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अमर उजाला फाउंडेशन की पहल: डॉक्टरों ने बताया, कोविड के मरीजों के लिए कितना खतरनाक है हैप्पी हाइपोक्सिया?

Tue, 11 May 2021 09:36 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोरोना के बाद लोगों को हो रही है हैप्पी हाइपोक्सिया - फोटो : iStock
कोरोना संक्रमितों के मामले देश में लगातार बढ़ते जा रहे हैं। कई गंभीर रोगियों में कोरोना की इस दूसरी लहर में सांस लेने में तकलीफ और ऑक्सीजन के स्तर में गिरावट के मामले देखने को मिल रहे हैं। शरीर में ऑक्सीजन की कमी कोरोना की गंभीरता के साथ कई अन्य तरह से भी लोगों के लिए खतरनाक हो सकती है। हैप्पी हाइपोक्सिया ऐसी ही एक गंभीर समस्या है, जिसके मामले कोरोना के समय में काफी बढ़ रहे हैं।
अमर उजाला फाउंडेशन की पहल के माध्यम से कोरोना महामारी को लेकर मंगलवार को हुई चर्चा में हमने विशेषज्ञों ने इसी विषय के बारे में जानने की कोशिश की। इस दौरान इंदौर के एमवाय हॉस्पिटल में चेस्ट स्पेशलिस्ट डॉ दिलीप सिंह चावड़ा और दिल्ली एम्स में एमडी लैब मेडिसिन, डॉ राजीव रंजन ने सभी सवालों के जवाब दिए।
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ऑक्सीजन सेचुरेशन कम होने के कारण हो सकती है दिक्कत - फोटो : Social media
कोरोना के रोगियों के लिए कैसे खतरनाक है हैप्पी हाइपोक्सिया?
इस सवाल के जवाब में डॉ राजीव रंजन कहते है कि हाइपोक्सिया की समस्या लोगों को पहले भी होती रही है लेकिन कोरोना के चलते इस तरह के मामले ज्यादा देखने को मिल रहे हैं। शरीर में ब्लड ऑक्सीजन का स्तर कम हो जाने के कारण इस तरह की दिक्कत ज्यादा देखने को मिलती है। घर में रह रहे सभी लोगों को पल्स ऑक्सीमीटर के माध्यम से ऑक्सीजन सेचुरेशन की जांच करते रहना चाहिए। डॉ रंजन कहते हैं कि शरीर में कई तरह के प्रोटीन के कण होते हैं जोकि फेफड़ों की नसों में जाकर जमने लगते हैं जिसके कारण शरीर में ऑक्सीजन की कमी हो सकती है।
 
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साइलेंट किलर - फोटो : Pixabay
हाइपोक्सिया में 'हैप्पी' शब्द का क्या मतलब है?
इस सवाल के जवाब में डॉ दिलीप चावड़ा कहते हैं कि कई लोगों के मन में यह सवाल आता है कि जब यह बीमारी इतनी खतरनाक है तो इसे हैप्पी हाइपोक्सिया क्यों कहा जाता है? इसे ऐसे समझा जा सकता है कि रोगी में इसके लक्षण सामान्य तौर पर नजर नहीं आते हैं लेकिन परेशानी बढ़ती रहती है। रोगी खुश रहता है, उसे शरीर के अंदर क्या चल रहा है इस बारे में पता नहीं होता, इसी कारण से इस बीमारी में हैप्पी नाम जोड़ा गया है। इसे साइलेंट किलर भी कहा जाता है।
 

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हैप्पी हाइपोक्सिया का पता नहीं चल पाता - फोटो : Social media
क्या यह समस्या सिर्फ कोविड के रोगियों को होती है?
डॉ राजीव रंजन कहते है कि यह समस्या किसी को भी हो सकती है लेकिन कोविड के मामलों में ज्यादा देखने को मिल रही है। कई बार लोगों में हैप्पी हाइपोक्सिया के कारण ऑक्सीजन सेचुरेशन तो कम हो रहा होता है लेकिन चूंकि कोई लक्षण नहीं दिखते इसलिए इसका पता नहीं चल पाता है। जब तक लोगों को इसका पता चलता है तब तक उनकी स्थिति काफी गंभीर हो चुकी होती है। 
 
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डॉक्टरों से लक्षणों के बारे में बताएं - फोटो : Social media
क्या होते है इसके सामान्य लक्षण
डॉ राजीव कहते हैं कि सामान्य तौर पर ऐसे रोगियों को बेचैनी हो सकती है। इसके अलावा होठों के नीले रंग से भी इसकी पहचान की जा सकती है, कई लोगों के त्वचा के रंग में भी बदलाव हो सकता है। इन लक्षणों के आधार पर लोगों में हैप्पी हाइपोक्सिया की पहचान की जा सकती है। 
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नोट: यह लेख इंदौर के एमवाय हॉस्पिटल में चेस्ट स्पेशलिस्ट डॉ दिलीप सिंह चावड़ा और दिल्ली एम्स में एमडी लैब मेडिसिन, डॉ राजीव रंजन से बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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