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Holi 2024: होली में रंग-गुलाल बढ़ा सकते हैं सांसों की दिक्कत, अस्थमा रोगियों के लिए डॉक्टर ने बताए जरूरी टिप्स

Mon, 25 Mar 2024 11:03 AM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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Holi 2024 - फोटो : istock
रंगों के त्योहार होली की देशभर में धूम है। ये त्योहार अपने साथ खूब सारी खुशियां और उत्सव लेकर आता है। तरह-तरह की मिठाइयां, रंग-गुलाल और लोगों से मेल-मिलाप होली को और भी खास बना देते हैं। हालांकि स्वास्थ्य विशेषज्ञों का कहना है कि होली के उमंग-उत्साह के बीच अपनी सेहत का ध्यान रखना भी बहुत जरूरी है। विशेषतौर पर जिन लोगों को पहले से ही सांस की समस्या जैसे अस्थमा, ब्रोंकाइटिस या फिर फेफड़ों की बीमारी है उन्हें और भी अलर्ट हो जाना चाहिए।

होली के दिन चारों तरफ उड़ रहे रंग-गुलाल, सांस की समस्याओं के शिकार लोगों की लिए परेशानियां बढ़ा सकते हैं। वातावरण में फैले गुलाल के कारण आपको सांस लेने में दिक्कत, सांस फूलने की समस्या हो सकती है। रंग-गुलाल के कारण कुछ लोगों की एलर्जी भी ट्रिगर हो सकती है जिसमें सांस लेना कठिन हो जाता है। 

आइए जानते हैं कि होली के दिनों में अस्थमा रोगियों को किन बातों का ध्यान रखना चाहिए जिससे सांसों की समस्या को बढ़ने से बचा जा सके।
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रंगों के कारण बढ़ सकती है सांस की समस्या - फोटो : istock
रंग-गुलाल से ट्रिगर हो सकती है सांस की दिक्कत

अस्थमा, फेफड़ों की गंभीर बीमारी है जिसमें वायुमार्ग में सिकुड़न और सूजन हो जाती है। इससे सांस लेने में कठिनाई, खांसी और सीने में दर्द का खतरा होता है। वातावरण की कई प्रतिकूल परिस्थितियों के कारण अस्थमा रोगियों की स्वास्थ्य जटिलाताएं बढ़ने का खतरा रहता है। रंग-गुलाल और इसके कारण वातावरण में बढ़ा प्रदूषण भी इसका एक जोखिम कारक हो सकता है। 

एक अध्ययन के मुताबिक होली के रंग-गुलाल के पाउडर में बहुत से छोटे कण हो सकते हैं जिससे न सिर्फ फेफड़ों की दिक्कत बढ़ जाती है साथ ही ये आपके श्वसन तंत्र के लिए गंभीर खतरा भी पैदा कर सकते हैं। यही कारण है कि जिन लोगों को पहले से ही अस्थमा या सांस की दिक्कत रही है उन्हें सावधानी बरतनी चाहिए।
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अस्थमा की समस्या - फोटो : iStock
होली और अस्थमा की समस्या

अमर उजाला से बातचीत में बेंगलुरु स्थित मणिपाल हॉस्पिटल में पल्मोनरी मेडिसिन विभाग की डॉक्टर शीतल चौरसिया बताती हैं, होली के त्योहार में अस्थमा रोगियों को अपनी सेहत को लेकर सावधान रहने की जरूरत होती है। गुलाल के कारण हवा में प्रदूषण बढ़ जाता है जिससे खांसी, सांस लेने में दिक्कत और कभी-कभी रेस्पोरटरी फेलियर तक की समस्या हो सकती है।

होली के रंगों में लेड और कई विषाक्त पदार्थ होने का खतरा रहता हैं जिसके संपर्क में आने से एलर्जिक दिक्कतें हो सकती हैं। सांस की समस्याओं को ट्रिगर होने से बचाने के लिए कुछ बातों को ध्यान में रखना जरूरी है।

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सांस के मरीज बरतें सावधानी - फोटो : Pixabay
सांस के रोगी रखें इन बातों का ध्यान

डॉ शीतल बताती हैं, होली के दौरान श्वसन रोगियों को कुछ बातों को लेकर विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। होलिका दहन के समय सांस की समस्या वालों को धुएं से दूरी बनाकर रखनी चाहिए। वहीं होली के दिन घर से बाहर निकलते समय मास्क पहनकर रखना जरूरी है जिसे हवा में मौजूद प्रदूषकों से बचाव किया जा सके। रंगों से भी दूरी बनाएं, चेहरे-नाक के आसपास लगे रंग को तुरंत साफ कर लें। सांस की दवाइयों को लेकर कोई लापरवाही न बरतें, हमेशा अपने पास इनहेलर जरूर रखें।

कभी भी आपको लगे कि सांस लेने में तकलीफ, खांसी बढ़ गई है तो तुरंत अपने डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।
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रखें सेहत का ध्यान - फोटो : Pixabay
ये सावधानियां भी जरूरी

सांस के रोगियों को कई तरह की जटिलताओं से बचाने में पौष्टिक आहार का सेवन सहायक हो सकता है। रंगों के कारण गला सूखने या कम पानी पीने से डिहाइड्रेशन की समस्या हो सकती है, जिससे कारण सांस फूलने की दिक्कत हो सकती है। पौष्टिक और स्वस्थ आहार के साथ भरपूर मात्रा में पानी पीते रहें। होली में किसी भी प्रकार के नशे से बचें। धूम्रपान-अल्कोहल आपके लक्षणों को बिगाड़ सकते हैं।


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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