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Health Tips: क्या होता है 'इन्फोर्मेशन ओवरलोड', जानें कैसे यह आपकी एकाग्रता को प्रभावित कर सकता है?

Sun, 10 Aug 2025 09:42 PM IST
शिखर बरनवाल हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

इंटरनेट, सोशल मीडिया, समाचार चैनलों और मैसेजिंग ऐप्स के माध्यम से हर पल जानकारी की एक नई धारा बहती रहती है। यह सूचना का प्रवाह इतना तेज है कि हमारा दिमाग उसे पूरी तरह से समझ और संसाधित नहीं कर पाता। इसी स्थिति को 'इन्फॉर्मेशन ओवरलोड' कहा जाता है।
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इन्फोर्मेशन ओवरलोड - फोटो : Adobe Stock
Information Overload Effects: आज के डिजिटल युग में हमारे पास सूचनाओं का अंबार है। इंटरनेट और सोशल मीडिया आने के बाद कंटेंट क्रिएशन काफी बढ़ गया है। इस कारण बीते दशकों में एक बड़ा इंफोर्मेशन बूम आया है। सोशल मीडिया का उपयोग करते हुए हमारा दिमाग काफी मात्रा में इंफोर्मेशन को प्रोसेस कर रहा होता है कि कई बार कई चीजें हमें समझ नहीं आती हैं, यहां तक जो चीजें आसान और सरल होती हैं उसे भी समझने में समय लगता है।

इस स्थिति को इंफोर्मेशन ओवरलोड कहा जाता है। इससे हमारी अटेंशन स्पैन की क्षमता कम होती जा रही है, जिसकी वजह से इसका सीधा असर हमारी एकाग्रता, मानसिक स्वास्थ्य और निर्णय लेने की क्षमता पर पड़ता है। यह एक गंभीर समस्या है जो संपूर्ण स्वास्थ्य को सीधे तौर पर प्रभावित करने का काम करती है। 
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मस्तिष्क की समस्याएं - फोटो : Freepik.com
इन्फॉर्मेशन ओवरलोड क्या है?
इन्फॉर्मेशन ओवरलोड तब होता है जब किसी व्यक्ति को अपनी संज्ञानात्मक क्षमता से अधिक जानकारी मिलती है। आसान शब्दों में कहें तो, जब हमारे दिमाग को एक साथ इतनी सारी जानकारी मिलती है कि वह उसे ठीक से संभाल नहीं पाता।

यह स्थिति केवल काम के माहौल तक सीमित नहीं है, बल्कि हमारे व्यक्तिगत जीवन में भी इसका असर देखने को मिलता है। लगातार सोशल मीडिया स्क्रॉल करना, अनगिनत नोटिफिकेशन देखना और हर समय इंटरनेट से जुड़े रहना इस समस्या का मुख्य कारण है।

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एकाग्रता पर नकारात्मक प्रभाव - फोटो : freepik
एकाग्रता पर नकारात्मक प्रभाव
इन्फॉर्मेशन ओवरलोड का सबसे बड़ा नुकसान हमारी एकाग्रता पर पड़ता है। जब हमारा दिमाग एक ही समय में कई सारी जानकारियों पर ध्यान केंद्रित करने की कोशिश करता है, तो वह किसी भी चीज पर पूरी तरह से फोकस नहीं कर पाता। इससे 'ब्रेन फॉग' यानी दिमागी धुंधलापन महसूस होता है।

हमारा दिमाग एक साथ कई काम करने के लिए नहीं बना है, और जब हम ऐसा करते हैं, तो हर काम की गुणवत्ता खराब हो सकती है। इससे हमारी प्रोडक्टिविटी कम होती है और हम आसानी से विचलित हो जाते हैं।

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स्ट्रेस, तनाव - फोटो : Freepik.com
निर्णय लेने में कठिनाई और तनाव
जब हमारे सामने बहुत सारी जानकारी होती है, तो सही निर्णय लेना मुश्किल हो जाता है। इन्फॉर्मेशन ओवरलोड की स्थिति में व्यक्ति अक्सर निर्णय लेने से बचता है या गलत निर्णय ले लेता है। इसके अलावा, लगातार सूचनाओं के प्रवाह से तनाव का स्तर भी बढ़ता है। हर नई खबर, नोटिफिकेशन और अपडेट हमें चिंतित कर सकता है। यह तनाव मानसिक थकान का कारण बनता है, जिससे बेचैनी और चिड़चिड़ापन महसूस होता है।
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मेडिटेशन के कई सारे फायदे - फोटो : Freepik.com
बचाव के तरीके
इन्फॉर्मेशन ओवरलोड से बचने के लिए कुछ आसान कदम उठाए जा सकते हैं। सबसे पहले दिन का कुछ समय ऐसा जरूर चुनें जब आप सभी इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स से पूरी तरह दूर रहें; यह एक तरह का डिजिटल डिटॉक्स है। दूसरा, उन ऐप्स के नोटिफिकेशन्स बंद कर दें जो आपके लिए जरूरी नहीं हैं, ताकि आपका ध्यान बार-बार प्रभावित न हो।

तीसरा, खबरों और जानकारी के लिए सिर्फ उन्हीं स्रोतों पर भरोसा करें जो विश्वसनीय और जरूरी हों। आखिर में, अपने दिमाग को शांत रखने के लिए ध्यान (मेडिटेशन) और गहरी सांस लेने जैसे व्यायाम का नियमित अभ्यास करें। इन उपायों को अपनाकर आप अपनी एकाग्रता को बेहतर बना सकते हैं।

नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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