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कोरोना वायरस किसी सतह पर कितनी देर जिंदा रहता है और फैलता है? चौंंकाने वाला खुलासा

Wed, 10 Jun 2020 11:42 AM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोरोना वायरस पर नए अध्ययन में चौंकाने वाले परिणाम सामने आए हैं। - फोटो : Pixabay/Amar Ujala
कोरोना वायरस संक्रमण को लेकर यह बात तो जगजाहिर है कि यह संक्रमित व्यक्ति से दूसरे व्यक्ति में फैलता है। कोरोना मरीज के खांसने, छींकने या बात करने के दौरान नाक या मुंह से निकले ड्रॉपलेट्स के जरिए संक्रमण फैलने की संभावना रहती है। इसके अलावा ये ड्रॉपलेट्स प्लास्टिक, मेटल या अन्य किसी सतह पर पड़े हों तो उन सतहों से भी संक्रमण फैलने की संभावना रहती है। कोरोना वायरस किसी सतह पर कितनी देर जिंदा रह सकता है, इसको लेकर पहले भी कई अध्ययन हो चुके हैं, लेकिन ब्रिटेन में लंदन कॉलेज यूनिवर्सिटी की ओर से हुए एक नए अध्ययन में चौंकाने वाले परिणाम सामने आए हैं। इसमें कोरोना वायरस के संक्रमण फैलने को लेकर भी अध्ययन किया गया है। 
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Coronavirus - फोटो : Pixabay
जर्नल ऑफ हॉस्पिटल इंफेक्शन में प्रकाशित शोध के मुताबिक, कोरोना वायरस किसी सतह पर पांच दिनों तक जिंदा रह सकता है और 10 घंटे के भीतर बड़े क्षेत्र में अपना प्रसार कर सकता है। लंदन कॉलेज यूनिवर्सिटी की इस नई स्टडी के अनुसार, पांचवे दिन के बाद संक्रमण में कमी देखी गई।  
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Coronavirus - फोटो : Pixabay
इस अध्ययन में शोधकर्ताओं ने ब्रिटेन के ग्रेट ओरमंड स्ट्रीट अस्पताल के बेड की रेलिंग पर संक्रमण छोड़ा और जब 10 घंटे बाद पूरे अस्पताल का गहराई से अवलोकन और अध्ययन किया गया तो पाया कि पूरे वार्ड के कोने-कोने तक संक्रमण फैल चुका है। 

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Coronavirus - फोटो : Pexels
शोधकर्ताओं ने प्रयोग के दौरान एक कोरोना मरीज की सांस से लिए वायरस के साथ कृत्रिम तौर पर पौधों को संक्रमित करने वाले एक वायरस का इस्तेमाल किया, जो मनुष्य को संक्रमित नहीं कर सकता था। इसके बाद दोनों वायरस को पानी की एक बूंद में मिलाकर बेड की रेलिंग पर छोड़ दिया। बाद में अस्पताल में लिए गए 50 फीसदी नमूनों में वायरस मिला। 
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कोरोना संक्रमण का दौर - फोटो : Pexels
शोधकर्ताओं ने पांच दिनों में वार्ड के 44 स्थानों से सैकड़ों नमूने लिए। 10 घंटे बाद ही लिए गए नमूनों से खुलासा हुआ कि बेड रेलिंग, दरवाजों के हैंडल, कुर्सियों, वेटिंग रूम से लेकर किताबों और बच्चों के खिलौनों तक वायरस फैल चुका है। तीन दिन बाद जब फिर नमूने लिए गए तो पता चला कि वायरस का संक्रमण 41 फीसदी से बढ़कर 59 फीसदी क्षेत्र तक फैल चुका था। 
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कोरोना वायरस जांच (फाइल फोटो) - फोटो : Pixabay
अस्पताल के स्वास्थ्यकर्मियों, मरीजों और आगंतुकों के जरिये यह वायरस अस्पताल में फैलता चला गया। इस शोध अध्ययन के तीसरे दिन तक 86 फीसदी नमूनों में वायरस का संक्रमण मिला। हालांकि पांच दिन के बाद संक्रमण में कमी देखी गई। 
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साफ-सफाई में लापरवाही भारी पड़ सकती है - फोटो : Pixabay/Amar Ujala
इस अध्ययन की अग्रणी शोधकर्ता डॉ. लीना सिरिक के मुताबिक, अध्ययन स्पष्ट करता है कि कैसे किसी सतह से भी वायरस का संक्रमण कितनी तेजी से फैल सकता है। स्पष्ट है कि केवल संक्रमित व्यक्ति के खांसने, छींकने या सांस से खतरा नहीं है, बल्कि एक वायरस संक्रमित सतह छूने के बाद आंख, नाक और मुंह को छूने से खतरा हो सकता है। उन्होंने चेताया कि साफ-सफाई में जरा सी लापरवाही बहुत भारी पड़ सकती है। 
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