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Heart Attack: कहीं आपको भी तो नहीं है हार्ट अटैक का खतरा? इन टेस्ट की मदद से कर सकते हैं पता

Tue, 24 Oct 2023 07:01 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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हार्ट अटैक के बढ़ते खतरे से बचाव - फोटो : iStock
हृदय रोग और हार्ट अटैक के मामले वैश्विक स्तर पर पिछले कुछ वर्षों में तेजी से बढ़े हैं। कुछ दशकों पहले तक हृदय रोगों को बढ़ती उम्र के साथ होने वाली समस्या के तौर पर जाना जाता था हालांकि अब काफी कम उम्र, यहां तक कि युवा आबादी भी हार्ट अटैक-कार्डियक अरेस्ट का शिकार हो रही है।

हालिया मामलों में दुर्गा पूजा पांडालों में, गरबा नृत्य के दौरान देश के अलग-अलग हिस्सों से हार्ट अटैक के कारण मौत की खतरें सामने आईं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, जिस तरह से ये जानलेवा बीमारी बढ़ती जा रही है, हमें अपने हृदय को लेकर और भी अलर्ट हो जाने की जरूरत है।

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, हृदय रोग किसी को भी हो सकता है, इसलिए जरूरी है कि हम कम उम्र से ही लाइफस्टाइल और आहार को लेकर अलर्ट रहें। यही दो मुख्य जोखिम कारक हैं जिनकी गड़बड़ी हृदय स्वास्थ्य के लिए समस्याएं बढ़ा रही हैं। इसके अलावा 40 की उम्र के बाद नियमित रूप से कुछ टेस्ट कराते रहना चाहिए जिससे जोखिमों का पता लगाया जा सके।
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युवाओं में हार्ट अटैक का खतरा - फोटो : iStock
हृदय रोगों की बढ़ती समस्या

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, समय के साथ कई गड़बड़ आदतों ने हमें घेर लिया है जो हृदय रोगों के खतरे को बढ़ा रही है। ज्यादातर लोग सेंडेंटरी लाइफस्टाइल के शिकार हैं, दिन का अधिकतर समय एक स्थान पर बैठे-बैठे बीत जाता है। इसके अलावा जंक-प्रोसेस्ड फूड्स के कारण कोलेस्ट्रॉल और ब्लड प्रेशर की समस्या भी बढ़ रही है जिससे हृदय स्वास्थ्य पर नकारात्मक असर हो रहा है।

कम उम्र से ही अगर हृदय की सेहत पर ध्यान न दिया जाए तो इसके गंभीर दुष्प्रभाव हो सकते हैं। आइए जानते हैं कि किन टेस्ट के माध्यम से हृदय रोगों के खतरे को पता लगाया जा सकता है। इन सभी टेस्ट के लिए एक बार डॉक्टर की सलाह जरूर ले लें।
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कोलेस्ट्रॉल की समस्या - फोटो : istock
कोलेस्ट्रॉल की कराएं जांच

कोलेस्ट्रॉल की जांच के लिए ब्लड का सैंपल लिया जाता है जिसके आधार पर आपके रक्त में कोलेस्ट्रॉल और फैट की मात्रा का पता लगाया जाता है। कोलेस्ट्रॉल आपके रक्त में पाया जाने वाला एक मोम युक्त पदार्थ है। स्वस्थ कोशिकाओं के निर्माण के लिए वैसे तो इसकी आवश्यकता होती है, लेकिन इसकी अधिकता गंभीर हृदय रोगों के खतरे को बढ़ा सकती है।

ब्लड में 200 मिलीग्राम/डीएल से कोलेस्ट्रॉल की मात्रा को सामान्य माना जाता है। 240 मिलीग्राम/डीएल या उससे ऊपर की मात्रा हानिकारक हो सकती है। 

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हृदय के लिए ईसीजी टेस्ट - फोटो : Pixabay
ईसीजी की जांच

इलेक्ट्रोकार्डियोग्राम (ईसीजी) टेस्ट हृदय में विद्युत संकेतों को रिकॉर्ड करती है। इस टेस्ट की मदद से ये जाना जा सकता है कि दिल कितनी तेजी से धड़क रहा है, दिल की धड़कन की लय (स्थिर या अनियमित) कैसे है और विद्युत आवेग किस प्रकार के हैं?

ईसीजी में परिवर्तन हृदय संबंधी कई स्थितियों का संकेत हो सकती है। हार्ट अटैक जैसी स्थितियां का पता लगाने के लिए भी इस टेस्ट की मदद ली जाती है।
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सीआरपी टेस्ट - फोटो : iStock
सी-रिएक्टिव प्रोटीन टेस्ट

शरीर में कहीं इंफ्लामेशन की दिक्कत तो नहीं है, इसका पता लगाने के लिए सी-रिएक्टिव प्रोटीन (सीआरपी) टेस्ट कराने की सलाह दी जाती है। सीआरपी का स्तर बढ़ने का मतलब यह हो सकता है कि आपको कोई गंभीर स्वास्थ्य स्थिति है जो सूजन का कारण बन रही है। एचएस-सीआरपी परीक्षण कोरोनरी आर्टरी डिजीज के जोखिमों को जानने में भी मदद करती है। कोरोनरी आर्टरी डिजीज में हृदय की धमनियां सिकुड़ जाती हैं, जिसके कारण हार्ट अटैक का खतरा हो सकता है। 



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नोट:
यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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