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सेहत की बात: पेट के आसपास जमा चर्बी बना देगी आपको दिल का मरीज, इस खतरे से ज्यादातर लोग रहते हैं अनजान

Sun, 27 Sep 2026 05:54 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Belly Fat Risk: पेट के आसपास जमा अतिरिक्त चर्बी सिर्फ वजन बढ़ने का संकेत नहीं है। एब्डॉमिनल और विसरल फैट का संबंध हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और हृदय रोग के जोखिम से है। अगर आपका बेली फैट भी बढ़ा रहता है तो इसके खतरों का जान लीजिए।
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बेली फैट और हार्ट की समस्या - फोटो : Amarujala.com/AI
अधिक वजन और मोटापा को सेहत के लिए सबसे बड़े खतरे को रूप में देखा जाता है। ये कई तरह की क्रॉनिक बीमारियों का कारण माना जाता रहा है। अध्ययनों में पाया गया है कि अधिक वजन-मोटापा के शिकार लोगों में हाई ब्लड प्रेशर, डायबिटीज और हृदय रोगों से लेकर कैंसर तक का खतरा अधिक होता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, सबसे ज्यादा खतरनाक आपके पेट के पास जमा चर्बी को माना जाता है, भले ही आपका वजन ज्यादा न हो पर अगर बेली फैट यानी पेट की चर्बी अधिक है तो ये आपके लिए बहुत खतरनाक हो सकती है।

अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन के अनुसार पेट के आसपास की चर्बी यानी एब्डॉमिनल ओबेसिटी हृदय रोग के जोखिमों को कई गुना तक बढ़ाने वाली हो सकती है। भले ही आपका बॉडी मास इंडेक्स सामान्य सीमा में हो, पर अगर पेट निकला हुआ है या फिर कमर का आकार ज्यादा है तो आपमें दिल की बीमारियों का खतरा भी अधिक हो सकता है।

आइए जान लेते हैं कि बेली फैट और हार्ट डिजीज का क्या कनेक्शन हो सकता है?
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हृदय रोगों का खतरा - फोटो : Adobe Stock Images
मेडिकल रिपोर्ट्स से पता चलता है कि कमर के आसपास की अतिरिक्त चर्बी का संबंध हार्ट फेलियर और दिल की अन्य बीमारियो से भी पाया गया है। बॉडी मास इंडेक्स अधिक होने की तुलना में बेली फैट ज्यादा होने को विशेषज्ञ ज्यादा खतरनाक मानते हैं। 

पेट की चर्बी से हार्ट को खतरा
 
स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, शरीर की सारी चर्बी एक जैसी नहीं होती। पेट के अंदरूनी अंगों के आसपास जमा होने वाली चर्बी को आंतरिक चर्बी यानी विसरल फैट कहा जाता है।
 
  • विसरल फैट की अधिक मात्रा शरीर में सूजन बढ़ाकर, हाई ब्लड प्रेशर और कोलेस्ट्रॉल का स्तर में असामान्य वृद्धि का कारण बन सकती है। इससे दिल की बीमारी और हार्ट फेलियर का खतरा काफी ज्यादा हो सकता है।
  • पेट के आसपास ज्यादा चर्बी को ट्राइग्लिसराइड और टाइप-2 डायबिटीज जैसे जोखिम कारकों को बढ़ाने वाला भी पाया गया है। ये सभी मिलकर हृदय रोग का खतरा बढ़ा सकते हैं। 
  • मेटाबॉलिक सिंड्रोम में भी कमर का आकार अधिक होने, हाई ब्लड शुगर, हाई ट्राइग्लिसराइड जैसे कारक एक साथ देखे जाते हैं।
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वजन बढ़ने की समस्या - फोटो : Freepik.com
वजन सामान्य है फिर भी पेट निकलाना खतरनाक

कुछ लोगों का कुल वजन बहुत ज्यादा नहीं होता, लेकिन कमर के आसपास चर्बी अधिक हो सकती है। ऐसी स्थिति में केवल कुल वेट के हिसाब से स्वास्थ्य जोखिमों का अंदाजा नहीं लगाया जा सकता। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, सेहत के लिए वजन पर ध्यान देने की बात हो तो कुल वेट के साथ कमर की माप को देखना भी जरूरी है।
 
  • वैसे तो पेट बाहर निकलना यह साबित नहीं करता कि आपको दिल बीमारी होगी। लेकिन बढ़ता बेली फैट भविष्य में खतरों को बढ़ाने वाला हो सकता है, इसलिए इसे नजरअंदाज नहीं किया जाना चाहिए।
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मोटापा और पेट की चर्बी कैसे कम करें? - फोटो : Adobe stock
पेट की चर्बी कैसे कम करें?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं, पेट की चर्बी सबसे सख्त चर्बियों में से होती है। अतिरिक्त चर्बी कम करने के लिए खान-पान, शारीरिक गतिविधि, नींद को ठीक रखने के साथ वजन कंट्रोल करने के दूसरे उपायों पर भी ध्यान देना चाहिए। नियमित गतिविधि और स्वस्थ आहार हृदय स्वास्थ्य के लिए भी महत्वपूर्ण हैं, ऐसे में लाफस्टाइल और डाइट में सुधार करके आप बेली फैट और हृदय रोग दोनों के खतरे को कम कर सकते हैं।

अगर कमर पर ज्यादा चर्बी है तो ब्लड प्रेशर, ब्लड शुगर और कोलेस्ट्रॉल की लगातार जांच करें और इसे कंट्रोल में रखने वाले उपाय करें। 




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स्रोत:
Visceral adipose tissue and residual cardiovascular risk: a pathological link and new therapeutic options


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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