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अलर्ट: ग्लासी स्किन के चक्कर में खुद अपने चेहरे को नुकसान पहुंचा रहे युवा, विशेषज्ञों ने किया सावधान

Sun, 27 Sep 2026 02:28 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Skincare Alert: ग्लासी स्किन का सोशल मीडिया ट्रेंड किशोरों को अपनी त्वचा को लेकर परेशान कर रहा है। बेदाग और चमकदार चेहरा पाने की चाह में कई युवा जरूरत से ज्यादा स्किनकेयर प्रोडक्ट इस्तेमाल कर रहे हैं। विशेषज्ञों के अनुसार ये चीजें त्वचा के लिए और भी मुश्किलें बढ़ाने वाली हो सकती हैं।
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स्किन केयर को लेकर सावधानी - फोटो : Amarujala.com/AI
आजकल सोशल मीडिया पर स्किनकेयर को लेकर ऐसा ट्रेंड लोगों का ध्यान खींच रहा है, जिसमें चेहरा बिल्कुल चिकना, चमकदार और बिना किसी दाग-धब्बे के नजर आता है। इसे देखकर किशोरों को लगने लगता है कि अच्छी त्वचा का मतलब बिल्कुल साफ और चमकदार चेहरा होना है। नतीजा यह होता है कि चेहरे की छोटी-सी कमी भी उन्हें परेशान करने लगती है और वे उसे ठीक करने के लिए लगातार नए प्रोडक्ट आजमाने लगते हैं।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, लेकिन असल जिंदगी में त्वचा बिल्कुल साफ दिखे ये जरूरी नहीं है। उम्र बढ़ने के साथ शरीर में होने वाले बदलावों का असर त्वचा पर साफ दिखाई देता है। कभी चेहरा ज्यादा तैलीय हो सकता है, कभी छोटे दाने निकल सकते हैं और कभी त्वचा थोड़ी संवेदनशील नजर आ सकती है। यह सब देखकर तुरंत यह मान लेना सही नहीं है कि त्वचा खराब हो गई है।

सोशल मीडिया पर बेदाग और चमकदार त्वचा यानी 'ग्लासी स्किन' का ट्रेंड लोगों को बार-बार नए प्रोडक्ट्स इस्तेमाल करने को मजबूर कर रहा है, जिसका कई बार नकारात्मक असर भी हो सकता है।
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त्वचा पर ज्यादा प्रोडक्ट्स का इस्तेमाल हो सकता है नुकसानदायक - फोटो : Adobe stock
त्वचा पर ज्यादा प्रयोग बढ़ा सकता है मुश्किलें

कई किशोर सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर्स के वीडियो देखकर कई तरह के सीरम, टोनर, मास्क और एक्सफोलिएटिंग प्रोडक्ट इस्तेमाल करने लगे हैं। अपेक्षित परिणाम न मिलने पर युवा तनाव में आ जाते हैं। विशेषज्ञों का कहना है कि इस उम्र में त्वचा की देखभाल के लिए लंबी-चौड़ी स्किनकेयर रूटीन जरूरी नहीं है। उल्टा, जरूरत से ज्यादा प्रोडक्ट इस्तेमाल करने से त्वचा में जलन और दूसरी समस्याएं बढ़ सकती हैं। 
 
  • एक रिपोर्ट के मुताबिक, 13 से 18 वर्ष की उम्र के 80% से अधिक किशोरों को एक्ने यानी मुंहासों की समस्या होती है। 
  • त्वचा विशेषज्ञों के मुताबिक किशोरावस्था में हार्मोनल बदलाव के कारण त्वचा में तेल का उत्पादन बढ़ता है। इससे बालों के रोम बंद होने और सूजन के कारण ब्लैकहेड्स, व्हाइटहेड्स और मुंहासे हो सकते हैं। 
  • विशेषज्ञों का कहना है कि सोशल मीडिया पर दिखाई देने वाली साफ और बेदाग त्वचा को सामान्य मानक नहीं समझना चाहिए। पोर्स, ब्लैकहेड्स, लालिमा और कभी-कभी मुंहासे किशोर त्वचा का सामान्य हिस्सा हो सकते हैं।
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स्किन हेल्थ को लेकर जान लीजिए जरूरी बातें - फोटो : Adobe stock
हर चमकदार त्वचा को आदर्श मानना जरूरी नहीं

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, आपको जो चेहरा या स्किन सोशल मीडिया पर दिखाई देती है वो चेहरा वास्तविक त्वचा हो ये जरूरी नहीं है। तस्वीरों में रोशनी, कैमरा एंगल, मेकअप और फिल्टर का असर होता है। इसलिए किसी इन्फ्लुएंसर की त्वचा देखकर अपनी त्वचा से उसकी तुलना करना सही नहीं है।
 
  • चेहरे पर पोर्स दिखाई देना, हल्की लालिमा या कभी-कभार दाने निकलना त्वचा के सामान्य बदलाव हो सकते हैं।
  • सीरम, टोनर, फेस मास्क और एक्सफोलिएटर जैसे कई प्रोडक्ट एक साथ इस्तेमाल करने से त्वचा जल्दी बेहतर होगी ये भी जरूरी नहीं है। 
  • जरूरत से ज्यादा उत्पाद या बार-बार एक्सफोलिएशन त्वचा में जलन, रूखापन और संवेदनशीलता बढ़ा सकती है। 
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मुंहासों की समस्या - फोटो : Adobe stock
किशोरावस्था में मुंहासे होना बहुत सामान्य

किशोरावस्था में शरीर में हार्मोनल बदलाव होते हैं। इनके कारण त्वचा में तेल का उत्पादन बढ़ जाता है। अतिरिक्त तेल, त्वचा की कोशिकाएं और रोमछिद्रों में रुकावट मिलकर ब्लैकहेड्स, व्हाइटहेड्स और मुंहासों को बढ़ा सकते हैं। इसलिए इस उम्र में मुंहासे निकलना हमेशा खराब स्किनकेयर या गंदगी का संकेत नहीं होता और इसको लेकर परेशान होने की भी जरूरत नहीं है।

जब आप लगातार सोशल मीडिया पर बेदाग चेहरों को देखते हैं तो उन्हें अपनी सामान्य त्वचा भी खराब लग सकती है। यह सोच आत्मविश्वास और मानसिक स्थिति पर असर डाल सकती है। त्वचा का स्वस्थ होना सिर्फ चमक या बेदाग दिखने से तय नहीं होता। अपनी त्वचा की वास्तविक जरूरत समझना और उसके हिसाब से ही उत्पादों का चयन करना चाहिए।




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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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