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सेहत की बात: शरीर को सिर्फ बाहर ही नहीं भीतर से साफ करना भी बहुत जरूरी, आज से ही शुरू कर दें ये चार उपाय

Thu, 23 Jan 2025 02:28 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली

सार

वैसे तो हमारे शरीर का मैकेनिज्म ऐसा है कि ये अपने अंगों की खुद से सफाई करते रहता है। हालांकि जिस तरह से हमारे खान-पान की गड़बड़ी बढ़ती जा रही है, इसके कारण शरीर में कई प्रकार के विषाक्त पदार्थ इकट्ठा हो सकते हैं। इसे कैसे दूर करें?
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बॉडी डिटॉक्स क्यों जरूरी है? - फोटो : Adobe Stock
अपने शरीर को साफ और सुंदर बनाए रखने के हम सभी निरंतर कुछ न कुछ उपाय करते रहते हैं। पर क्या आपने कभी सोचा है कि शरीर को बाहरी रूप से साफ रखने के साथ-साथ इसकी भीतरी सफाई भी बहुत जरूरी है?

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, वैसे तो हमारे शरीर का मैकेनिज्म ऐसा है कि ये अपने अंगों की खुद से सफाई करते रहता है। हालांकि जिस तरह से हमारे खान-पान की गड़बड़ी बढ़ती जा रही है, इसके कारण शरीर में कई प्रकार के विषाक्त पदार्थ इकट्ठा हो सकते हैं। बॉडी डिटॉक्स यानी कि इसे भीतर से साफ रखना इसलिए महत्वपूर्ण है क्योंकि यह शरीर को विषाक्त पदार्थों से छुटकारा पाने और आपको कई प्रकार की बीमारियों से बचाए रखने में मददगार हो सकता है। विषहरण की प्रक्रिया बीमारियों को रोकने, मानसिक स्पष्टता में सुधार करने और सूजन को कम करने में मददागर हो सकती है।

आप कुछ प्राकृतिक तरीकों को अपनाकर शरीर को अंदर से साफ रख सकते हैं।
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शरीर में गंदगी बढ़ने से हो सकती है बीमारी - फोटो : Freepik.com
डिटॉक्सिफिकेशन जरूरी

स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं, डिटॉक्सिफिकेशन हमारे शरीर से टॉक्सिन्स (विषैले तत्वों) को बाहर निकालने की प्रक्रिया है। शरीर के विभिन्न अंग जैसे लिवर, किडनी और त्वचा स्वाभाविक रूप से डिटॉक्स का काम करते हैं लेकिन आजकल की जीवनशैली, प्रदूषण, अस्वस्थ खान-पान और तनाव के कारण शरीर को अतिरिक्त मदद की जरूरत होती है। इन जोखिमों को देखते हुए हम सभी को शरीर को  डिटॉक्स करते रहने के लिए कुछ उपाय करते रहना चाहिए। आइए इस बारे में जानते हैं।
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पानी पीते रहना जरूरी - फोटो : Freepik.com
खूब सारा पानी पीते रहना सबसे जरूरी

शरीर की अंदर से साफ-सफाई होती रहे इसके लिए सबसे आसान और जरूरी उपाय है खूब पानी पीते रहना। पानी शरीर के विषाक्त पदार्थों को किडनी और पसीने के माध्यम से बाहर निकालता है।

नेशनल इंस्टीट्यूट ऑफ हेल्थ के अनुसार, पर्याप्त पानी पीने से किडनी की कार्यक्षमता में सुधार होता है और किडनी शरीर को अंदर से साफ रखने के लिए सबसे महत्वपूर्ण अंग है। दिन में कम से कम 8-10 गिलास पानी पिएं। सुबह खाली पेट गुनगुने पानी में नींबू मिलाकर पीना सबसे बेहतर विकल्प हो सकता है।

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लिवर का रखें ख्याल - फोटो : Freepik.com
लिवर की सेहत पर भी दें ध्यान

किडनी की ही तरह लिवर को भी डिटॉक्स का मुख्य अंग माना जाता है जो शरीर के भीतर बढ़ रहे विषैले तत्वों को बाहर निकालने में मदद करता है। एक अध्ययन के अनुसार, ब्रोकली, पालक और ग्रीन-टी जैसे खाद्य और पेय पदार्थ लिवर एंजाइम्स को सक्रिय करते हैं, जिससे ये अंग और बेहतर ढंग से शरीर की साफ-सफाई कर पाता है।

खान-पान में सुधार के साथ शराब से दूरी बनाकर लिवर की सेहत को ठीक रखने और शरीर को डिटॉक्स करने में मदद मिल सकती है।
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अच्छी नींद जरूरी - फोटो : adobe stock
अच्छी नींद लेना भी जरूरी

शरीर को अंदर से साफ रखने के लिए खान-पान का ध्यान रखने के साथ नींद में सुधार करना भी बहुत जरूरी है। अध्ययनों से पता चलता है कि हर रात पर्याप्त नींद लेना आपके शरीर के स्वास्थ्य और प्राकृतिक विषहरण प्रणाली को ठीक रखने में मददगार है।

सोने के दौरान आपके मस्तिष्क को खुद को फिर से रिफ्रेश करने का मौका मिलता है। इतना ही नहीं दिन भर जमा होने वाले विषाक्त अपशिष्टों को बाहर निकालने के लिए भी ये जरूरी है। उन अपशिष्ट उत्पादों में से एक बीटा-एमाइलॉयड नामक प्रोटीन है, जो अल्जाइमर रोग का खतरा बढ़ाने वाला माना जाता है।
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चीनी खाने के नुकसान - फोटो : Freepik.com
चीनी और प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों का सेवन कर दें कम

शरीर को अंदर से साफ-स्वच्छ बनाने के लिए जिन चीजों से दूरी बनाने की सलाह दी जाती है, उनमें चीनी और प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थ प्रमुख हैं। शोध बताते हैं कि चीनी और  प्रोसेस्ड खाद्य पदार्थों के अधिक सेवन से मोटापा और अन्य पुरानी बीमारियों जैसे हृदय रोग, कैंसर और मधुमेह का खतरा हो सकता है। ये रोग लिवर और किडनी को क्षति पहुंचाकर आपके शरीर की स्वाभाविक रूप से विषहरण करने की क्षमता में बाधा डालते हैं। इसलिए चीनी और अन्य हानिकारक चीजों को खाने से बचना चाहिए।



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नोट: यह लेख मेडिकल रिपोर्टस से एकत्रित जानकारियों के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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