कोरोना का खतरा कम - फोटो : iStock

भारत में नहीं होंगे चीन जैसे हालात

अमर उजाला से बातचीत में बनारस हिंदू विश्वविद्यालय के शोधकर्ता प्रोफेसर ज्ञानेश्वर चौबे (साइटोजेनेटिक्स लैब, जूलॉजी विभाग) कहते हैं, अध्ययनों में ओमिक्रॉन BF.7 की प्रकृति जिस प्रकार की देखी जा रही है, उससे भारतीय लोगों में गंभीर रोग या अस्पतालों में भर्ती होने की आशंका काफी कम है। कोरोना के पिछले तीन लहरों में देश की बड़ी आबादी संक्रमित होकर ठीक हो चुकी है, इसके अलावा सुरक्षात्मक रूप से देश में वैक्सीनेशन और बूस्टर डोज भी ज्यादातर लोगों को मिल चुका है, जो इन वैरिएंट्स के कारण होने वाली जटिलताओं से बचाने में मददगार है। ऐसे में भारत में चीन जैसे हालात होंगे, इसकी आशंका नहीं है। 

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भारतीय लोगों में मेमेरी टे सेल्स प्रभावी - फोटो : iStock
भारतीयों में मेमेरी सेल्स काफी प्रभावी

प्रोफेसर चौबे बताते हैं, प्राकृतिक संक्रमण और वैक्सीनेशन के चलते भारतीय लोगों में मेमेरी (टी सेल्स) काफी प्रभावी देखी जा रही हैं, जो म्यूटेटेड वैरिटएंट्स से संक्रमण की स्थिति में प्रतिरक्षा प्रतिक्रिया के माध्यम से शरीर में संक्रमण को बढ़ने और गंभीर रोग के खतरे को कम करने में मददगार होगी।

चूंकि BF.7 ओमिक्रॉन का ही म्यूटेटेड वर्जन है ऐसे में ये मेमोरी सेल्स इस वैरिट्स को आसानी से पहचान कर शरीर को इससे होने वाले खतरे से बचाने में मददगार हैं। ये भी एक स्थिति है जो भारतीय लोगों को अधिक सुरक्षित करती है।
 
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बूस्टर डोज से मिलेगी अतिरिक्त सुरक्षा - फोटो : PTI
योग्य लोग ले लें बूस्टर डोज

टीकाकरण पर राष्ट्रीय तकनीकी सलाहकार समूह (एनटीएजीआई) के अध्यक्ष डॉ. एन के अरोड़ा ने अतिरिक्त सुरक्षा के लिए लोगों से वैक्सीन की बूस्टर डोज लेने की अपील की है। उन्होंने कहा कि कोरोना से बचाव करते रहना सभी लोगों के लिए बेहद जरूरी है, पात्र लोगों को वैक्सीन की बूस्टर खुराक लेनी चाहिए। तीसरी डोज प्रतिरक्षा प्रणाली को और मजबूत करने के साथ संक्रमण की स्थिति में गंभीर रोग के जोखिम को कम करने में विशेष लाभकारी हो सकती है। 

फिलहाल भारत में स्थिति काफी कंट्रोल में है, लोगों को घबराने की जरूरत नहीं है। बचाव के उपाय और टीकाकरण को बढ़ावा देकर हम संक्रमण के जोखिम से बचाव कर सकते हैं।


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्ट्स और स्वास्थ्य विशेषज्ञों की सुझाव के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
 
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