महिला-पुरुष दोनों में इनफर्टिलिटी के कारण को समझिए
इनफर्टिलिटी पर बात करते समय महिला और पुरुष दोनों को शामिल किया जाना आवश्यक है। दोनों में कुछ कारक कॉमन हैं- जैसे तनाव, मोटापा और लाइफस्टाइल की गड़बड़ी। इसके अलावा धूम्रपान-शराब के सेवन की आदत भी इसके लिए काफी जिम्मेदार मानी जाती है। धूम्रपान और अल्कोहल को फैशन ट्रेंड की तरह से लोग प्रयोग कर रहे हैं, पर शोध बताते हैं कि इसका हमारी प्रजनन क्षमता पर बहुत नकारात्मक असर होता है।
धूम्रपान के नुकसान
अध्ययन बताते हैं कि धूम्रपान करने वाले पुरुषों को सीमेन इंफ्लामेशन की दिक्कत हो सकती है जिससे शुक्राणु कमजोर हो जाते हैं और प्रजनन की दिक्कतें बढ़ सकती हैं। साल 2015 के
एक शोध में वैज्ञानिकों ने पाया कि सिगरेट में कार्सिनोजेन्स (कैंसर पैदा करने वाले पदार्थ) के साथ इसके टार में कैडमियम और लेड जैसे विषाक्त पदार्थ हो सकते हैं। इसके अलावा अधिक धूम्रपान करने से शुक्राणु के डीएनए में क्षति हो सकती है।
साल 2014 के एक अन्य
अध्ययन में पाया गया कि धूम्रपान करने वाली महिलाओं में गर्भपात का जोखिम अधिक होता है। इसके अलावा धूम्रपान के कारण 'गर्भावस्था उच्च रक्तचाप' की समस्या के साथ शिशु में जन्मजात दोष, विकास संबंधी जटिलताओं का जोखिम भी बढ़ जाता है।
अल्कोहल का दुष्प्रभाव
धूम्रपान की ही तरह अल्कोहल का सेवन भी महिला-पुरुष दोनों की प्रजनन क्षमता को प्रभावित करता है।
अध्ययन में वैज्ञानिकों ने पाया कि अल्कोहल का सेवन करने वाले पुरुषों में टेस्टोस्टेरोन के स्तर और शुक्राणु उत्पादन में कमी देखी जा रही है। शोध यह भी बताते हैं कि शराब का नियमित सेवन आगे चलकर डीएनए में परिवर्तन का कारण भी बन सकता है।
इसी तरह महिलाओं पर किए गए
शोध से पता चलता है कि शराब का सेवन करना आपमें मां बनने की संभावना को कम कर सकता है। अल्कोहल के सेवन के कारण मासिक धर्म चक्र और ओव्यूलेशन से संबंधित समस्याएं भी बढ़ सकती है, जिसे एमेनोरिया के रूप में जाना जाता है।
इतना ही नहीं एक
अन्य शोध से पता चलता है कि जो महिलाएं गर्भावस्था के दौरान शराब का सेवन करती हैं, उनमें 'फेटल अल्कोहल स्पेक्ट्रम डिसऑर्डर' की समस्या हो सकती है। इसमें भ्रूण के विकास में बाधा आ जाती है।
विशेषज्ञ कहते हैं, धूम्रपान या अल्कोहल के सेवन की कोई सेफ लिमिट नहीं होती है। थोड़ी भी मात्रा में शराब या कम मात्रा में अल्कोहल युक्त पेय भी आपके लिए नुकसानदायक हो सकते हैं।
मोटापा भी एक कारण
शरीर का वजन अधिक होना, विशेषकर महिलाओं में इनफर्टिलिटी का खतरा बढ़ा देता है। पीएमसी जर्नल में साल 2015 में प्रकाशित अध्ययन से पता चलता है कि अधिक वजन या मोटापे से ग्रस्त महिलाओं में प्रजनन संबंधी जटिलताओं का खतरा अधिक होता है। मोटापा के कारण गर्भधारण करना कठिन हो जाता है, साथ ही यह गर्भपात का जोखिम भी बढ़ा देती है। महिलाओं को वजन नियंत्रित रखने पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता है।
मोबाइल बनता जा रहा है गर्भनिरोधक
सोशल मीडिया पर आपने भी ऐसे कई मीम्स देखे होंगे जिसमें पति-पत्नी बेड पर एक दूसरे से विपरीत मुंह किए मोबाइल पर चैटिंग या सर्फिंग करते दिख रहे होंगे। विशेषज्ञ, मोबाइल फोन्स को आज के समय का 'कॉन्ट्रासेप्टिव' बताते हैं। मनोरोग विशेषज्ञ डॉ विधि पिलानिया कहती हैं, मोबाइल फोन्स के बढ़ते इस्तेमाल ने पति-पत्नी के बीच के 'क्वालिटी टाइम' को कम कर दिया है। इसके अलावा शोध बताते हैं कि मोबाइल फोन से निकलने वाले रेडिएशन के कारण प्रजनन क्षमता पर भी असर होता है। ऐसे में मोबाइल, आज के समय में गर्भनिरोधक बनता जा रहा है। इसके इस्तेमाल के समय को लेकर लोगों को ध्यान देने की आश्यकता है।
इन बातों का रखें ध्यान
पुरुषों में बढ़ती प्रजनन अक्षमताओं का एक कारण जिम में स्टेरॉयड युक्त मांसपेशियों को बढ़ाने वाले पाउडर या इंजेक्शन लेना भी माना जा रहा है। इसके कारण भी कुछ पुरुषों में वीर्य संबंधी दोष का पता चलता है। इसके अलावा समाज में एक गलत अवधारणा यह रही है कि हस्तमैथुन करने से प्रजनन क्षमता पर असर होता है, जबकि अध्ययन इस बात को प्रमाणित करते हैं कि हस्तमैथुन स्वस्थ क्रिया है, अगर इसे नियंत्रण में रखकर किया जाए तो इसे कोई नुकसान नहीं होता है।
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