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Heart Attack: सीपीआर का सही तरीका और ये जरूरी बातें जान ली तो हार्ट अटैक में बचा सकते हैं लोगों की जान

Sun, 10 Aug 2025 09:43 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

  • हार्ट अटैक की स्थिति में सीपीआर देकर रोगी की जान बचाई जा सकती है। सीपीआर का सही तरीका समझाने के लिए एम्स भोपाल में मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया।
  • इस दौरान डॉक्टर्स ने लोगों को सीपीआर देने का सही तरीका बताया है।
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सीपीआर के बारे में जानिए - फोटो : Freepik.com
Heart Attack Vs CPR: हाल के वर्षों में हार्ट अटैक और इससे मौत के मामलों में काफी तेजी से उछाल देखा गया है। अब कम उम्र में, यहां तक कि 20 की उम्र वाले लोग भी न केवल हार्ट अटैक का शिकार हो रहे हैं बल्कि इससे मौत की भी खबरें अक्सर चर्चा में रहती हैं। विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के अनुसार, दुनियाभर में हर साल करीब 1.8 करोड़ लोगों की मौत दिल से जुड़ी बीमारियों के कारण हो जाती है, जिसमें हार्ट अटैक एक बड़ी वजह है। भारत में भी इसका खतरा तेजी से बढ़ा है। गंभीर बात यह है कि कई मामलों में मरीज अस्पताल तक पहुंचने से पहले ही दम तोड़ देते हैं। 

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, हार्ट अटैक की स्थिति हर बार जानलेवा नहीं होती, इससे लोगों की जान बचाई जा सकती है अगर उन्हें समय रहते सीपीआर दे दिया जाए। ये एक जीवनरक्षक तकनीक है जिसके बारे में सभी लोगों को जानना आवश्यक है, ताकि जरूरत पड़ने पर इसका इस्तेमाल करके लोगों की जान बचाई जा सके।

इसी बारे में लोगों को जागरूक करने और सीपीआर का सही तरीका समझाने के लिए एम्स भोपाल में मॉक ड्रिल का आयोजन किया गया।
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हृदय रोग और हार्ट अटैक का खतरा - फोटो : adobe stock photos
सीपीआर के बारे में सही जानकारी जरूरी

डॉक्टर्स ने कहा, जीवन रक्षक तकनीकों की जानकारी हर नागरिक तक पहुंचाना हमारा कर्तव्य है। ये एक छोटा प्रयास लेकिन बड़ी पहल है जिसकी मदद से हम लोगों की हार्ट अटैक की स्थिति में जान बचाने में मदद कर सकते हैं। मॉक ड्रिल के दौरान डॉ संजय मंडलोई ने कई जरूरी बातें साझा की हैं, जिसका सीपीआर देते समय ध्यान रखना बेहद जरूरी है।

डॉक्टर कहते हैं, हार्ट अटैक की स्थिति में सबसे पहले रोगी के नाक के पास अपने कान लगाकर चेक करें कि वह सांस ले पा रहा है या नहीं? अगर सांस लेने में कोई दिक्कत हो रही है तो तुरंत सीपीआर दें। 
 
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हार्ट अटैक में जीवनरक्षक है सीपीार - फोटो : Freepik.com
क्या कहते हैं डॉक्टर?

डॉ संजय कहते हैं, अक्सर लोगों को लगता है दिल तो बाईं तरफ होता है तो सीपीआर भी बाईं तरफ देना है, हालांकि ऐसा नहीं है आपको छाती के बीचों-बीच दबाव डालना है। सीपीआर देते समय अपने हाथों को एकदम सीधा रखें जिससे छाती पर दबाव अच्छे से बने। सीपीआर देते समय 30 तक गिनें और लगातार सीपीआर की मदद से छाती को दबाते रहें।

30 बार छाती पर दवाब बनाने के बाद एक बार रोगी को मुंह से सांस दें और फिर से उसकी सांस चेक करें। अगर मरीज को अब भी सांस नहीं आ रही है तो फिर से 30 बार सीपीआर और एक बार मुंह से सांस दें। 

हार्ट अटैक के दौरान 'गोल्डन टाइम'

डॉक्टर बताते हैं, हार्ट अटैक की स्थिति में 'गोल्डन टाइम' बहुत महत्वपूर्ण है। ये दिल का दौरा पड़ने के बाद के पहले 30 मिनट होते हैं, जिसमें तत्काल चिकित्सा सहायता प्राप्त करना सबसे महत्वपूर्ण होता है। हार्ट अटैक-कार्डियक अरेस्ट की स्थिति में लक्षणों की समय पर पहचान कर तुरंत सीपीआर देने से जान बचने की संभावना 60-70 फीसदी तक बढ़ जाती है।
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सीपीआर का सही तरीका क्या है? - फोटो : freepik.com
सीपीआर होता क्या है? इसका तरीका क्या है?

कार्डियोपल्मोनरी रिससिटेशन (सीपीआर) एक जीवनरक्षक तकनीक है जो हार्ट अटैक जैसी आपात स्थितियों में जीवनरक्षक साबित हो सकती है। सांस या दिल की धड़कन रुक जाने की स्थिति में रोगी को तुरंत सीपीआर देने की सलाह दी जाती है। छाती को सही गति से दबाने की यह प्रक्रिया रक्त के संचार को ठीक रखने में मददगार हो सकती है। इससे दिल को फिर से रक्त का संचार मिलने लगता है और जान बच सकती है। 
  • इसके लिए सबसे पहले रोगी के कपड़े और बेल्ट ढीला कर दें और सीपीआर देते समय एक मिनट में कम से कम 100-120 बार पंप करें। 
  • हमेशा सीधे हाथ से सीपीआर दें, कोहनी मुड़नी नहीं चाहिए। त्वरित उपचार के रूप में रोगी को एक डिस्प्रिन की गोली लें और मुंह में रखें, ये गोली खुद ही घुल जाती है। 
  • इसके साथ मरीज के सांस और नाड़ी को चेक करते रहे और बार-बार सीपीआर देते रहें, जब तक कि धड़कन चलने न लगे। उसे तुरंत किसी नजदीकी अस्पताल में न पहुंचा दिया जाए।

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नोट: 
यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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