फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Good Sleep: किस उम्र के बच्चे को कितने घंटे की नींद जरूरी? नींद पूरी न होने के क्या नुकसान हैं, जानिए सबकुछ

Fri, 20 Jun 2025 06:10 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • क्या आपका बच्चा देर रात तक जागता है या दिन में भी थका-थका दिखता है?
  • वयस्कों की ही तरह से बच्चों के लिए भी रात में पर्याप्त नींद जरूरी है, ये उनके शारीरिक और मानसिक दोनों प्रकार के विकास के लिए आवश्यक है।
  • आइए जानते हैं कि किस उम्र में बच्चों को कितनी नींद की जरूरत होती है?
विज्ञापन
1 of 5
बच्चों के लिए कितने घंटे की नींद जरूरी? - फोटो : Freepik.com
Good Sleep: शरीर को स्वस्थ रखने के लिए दिनचर्या और आहार दोनों को ठीक रखना तो जरूरी है ही, इसके साथ ही जरूरी है रोजाना रात में पर्याप्त नींद लेना। शोध बताते हैं कि जिन लोगों की नींद पूरी नहीं होती है उनमें कई प्रकार की शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा अधिक हो सकता है। बच्चों से लेकर बुजुर्गों तक सभी के लिए रात में अच्छी नींद जरूरी है।

अध्ययन बताते हैं कि वयस्कों के लिए रोजाना रात में 6-8 घंटे नींद बहुत जरूरी है। एक दिन भी अगर आपकी नींद पूरी नहीं होती है तो इसका सेहत पर नकारात्मक असर हो सकता है। वयस्कों की ही तरह से बच्चों के लिए भी रात में पर्याप्त नींद जरूरी है, ये उनके शारीरिक और मानसिक दोनों प्रकार के विकास के लिए आवश्यक है।

क्या आपका बच्चा देर रात तक जागता है या दिन में भी थका-थका दिखता है? तो यह संकेत हो सकता है कि उसे पर्याप्त नींद नहीं मिल रही। बच्चों के विकास में नींद की भूमिका उतनी ही अहम है जितनी पोषण और पढ़ाई की।

आइए जानते हैं कि किस उम्र में बच्चों को कितनी नींद की जरूरत होती है?
विज्ञापन

2 of 5
नींद की गुणवत्ता जरूरी - फोटो : Freepik.com
बच्चों की अच्छी सेहत के लिए अच्छी नींद जरूरी

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं,  माता-पिता सुनिश्चित करें कि आपके बच्चों को पर्याप्त नींद मिल रही है। नवजात से लेकर किशोरों तक सभी के लिए ये आवश्यक है। नींद के दौरान शरीर ग्रोथ हार्मोन्स बनाता है, जो हड्डियों, मांसपेशियों और ऊंचाई बढ़ाने में मदद करते हैं। इसके अलावा अच्छी नींद दिमाग को दिनभर सीखी बातों को समझने और याद रखने में मदद करती है।

कुछ शोध ये भी बताते हैं कि पर्याप्त नींद लेने वाले बच्चे कम चिड़चिड़े होते हैं और भावनाएं बेहतर तरीके से संभालते हैं।

अच्छी नींद और अच्छी इम्युनिटी के बीच भी संबंधों का पता चलता है। शोध बताते हैं कि पर्याप्त नींद लेने से शरीर की रोग प्रतिरोधक क्षमता मजबूत होती है जिससे बच्चा बीमारियों से बचता है।
विज्ञापन

3 of 5
नींद की कमी के नुकसान - फोटो : Adobe Stock
नींद पूरी न होने के कई दुष्प्रभाव

जिन बच्चों की नींद पूरी नहीं होती है उनमें कई प्रकार की शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का खतरा बना रहता है। अगर बच्चे पर्याप्त नींद नहीं ले रहे हैं तो उनका विकास प्रभावित हो सकता है। ग्रोथ हार्मोन की कमी से बच्चे का शारीरिक विकास प्रभावित हो जाता है। इतना ही नहीं आगे चलकर उसकी याददाश्त कमजोर हो सकती है और पढ़ने में ध्यान केंद्रित करना मुश्किल होता है।

नींद की कमी से भूख बढ़ाने वाले हार्मोन सक्रिय हो जाते हैं जिससे मोटापा बढ़ता है। मोटापा के कारण डायबिटीज, हृदय रोग और सूजन संबंधित कई प्रकार की समस्याएं होने लगती हैं। बच्चों में बढ़ते मोटापे की समस्या को लेकर स्वास्थ्य विशेषज्ञ सभी लोगों को अलर्ट करते रहे हैं।

4 of 5
कितने घंटे की नींद बच्चों के लिए जरूरी - फोटो : Freepik.com
उम्र के हिसाब से कितने घंटे की नींद जरूरी

स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने कई अध्ययनों के आधार पर बताया है कि नवजात से लेकर किशोर तक के लिए रात में कितने घंटे की नींद जरूरी है?
  • नवजात (0–3 महीने)    14–17 घंटे
  • शिशु (4–11 महीने)    12–15 घंटे
  • टॉडलर (1–2 साल)    11–14 घंटे
  • प्री-स्कूलर (3–5 साल)    10–13 घंटे
  • स्कूली बच्चे (6–13 साल)    9–11 घंटे
  • किशोर (14–17 साल)    8–10 घंटे
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
बच्चों में डायबिटीज के मामले - फोटो : Adobe Stock
नींद की कमी से डायबिटीज का खतरा

एक हालिया अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बताया कि जिन लोगों की नींद पूरी नहीं होती है उनमें डायबिटीज होने का खतरा अधिक हो सकता है। जर्नल डायबिटीज केयर में प्रकाशित इस अध्यययन की रिपोर्ट के मुताबिक नींद हमारी सेहत के लिए बहुत जरूरी है। सप्ताह भर की भी अनियमित नींद मध्यम आयु वर्ग और वृद्ध लोगों में टाइप 2 डायबिटीज होने के खतरे को 34 प्रतिशत तक बढ़ा सकती है। यहां पढ़िए पूरी खबर



-------------
स्रोत
What happens if my child doesn’t get enough sleep?


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें