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Diabetes: डायबिटीज रोगी आज से ही आहार में शामिल कर लें ये चार सीड्स, शुगर बढ़ने की दूर हो जाएगी टेंशन

Sat, 20 Sep 2025 10:03 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • डायबिटीज पर अगर ध्यान न दिया जाए तो ये धीरे-धीरे शरीर को अंदर से खोखला करने लगती है।
  • क्या आप जानते हैं कि आपकी रसोई में मौजूद कुछ सीड्स इतने असरदार होते हैं कि ये शुगर कंट्रोल करने में आपकी मदद कर सकते हैं।
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डायबिटीज का खतरा - फोटो : Freepik.com
Diabetes Control: डायबिटीज (मधुमेह) एक गंभीर स्वास्थ्य समस्या है जिसके मामले लगातार बढ़ते जा रहे हैं। भारतीय आबादी में मधुमेह के बढ़ते जोखिमों को देखते हुए भारत को 'डायबिटीज कैपिटल' कहा जाने लगा है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, बच्चे भी मधुमेह का शिकार हो रहे हैं जोकि गंभीर चिंताजनक स्थिति है। इसके खतरे को देखते हुए सभी लोगों को कम उम्र से ही डायबिटीज से बचे रहने के उपाय शुरू कर देने चाहिए।

डायबिटीज पर अगर ध्यान न दिया जाए तो ये धीरे-धीरे शरीर को अंदर से खोखला करने लगती है। दवा, एक्सरसाइज और डाइट कंट्रोल इसके प्रबंधन के तीन सबसे बड़े हथियार माने जाते हैं। क्या आप जानते हैं कि आपकी रसोई में मौजूद कुछ सीड्स इतने असरदार होते हैं कि ये “शुगर कंट्रोल” करने में आपकी काफी मदद कर सकते हैं।

आइए जानते हैं कि आहार में किन सीड्स को शामिल करना डायबिटीज को कंट्रोल रखने में मददगार है?
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डायबिटीज में मेथी के फायदे - फोटो : Freepik.com
मेथी के बीज बहुत फायदेमंद

मेथी के बीज सदियों से डायबिटीज के लिए आयुर्वेदिक औषधि की तरह इस्तेमाल किए जाते रहे हैं। इनमें घुलनशील फाइबर, गैलैक्टोमैनन और अमीनो एसिड्स पाए जाते हैं, जो ब्लड शुगर को नियंत्रित करने में फायदेमंद हैं।

मेडिकल जर्नल में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, नियमित रूप से मेथी के बीज का सेवन टाइप-2 डायबिटीज के रोगियों में फास्टिंग शुगर और HbA1c लेवल को कम करता है। मेथी के बीज शरीर में इंसुलिन की कार्यक्षमता भी बढ़ाते हैं। इन्हें रातभर पानी में भिगोकर सुबह खाली पेट खाने से ब्लड शुगर को स्थिर बनाए रखने में मदद मिलती है। 
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अलसी के बीज से शुगर रहता है कंट्रोल - फोटो : freepik
अलसी के बीज डायबिटीज-हार्ट दोनों में फायदे

अलसी के बीज भी डायबिटीज रोगियों के लिए बहुत लाभकारी माने जाते हैं। इनमें ओमेगा-3 फैटी एसिड, लिग्नैन और फाइबर की भरपूर मात्रा होती है। अध्ययनों से पता चला है कि अलसी का सेवन ब्लड शुगर लेवल को धीरे-धीरे बढ़ने देता है, जिससे अचानक शुगर स्पाइक से बचाव होता है।

इसके अलावा अलसी में मौजूद घुलनशील फाइबर पाचन को धीमा करता है और कार्बोहाइड्रेट के ग्लूकोज में बदलने की प्रक्रिया को नियंत्रित करता है।

जर्नल ऑफ फूड साइंस एंड टेक्नॉलजी में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार, अलसी का पाउडर टाइप-2 डायबिटीज रोगियों में ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल दोनों को कम करने में मदद करता है। इसके अलावा, अलसी में मौजूद एंटीऑक्सीडेंट्स शरीर में सूजन को कम करते हैं, जिससे इंसुलिन की कार्यक्षमता बढ़ती है। 

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चिया सीड्स के फायदे - फोटो : Freepik.com
चिया सीड्स को आहार का बनाएं हिस्सा

शुगर लेवल को कंट्रोल रखने के लिए आप आहार में चिया सीड्स को भी शामिल कर सकते हैं।  इनमें घुलनशील फाइबर और ओमेगा-3 फैटी एसिड प्रचुर मात्रा में पाए जाते हैं। चिया सीड्स पानी में फूलकर जेल जैसी परत बना लेते हैं। यह जैल भोजन के पचने की गति को धीमा कर देता है, जिससे शुगर धीरे-धीरे खून में घुलती है और ब्लड शुगर स्थिर रहता है।

न्यूट्रिशियन रिसर्च में प्रकाशित एक अध्ययन के अनुसार चिया सीड्स का नियमित सेवन टाइप-2 डायबिटीज रोगियों में इंसुलिन सेंसिटिविटी को सुधार सकता है। इसके अलावा, ये वजन घटाने में मदद करते हैं। मोटापा डायबिटीज की सबसे बड़ी समस्या है।
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कद्दू के बीज खाने से क्या होता है? - फोटो : Freepik.com
कद्दू के बीज भी फायदेमंद

शुगर के मरीजों के लिए कद्दू के बीज भी अच्छा विकल्प हैं। इनमें मैग्नीशियम, जिंक, प्रोटीन और हेल्दी फैट्स की मात्रा काफी अधिक होती है। मैग्नीशियम इंसुलिन के कार्य को ठीक करता है और ब्लड शुगर को स्थिर रखने में अहम भूमिका निभाता है।

एक अध्ययन में बताया गया कि कद्दू के बीज का सेवन ब्लड शुगर लेवल को कम करने और डायबिटीज से जुड़ी जटिलताओं को रोकने में मदद कर सकता है। ये बीज एंटीऑक्सीडेंट्स से भरपूर होते हैं, जो शरीर में ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस को कम करते हैं। ऑक्सीडेटिव स्ट्रेस डायबिटीज की जटिलताओं जैसे किडनी और हृदय रोग को बढ़ाता है।



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नोट: 
यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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