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Health Alert: क्रिएटिनिन बढ़ने से हो सकती है किडनी फेलियर, इन उपायों से रखिए इसे कंट्रोल

Mon, 12 Feb 2024 07:30 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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किडनी की समस्याएं - फोटो : istock
किडनी को शरीर के सबसे महत्वपूर्ण अंगों में से एक माना जाता है, ये आपके शरीर से अपशिष्ट और अतिरिक्त तरल पदार्थ को निकालने के साथ रक्तचाप को कंट्रोल करने, पीएच लेवल को मेंटेन रखने और हार्मोन्स के स्तर को ठीक बनाए रखने में भी मददगार है। हालांकि पिछले कुछ वर्षों में जिन अंगों से संबंधित बीमारियों को बढ़ते हुए देखा गया है, किडनी उनमें से एक है।

इतना ही नहीं कम उम्र के लोग भी किडनी की बीमारियों के शिकार होते जा रहे हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, किडनी की समस्याओं पर अगर समय रहते ध्यान न दिया जाए तो ये किडनी फेलियर का भी कारण बन सकती है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, किडनी फेलियर के अधिकतर मामलों में रक्त में क्रिएटिनिन की मात्रा बढ़ने को एक कारण पाया जाता है। आखिर क्या होती है क्रिएटिनिन? इससे किडनी को किस प्रकार से नुकसान पहुंचती है और इसे कंट्रोल करने के लिए क्या उपाय किए जा सकते हैं, आइए इस बारे में जानते हैं।
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हाई क्रिएटिनिन के नुकसान - फोटो : Pixabay
क्रिएटिनिन और किडनी रोगों का खतरा 

क्रिएटिनिन मांसपेशियों द्वारा उत्पादित एक अपशिष्ट उत्पाद है, सामान्यत: हमारी किडनी इसे फिल्टर कर देती है। अगर रक्त में क्रिएटिनिन की मात्रा अधिक हो जाए तो किडनी के लिए इसे फिल्टर कर पाना कठिन हो जाता है और गंभीर स्थितियों में ये किडनी फेलियर का भी कारण बन सकती है।

आहार-लाइफस्टाइल में सुधार करके क्रिएटिनिन के स्तर को ठीक बनाए रखने में मदद मिल सकती है। आइए जानते हैं कि इसके लिए किन चीजों का सेवन लाभकारी माना जाता है।
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प्रोटीन वाली चीजें - फोटो : Pixabay
प्रोटीन वाली चीजों का सेवन करें संयमित

शोध से पता चलता है कि अधिक मात्रा में प्रोटीन वाली चीजों के सेवन से क्रिएटिनिन का स्तर बढ़ सकता है। विशेष रूप से रेड मीट जैसे प्रोटीन के स्रोत क्रिएटिनिन को बढ़ाने वाले माने जाते हैं। जो लोग रेड मीट या डेयरी उत्पादों सहित अन्य प्रोटीन स्रोतों का अधिक सेवन करते हैं उनमें क्रिएटिनिन का स्तर बढ़ सकता है। इसे कंट्रोल में रखने के लिए प्रोटीन का संयमित मात्रा में सेवन करें।

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आहार में फाइबर की मात्रा - फोटो : istock
फाइबर की बढ़ाएं मात्रा

क्रिएटिनिन के स्तर को कंट्रोल करने के लिए आहार में फाइबर की मात्रा बढ़ाने से लाभ मिल सकता है। अध्ययन में पाया गया कि जिन लोगों ने आहार में फाइबर की मात्रा को बढ़ाया, ऐसे क्रोनिक किडनी डिजीज वाले रोगियों क्रिएटिनिन के स्तर में महत्वपूर्ण सुधार आया। फाइबर कई खाद्य पदार्थों में पाए जाते है। फल-सब्जियां, साबुत अनाज और नट्स के सेवन से आप लाभ पा सकते हैं। 
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धूम्रपान से होने वाले नुकसान - फोटो : pixabay
धूम्रपान और अल्कोहल से बचें

सिगरेट पीने से शरीर को कई तरह से नुकसान हो सकता है, इससे क्रोनिक किडनी रोग का खतरा भी बढ़ सकता है। इसी तरह से किडनी को स्वस्थ रखने के लिए शराब से भी दूरी बनाकर रखने की सलाह दी जाती है। शोध से पता चला है कि शराब से दूरी बनाकर क्रोनिक किडनी रोग के खतरे को कम करने में मदद मिल सकती है। धूम्रपान और अल्कोहल, ब्लड में क्रिएटिनिन के स्तर को बढ़ाने वाले हो सकते हैं।


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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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