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सलाह: इन बातों को गांठ बांध लें, जीवनभर रहेंगे डायबिटीज से सुरक्षित

Mon, 28 Jun 2021 01:42 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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डायबिटीज से कैसे रहें सुरक्षित? - फोटो : Social media
Medically Reviewed by-
डा. अल्तमश शेख
(एंडोक्रिनोलॉजिस्ट, डायबेटोलॉजिस्ट)
मुंबई
अनुभव: 11 वर्ष


मौजूदा समय में खराब जीवनशैली के कारण कम उम्र में ही लोगों को तमाम तरह की बीमारियां घेर लेती हैं। डायबिटीज यानी मधुमेह ऐसी ही एक बीमारी है। आंकड़ों पर नजर डालें तो देश की बड़ी आबादी इस गंभीर रोग की चपेट में है। डायबिटीज को नियंत्रित करने के लिए लोग तमाम तरह के उपायों को प्रयोग में लाते हैं। वहीं जिन लोगों में डायबिटीज का स्तर बहुत ज्यादा हो जाता है उन्हें इंसुलिन लेने की सलाह दी जाती है।
भारत को दुनियाभर में 'डायबिटीज कैपिटल' के रूप में जाना जाता है। आंकड़ों के मुताबिक यहां 50 मिलियन (5 करोड़) से ज्यादा लोग मधुमेह से ग्रसित हैं। यह वास्तव में देश के लिए एक बड़ी चुनौती है। मधुमेह को उस गंभीर बीमारी के रूप में जाना जाता है, जो शरीर को अंदर ही अंदर खोखला बनाती जाती है। तमाम चिकित्सा पद्धतियों में मधुमेह के इलाज की विधि और दवाइयां उपलब्ध हैं, पर आज हम जीवनशैली में सुधार पर आधारित ऐसे कुछ नियमों के बारे में बताने जा रहे हैं, जिनका ध्यान रखकर न सिर्फ डायबिटीज को कम किया जा सकता है, साथ ही जिन लोगों को मधुमेह की समस्या नहीं है, वह ता-उम्र इससे सुरक्षित भी रह सकते हैं।
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डायबिटीज से बचे रहने के लिए संतुलित आहार लें - फोटो : Social media
संतुलित आहार और नियमित व्यायाम
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक डायबिटीज से बचने या शुगर लेवल को कम करने के लिए सभी लोगों को पौष्टिक आहार का सेवन करने के साथ नियमित रूप से व्यायाम करने पर जोर देना चाहिए। विशेषकर जिन लोगों को डायबिटीज है उन्हें भोजन का अंतराल बहुत ज्यादा नहीं बढ़ाना चाहिए, हर ढाई से तीन घंटे में कुछ न कुछ जरूर खाएं। ऐसा करके आप रक्त शर्करा के स्तर को नियंत्रित कर सकते हैं। लो ग्लाइसेमिक इंडेक्स (जीआई) वाले खाद्य पदार्थ जैसे साबुत गेहूं, ब्राउन राइस, ओट्स आदि का सेवन करें। रोजाना कम से कम 20-30 मिनट कर व्यायाम जरूर करें। संतुलित आहार और नियमित व्यायाम को जीवनशैली का हिस्सा बनाकर जीवनभर डायबिटीज से मुक्त रहा जा सकता है।
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शुगर लेवल की करते रहें जांच - फोटो : iStock
नियमित रूप से ब्ल़ड शुगर की जांच करें
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक डायबिटीज के सभी रोगियों को नियमित रूप से शुगर लेवल की जांच करते रहना चाहिए, इससे यह पता करने में आसानी होती है कि कहीं शुगर का स्तर बढ़ तो नहीं रहा है। इसके अलावा साल में एक से दो बार एचबीए1सी की जांच भी जरूर कराएं। डॉ अल्तमश बताते हैं कि एचबीए1सी टेस्ट के माध्यम से दो से तीन माह के ग्लूकोज का औसत पैमाना प्राप्त किया जा सकता है। इस टेस्ट के माध्यम से यह जाना जा सकता है कि मधुमेह का स्तर कितना प्रबंधित है?

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वजन को नियंत्रित करें (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : iStock
डायबिटीज के कारकों पर रखें नियंत्रण
डायबिटीज से ग्रसित लोगों को या डायबिटीज से बचे रहने के लिए सभी को उन कारकों को नियंत्रित करने का प्रयास करते रहना चाहिए जो मधुमेह का कारण बन सकते हैं। मोटापे को मधुमेह का प्रमुख कारक माना जाता है, इसपर ध्यान रखना बहुत महत्वपूर्ण हो जाता है। मोटापा, कोलेस्ट्रॉल के स्तर को भी बढ़ा देता है, जिससे हृदय रोग की संभावना बढ़ जाती है। इसके अलावा जिन लोगों को मधुमेह का खतरा आनुवांशिक हो, उन्हें विशेष ध्यान रखने की आवश्यकता होती है।
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डायबिटीज की दवाइयां लेते रहें (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : iStock
नियमित रूप से दवाई और इंसुलिन लेते रहें
डायबिटीज से ग्रसित लोगों को इसकी दवाइयां नियमित रूप से लेते रहना चाहिए, इनमें लापरवाही शुगर के लेवल को बढ़ा सकती है। शुगर का स्तर बढ़ जाने से शरीर के अन्य अंगों जैसे आंख, किडनी और हृदय पर भी इसका प्रभाव पड़ सकता है, ऐसे में दवाइयों के सेवन में लापरवाही न बरतें। इसके अलावा जिन लोगों को डॉक्टर ने इंसुलिन लेने की सलाह दी है, उन्हें नियमित रूप से निश्चित मात्रा में इंसुलिन के इंजेक्शन लेने रहना चाहिए।

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नोट: यह लेख डा. अल्तमश शेख (एंडोक्रिनोलॉजिस्ट, डायबेटोलॉजिस्ट) से बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें। 
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