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Monkeypox: क्या सिर्फ समलैंगिकों को ही होता है मंकीपॉक्स संक्रमण? जानिए इस बीमारी से जुड़े मिथ्स और फैक्ट्स

Fri, 13 Sep 2024 07:14 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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मंकीपॉक्स संक्रमण - फोटो : freepik.com
मंकीपॉक्स एक गंभीर संक्रामक रोग है जिसका जोखिम वैश्विक स्तर पर बढ़ता हुआ देखा जा रहा है। अफ्रीकी देशों से शुरू हुआ ये संक्रमण अब भारत में भी पहुंच चुका है, यहां हाल ही में एक व्यक्ति को संक्रमण का शिकार पाया गया है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने सभी लोगों को मंकीपॉक्स से बचाव को लेकर अलर्ट किया है। मंकीपॉक्स काफी संक्रामक और खतरनाक है इसलिए बढ़ते जोखिमों को देखते हुए स्वास्थ्य विशेषज्ञ चिंतित हैं।

चूंकि कई देशों के लिए ये संक्रामक रोग नया है, इसलिए ज्यादातर लोग इसके फैक्ट्स को लेकर अनजान हैं। यही कारण है कि इन दिनों मंकीपॉक्स को लेकर कई सारी गलत जानकारियां भी तेजी से फैल रही हैं। आपने हाल ही में एमपॉक्स के बारे में काफी चर्चा सुनी होगी।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं संक्रमण की रोकथाम के लिए जरूरी है कि लोगों को इसके बारे में सही जानकारी हो। आइए जानते हैं कि मंकीपॉक्स को लेकर फैल रही बातों में क्या सच है और क्या झूठ?
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मंकीपॉक्स के मामले - फोटो : freepik.com
मिथ: मंकीपॉक्स एक नई बीमारी है, जो हाल ही में फैली है।

मंकीपॉक्स को लेकर पिछले कुछ वर्षों में चर्चा जरूर तेज हुई है लेकिन ये नई बीमारी नहीं है। एमपॉक्स वायरस की पहचान सबसे पहले 1958 में बंदरों में हुई थी (इसलिए इसका नाम मंकीपॉक्स रखा गया)। इंसानों में पहली बार 1970 के दशक में इसका केस सामने आया था। वैसे तो ये अफ्रीकी देशों में अधिक आम था, हालांकि अब संयुक्त राज्य अमेरिका, यूके सहित कई एशियाई देशों में भी पहुंच गया है। 



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मंकीपॉक्स का संक्रमण - फोटो : freepik.com
मिथ: भीड़-भाड़ वाले इलाकों में जाने से हो सकता है मंकीपॉक्स

मंकीपॉक्स संक्रामक जरूर है पर ये कोविड-19 की तरह नहीं फैलता है। कोविड की तरह एमपॉक्स के वायरस हवा में नहीं रहते हैं। इसलिए, भीड़भाड़ वाले रेस्टोरेंट या बाजार में जाना वायरस की चपेट में आने के लिए पर्याप्त नहीं है। यदि आप संक्रमित व्यक्ति के साथ निकट संपर्क में रहते हैं, उसकी चीजों का इस्तेमाल करते हैं, या कैसे भी संक्रमित के शरीर के द्रव के संपर्क में आ गए हैं तो इससे संक्रमण होने का खतरा जरूर बढ़ जाता है। 

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मंकीपॉक्स कैसे फैलता है? - फोटो : istock
मिथ: केवल समलैंगिक और बाइसेक्सुअल लोगों को ही एमपॉक्स हो सकता है?

ये सही है कि समलैंगिक और बाइसेक्सुअल लोगों में मंकीपॉक्स के मामले अधिक देखे जाते रहे हैं, हालांकि सिर्फ इन्हीं को संक्रमण होता है ये सही नहीं है। कोई भी व्यक्ति जिसके पास वायरस के खिलाफ मजबूत प्रतिरक्षा नहीं है, उसे मंकीपॉक्स हो सकता है। एमपॉक्स के बारे में सबसे महत्वपूर्ण बात ये है कि यह किसी को भी प्रभावित कर सकता है।
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मंकीपॉक्स का इलाज - फोटो : freepik.com
मिथ: संक्रमण का मतलब मौत, क्योंकि इसका कोई इलाज नहीं है।

ये सही है कि एमपॉक्स के लिए अभी तक कोई प्रभावी उपचार नहीं है। सहायक देखभाल और लक्षणों को ठीक करने के लिए उसके आधार पर इलाज किया जाता है। हालांकि संक्रमण हो जाने का मतलब मौत होना नहीं है। समय पर उपचार मिलने से लक्षणों को ठीक किया जा सकता है। टीके और एंटीवायरल दवाएं, जो मूल रूप से चेचक के लिए विकसित की गई थीं एमपॉक्स को रोकने या उसका इलाज करने के लिए इस्तेमाल की जा रही हैं। कुछ दवाओं और वैक्सीन पर लगातार परीक्षण भी किया जा रहा है।



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नोट: यह लेख डॉक्टर्स का सलाह और मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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