फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

Heart Problem: हृदय रोगों की नहीं है फैमिली हिस्ट्री, तो क्या हार्ट अटैक से सुरक्षित हैं आप? डॉक्टर से जानिए

Thu, 10 Jul 2025 03:50 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • भारत में, 20 से 40 साल की उम्र के लोगों में हार्ट अटैक के मामले तेजी से बढ़े हैं। इनमें से कई लोगों का कोई फैमिली हिस्ट्री नहीं था। 
  • अक्सर लोगों को लगता है कि अगर उनके परिवार में किसी को दिल की बीमारी नहीं हुई है, तो उन्हें भी हार्ट अटैक का खतरा नहीं है। लेकिन सच्चाई इससे काफी अलग है।
विज्ञापन
1 of 5
हृदय स्वास्थ्य की समस्याओं के बारे में जानिए - फोटो : Freepik.com
Heart Disease Risk Calculator: हृदय रोग के मामले अब सिर्फ उम्र बढ़ने के साथ होने वाली समस्या नहीं रह गए हैं, कम उम्र में यहां तक कि 20 से कम आयु वाले भी इसका शिकार हो रहे हैं। हाल के दिनों में आपने कई ऐसी खबरें सुनी-देखी होगीं जिसमें क्रिकेट खेलते, बातचीत करते-करते या ऑफिस में बैठे-बैठे हार्ट अटैक के कारण लोगों की मौत हो गई। इस तरह की खबरें सुनने के बाद मन में पहला सवाल यही आता है कि कहीं हमें भी तो इसका खतरा नहीं है?

हृदय रोगों के लिए आमतौर पर खराब जीवनशैली-गड़बड़ खान पान को बड़ा कारण माना जाता रहा है। इसके अलावा जिन लोगों के परिवार में पहले से किसी को, विशेष रूप से माता-पिता को हृदय रोगों की समस्या रही है उनमें आगे चलकर हार्ट की बीमारियों के होने का खतरा अधिक रहता है।

अब सवाल ये है कि अगर आपके परिवार में हृदय रोगों की कोई फैमिली हिस्ट्री नहीं है तो क्या आप  हार्ट अटैक से सुरक्षित हैं? आइए इस सवाल की जवाब ढूंढते हैं।
विज्ञापन

2 of 5
हृदय रोग और इसका खतरा - फोटो : Freepik.com
क्या कहते हैं डॉक्टर?

अमर उजाला से बातचीत में दिल्ली स्थित एक निजी अस्पताल में वरिष्ठ कार्डियोलॉजिस्ट डॉ रवि प्रकाश कहते हैं, ये सही है कि जिन लोगों के माता-पिता या खून के रिश्ते वालों को हृदय रोग, हाई ब्लड प्रेशर की समस्या रही है, ऐसे लोगों को विशेष सावधानी बरतनी चाहिए। ये स्थितियां आपमें भी हार्ट से संबंधित समस्याओं को बढ़ाने वाली हो सकती हैं।

हालांकि अक्सर लोगों को लगता है कि अगर उनके परिवार में किसी को दिल की बीमारी नहीं हुई है, तो उन्हें हार्ट अटैक का खतरा नहीं है। लेकिन सच्चाई इससे काफी अलग है।

हार्ट अटैक केवल अनुवांशिक वजहों से ही नहीं होता, हमारी जीवनशैली और पर्यावरण भी इसमें अहम भूमिका निभाते हैं।
विज्ञापन

3 of 5
हार्ट अटैक के जोखिमों के बारे में जानिए - फोटो : Freepik.com
बिना फैमिली हिस्ट्री के भी हो सकते हैं हार्ट अटैक का शिकार

इसी को लेकर विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) की रिपोर्ट के अनुसार, दुनियाभर में हर साल करीब 1.8 करोड़ लोग दिल की बीमारियों से जान गंवाते हैं। इनमें से बड़ी संख्या उन लोगों की है, जिन्हें फैमिली हिस्ट्री नहीं थी।

अमेरिकन हार्ट एसोसिएशन की रिपोर्ट के मुताबिक, हार्ट अटैक के 80% मामले जीवनशैली से जुड़े कारणों से होते हैं, न कि केवल जीन से। आंकड़ों से पता चलता है कि भारत में 20-40 साल की उम्र के लोगों में हार्ट अटैक के मामले तेजी से बढ़े हैं, इनमें से कई लोगों का कोई फैमिली हिस्ट्री नहीं थी।

4 of 5
खान-पान का हार्ट पर असर - फोटो : Freepik.com
इन कारणों से हो सकता है हार्ट अटैक

डॉ रवि प्रकाश बताते हैं, भले ही फैमिली हिस्ट्री न हो फिर भी कुछ स्थितियां आपमें हार्ट अटैक के खतरे को बढ़ाने वाली हो सकती है।

इसका सबसे बड़ा कारण है अस्वास्थ्यकर खान-पान जैसे ज्यादा ऑयली, जंक फूड, मीठा और प्रोसेस्ड फूड का सेवन दिल पर बुरा असर डालता है। इसी तरह से धूम्रपान और शराब की आदत भी दिल की सेहत के लिए ठीक नहीं है। 
  • शारीरिक निष्क्रियता यानी दिनभर बैठकर काम करना और व्यायाम न करना एक बड़ा रिस्क फैक्टर है।
  • हाई ब्लड प्रेशर और डायबिटीज जैसी स्थितियां अचानक हार्ट अटैक का कारण बन सकती हैं।
  • क्रॉनिक स्ट्रेस और नींद न पूरी होने से दिल की धड़कनें अनियमित हो सकती हैं और हार्ट अटैक का जोखिम रहता है।
  • इसके अलावा शरीर में ज्यादा फैट या मोटापा होने से धमनियां ब्लॉक हो सकती हैं और हार्ट अटैक का कारण बन सकती है।
विज्ञापन
विज्ञापन

5 of 5
दिल की सेहत का रखें ध्यान - फोटो : Freepik.com
हृदय स्वास्थ्य का रखिए ध्यान

डॉक्टर कहते हैं, फैमिली हिस्ट्री का होना या न होना हार्ट अटैक के खतरे को पूरी तरह तय नहीं करता। अगर आपके परिवार में पहले से किसी को दिल की बीमारी नहीं है, तो भी आप पूरी तरह सुरक्षित नहीं हैं। आज की लाइफस्टाइल, खान-पान और मानसिक तनाव जैसे कई ऐसे कारण हैं जो किसी को भी हार्ट अटैक की तरफ धकेल सकते हैं। इसलिए जरूरी है कि आप पहले से सतर्क रहें और अपनी लाइफस्टाइल में पॉजिटिव बदलाव लाएं।


-------------
नोट: यह लेख डॉक्टर्स का सलाह और मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
और पढ़ें...
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें