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Covid-19: संक्रमण के दौरान विटामिन सप्लीमेंट्स का सेवन कितना प्रभावी, अध्ययन में हैरान करने वाली बात सामने आई

Mon, 21 Feb 2022 02:09 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोरोना में विटामिन सप्लीमेंट्स के क्या लाभ हैं? - फोटो : iStock
कोरोना महामारी की शुरुआत से ही संक्रमण से बचाव के लिए लोगों को इम्युनिटी बढ़ाने पर जोर दिया जा रहा है। इसके लिए पौष्टिक आहार का सेवन सबसे महत्वपूर्ण माना जाता है। इसके अलावा विटामिन-सी और डी जैसे पोषक तत्वों के सेवन की मांग भी कोरोना के दौर में तेजी से बढ़ी। संक्रमण का शिकार रह चुके लोगों को उपचार के अंतर्गत विटामिन सी-डी की खुराक भी दी जाती रही है। कुछ अध्ययनों में दावा किया जा रहा था कि इन विटामिन्स की पूर्ति करके रोग की गंभीरता और मृत्यु के जोखिम को कम किया जा  सकता है। हालांकि इस संबंध में हाल ही में हुए एक अन्य अध्ययन में वैज्ञानिकों ने चौंकाने वाला खुलासा किया है।

अमेरिका स्थित टोलेडो विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं ने अध्ययन में दावा किया है कि विटामिन सी, डी और जिंक जैसे प्रतिरक्षा बढ़ाने वाले पूरक लेने से संक्रमण से मृत्यु का खतरा कम नहीं होता है। शोधकर्ताओं का कहना है कि महामारी की शुरुआत से ही यह धारणा चली आ रही है कि रोगियों को इम्युनिटी बढ़ाने वाले विटामिन्स का सप्लीमेंट देकर उनकी जान बचाई जा सकती है, हालांकि अध्ययन के दौरान इस तरह के कोई सबूत नहीं मिले हैं। आइए आगे की स्लाइ़डों में इस अध्ययन के बारे में विस्तार से जानते हैं।
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सप्लीमेंट्स से नहीं कम होती है मृत्युदर - फोटो : getty images
विटामिन सप्लीमेंट्स कोविड-19 से जान बचाने में असरदार नहीं
यूनिवर्सिटी कॉलेज ऑफ मेडिसिन में इंटरनल मेडिसिन के प्रोफेसर डॉ अज़ीज़ुल्लाह बेरन कहते हैं, बहुत से लोगों में यह गलत धारणा है कि यदि आप जिंक, विटामिन-डी या सी की खुराक ले रहे हैं, तो यह कोविड-19 के गंभीर मामलों से आपको सुरक्षित रखने के साथ मृत्यु के जोखिम को कम कर सकता है। इसी बात को ध्यान में रखते हुए संक्रमितों को भी उपचार के रूप में इन विटामिन्स के सप्लीमेंट दिए जा रहे हैं,  हालांकि अध्ययन में इस तरह के परिणाम देखने को नहीं मिले हैं। इन विटामिन्स का सेवन प्रतिरक्षा को बढ़ावा तो देता है पर कोरोना संक्रमण की गंभीरता को कम करने में इसके प्रभाव फिलहाल नहीं देखे गए हैं। अध्ययन के परिणाम क्लिनिकल न्यूट्रिशन ईएसपीईएन जर्नल में प्रकाशित किए गए हैं।
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विटामिन सी और डी सप्लीमेंट्स का कोविड-19 पर असर - फोटो : पिक्साबे
अध्ययन में क्या पता चला?
कोरोना में विटामिन सप्लीमेंट के सेवन की उपयोगिता के बारे में जानने के लिए शोधकर्ताओं ने अस्पताल में भर्ती 5,600 से अधिक कोविड रोगियों पर किए गए करीब 26 पीर-रिव्यु अध्ययनों की समीक्षा की। विश्लेषण ने विटामिन डी, सी या जिंक की खुराक ले रहे रोगियों की, यह खुराक न लेने वाले समूह से तुलना की। इसमें सप्लीमेंट्स ले रहे रोगियों की मृत्यु दर में कोई कमी नहीं पाई गई। शोधकर्ताओं ने पाया कि ऐसा भी नहीं है कि विटामिन-सी और जिंक का सेवन कर रहे रोगियों की अस्पताल में भर्ती होने या वेंटिलेटर पर जाने की संभावना कम हो जाती है। 

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आहार से प्राप्त करें विटामिन्स - फोटो : Pixabay
क्या कहते हैं विशेषज्ञ?
डॉ अज़ीज़ुल्लाह बेरन कहते हैं, इस अध्ययन से प्राप्त रिपोर्ट्स यह साबित करते हैं कि आपको चिकित्सकीय रूप से इन सप्लीमेंट्स की आवश्यकता नहीं है। दैनिक जीवन में भोजन के माध्मय से इनका सेवन जरूर किया जाना चाहिए। यह संभव है कि कुछ कोविड रोगी जो कुपोषित हैं या फिर जिनमें  सूक्ष्म पोषक तत्वों की कमी है, उनको इन सप्लीमेंट्स को देने से लाभ मिल सकता है। कोरोना संक्रमितों के इलाज के दौरान विटामिन सप्लीमेंट्स उनकी शारीरिक क्षमता तो बढ़ा सकते हैं, पर रोग को कम करने या मृत्यु से बचाने में इसके लाभ नहीं देखे गए हैं। 
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विटामिन सप्लीमेंट्स का सेवन - फोटो : Pixabay
क्या है अध्ययन का निष्कर्ष?
अध्ययनकर्ताओं का कहना है कि इस शोध से यह साबित नहीं किया जा रहा है कि विटामिन और खनिजों के सप्लीमेंट्स का सेवन बेकार है या इसे प्रयोग में नहीं लाना चाहिए। निश्चित ही शरीर की इम्युनिटी को बढ़ाने में इनकी बहुत महत्वपूर्ण भूमिका होती है, पर इस अध्ययन से यह साबित जरूर होता है कि यह सप्लीमेंट्स कोविड के कारण होने वाली मौतों को रोकने में प्रभावी नहीं हैं। इस उद्देश्य के साथ इन सप्लीमेंट्स के सेवन के लाभ फिलहाल नहीं देखे गए हैं। 


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स्रोत और संदर्भ
Nutritional risk of vitamin D, vitamin C, zinc, and selenium deficiency on risk and clinical outcomes of COVID-19: A narrative review

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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