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Health Tips: अगर आप भी सोने से पहले देर तक देखते हैं स्क्रीन, तो जान लें सेहत पर क्या असर पड़ता है?

Tue, 05 Aug 2025 01:23 PM IST
शिखर बरनवाल हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

Late Night Phone Effects:अक्सर लोग रात के समय सोने से पहले स्क्रीन देखते हैं। लेकिन अगर कोई देर रात तक स्क्रीन देखता है तो ये आदत उनकी संपूर्ण स्वास्थ्य को नकारात्मक रूप से प्रभावित करती है। आइए इस लेख में इसी के बारे में जानते हैं।
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Mobile Use - फोटो : Adobe stock
Screen Time Before Bed: आज की डिजिटल दुनिया में, सोने से पहले स्मार्टफोन, टैबलेट या टेलीविजन देखना कई लोगों की दिनचर्या का एक हिस्सा बन चुका है। बिस्तर पर लेटे हुए सोशल मीडिया स्क्रॉल करना, कोई वेब सीरीज देखना या ई-मेल चेक करना एक आम आदत बन गई है। बहुत से लोग इसे आराम करने का एक तरीका मानते हैं, लेकिन वे इस बात से अनजान होते हैं कि यह आदत उनके शारीरिक और मानसिक स्वास्थ्य पर कितना बुरा असर डाल सकती है। 

कई वैज्ञानिक शोधों से यह साबित हो चुका है कि स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी हमारे शरीर की जैविक घड़ी को प्रभावित करती है, जिससे नींद और सेहत से जुड़ी कई समस्याएं पैदा होती हैं। आइए इस लेख में जानते हैं कि देर रात तक स्क्रीन देखने की यह आदत आपके स्वास्थ्य के लिए क्यों हानिकारक है और इससे बचने के लिए आपको क्या करना चाहिए।
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Mobile Use - फोटो : Adobe stock
स्लिप साइकिल को बाधित करती है 'ब्लू लाइट'
स्क्रीन से निकलने वाली नीली रोशनी हमारे शरीर की जैविक घड़ी को प्रभावित करती है। यह रोशनी दिमाग को संकेत देती है कि अभी दिन है, जिससे नींद के हार्मोन मेलाटोनिन का उत्पादन कम हो जाता है। मेलाटोनिन शरीर को सोने के लिए तैयार करता है, और जब इसका स्तर कम होता है, तो हमें नींद आने में दिक्कत होती है। इससे हमारा प्राकृतिक नींद-जागने का चक्र (स्लिप साइकिल) प्रभावित होता है, जिससे हमें रात में बेचैनी महसूस होती है और नींद आसानी से नहीं आती।

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नींद नहीं आना - फोटो : Adobe Stock
नींद की गुणवत्ता पर नकारात्मक असर
सिर्फ नींद आने में देरी ही नहीं, बल्कि देर रात तक स्क्रीन देखने से नींद की गुणवत्ता भी खराब होती है। भले ही आप किसी तरह सो जाएं, लेकिन आपका दिमाग पूरी तरह से शांत नहीं हो पाता। इससे आपकी नींद बार-बार टूट सकती है और आप गहरी नींद के चरणों तक नहीं पहुंच पाते। परिणामस्वरूप, सुबह उठने पर आप थका हुआ, सुस्त और चिड़चिड़ा महसूस करते हैं। यह स्थिति एकाग्रता की कमी और दिन भर की प्रोडक्टिविटी को भी प्रभावित करती है।

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मोबाइल फोन अधिक इस्तेमाल - फोटो : Freepik
आंखों और मस्तिष्क पर बढ़ता है तनाव
सोने से ठीक पहले अंधेरे में स्क्रीन देखने से आंखों पर बहुत ज्यादा जोर पड़ता है। इससे आंखों में सूखापन, जलन और धुंधलापन जैसी समस्याएं हो सकती हैं, जिसे 'डिजिटल आई स्ट्रेन' कहते हैं। इसके अलावा, स्क्रीन से मिल रही लगातार जानकारी और सोशल मीडिया की तुलनात्मक पोस्ट मस्तिष्क पर तनाव डालती हैं, जिससे चिंता और मानसिक बेचैनी बढ़ सकती है।
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ऑनलाइन गेम्स के बढ़ती लत - फोटो : Freepik.com
वजन और सेहत से जुड़ी अन्य समस्याएं
लंबे समय तक खराब और अधूरी नींद लेने से शरीर में कई स्वास्थ्य समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। नींद की कमी से भूख को नियंत्रित करने वाले हार्मोन (लेप्टिन और घ्रेलिन) का संतुलन बिगड़ जाता है, जिससे वजन बढ़ने का खतरा बढ़ जाता है। इसके अलावा, लगातार कम नींद लेना हृदय रोग, टाइप 2 डायबिटीज और हाई ब्लडप्रेशर जैसी गंभीर बीमारियों के जोखिम को भी बढ़ा सकता है। इसलिए, अच्छी सेहत के लिए गहरी और पर्याप्त नींद लेना बहुत जरूरी है।

विशेषज्ञों के अनुसार, अच्छी नींद के लिए सोने से कम से कम एक घंटा पहले सभी स्क्रीन से दूर रहना चाहिए। इस आदत को अपनाना डिजिटल डिटॉक्स का हिस्सा भी है। दिनभर में भी स्क्रीन टाइम को सीमित रखना फायदेमंद होता है। इस ब्रेक से न सिर्फ आपकी नींद बेहतर होती है, बल्कि दिमाग को भी आराम मिलता है।

नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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