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स्वास्थ्य मंत्रालय की नई गाइडलाइंस: जानें कैसे करें कोरोना संक्रमित बच्चों की देखभाल? किन्हें अस्पताल में भर्ती करने की जरूरत?

Fri, 30 Apr 2021 02:39 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला
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बच्चों की देखभाल जरूरी - फोटो : iStock
देश में कोरोना संक्रमण के मामलों में लगातार हो रही बढ़ोतरी को लेकर चारों तरफ हाहाकार है। कोरोना का नया स्ट्रेन युवाओं के साथ बच्चों को भी शिकार बना रहा है। म्यूटेशन के बाद वायरस के नए स्ट्रेन मासूमों की जान के लिए भी खतरा बन चुके हैं। इसी को ध्यान में रखते हुए केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय ने कोविड-19 के शिकार बच्चों की देखभाल के लिए प्रोटोकॉल जारी किए हैं। इसमें एसिम्टोमैटिक, हल्के और मध्यम लक्षणों से लेकर गंभीर रूप से संक्रमण के शिकार बच्चों की देखभाल कैसी की जाए, इस बारे में विस्तार से बताया गया है। आइए जानते हैं कोविड संक्रमित बच्चों की देखभाल को लेकर जारी गाइडलाइंस में क्या बताया गया है? 
 
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कोरोना की चपेट में आ रहे हैं बच्चे - फोटो : iStock
स्वास्थ्य मंत्रालय ने कोविड-19 संक्रमण को चार हिस्सों में विभाजित किया है। इसमें एसिम्टोमैटिक, हल्के, मध्यम और गंभीर रूप से संक्रमित बच्चों को रखा गया है। गाइडलाइंस में विशेषज्ञों का कहना है कि एसिम्टोमैटिक बच्चों की पहचान आमतौर पर परिवार की स्क्रीनिंग करते समय होती है। ऐसे बच्चों को सामान्य तौर पर किसी उपचार की आवश्यकता नहीं होती है। परिवार के लोगों को ऐसे बच्चों के लक्षणों को मॉनीटर करते रहना चाहिए। अगर लक्षण बढ़ रहे हैं तो उन्हें आवश्यकतानुसार इलाज उपलब्ध कराया जाना चाहिए। 
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हल्के लक्षण वाले बच्चों को घर पर ही रखें - फोटो : iStock
हल्के लक्षण वाले बच्चों की देखभाल
मंत्रालय द्वारा जारी गाइडलाइंस में कहा गया है कि जिन बच्चों में कोविड के हल्के लक्षण हैं उन्हें गले में खराश, नाक बहने, सांस लेने में कठिनाई और खांसी की दिक्कत हो सकती है। कुछ बच्चों में गैस्ट्रोइंटेस्टाइनल लक्षण भी हो सकते हैं। गाइडलाइंस में बताया गया है कि ऐसे बच्चों को किसी जांच की आवश्यकता नहीं है। घर पर ही आइसोलेशन और रोगसूचक उपचार के साथ इन्हें ठीक किया जा सकता है।
जन्मजात हृदय रोग, फेफड़ों की बीमारी, अंग की शिथिलता, मोटापा जैसे कॉमोरबिडिटी वाले कोविड संक्रमित बच्चों को भी घर पर ही ठीक किया जा सकता है, इस बारे में डॉक्टर से सलाह जरूर ले लें।
 

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बच्चों में कोरोना के लक्षणों की करें मॉनीटरिंग - फोटो : Pixabay
गाइडलाइंस में बताया गया है कि जिन बच्चों में संक्रमण के मध्यम स्तर की पहचान होती है, उन्हें बुखार की स्थिति में डॉक्टर की सलाह पर पैरासिटामॉल  (10-15 मिलीग्राम / किग्रा / खुराक) दी जा सकती है। तेज बुखार में चार से छह घंटे यह दवा दोबारा दे सकते हैं। इसके अलावा बच्चों को गुनगुने पानी में नमक डालकर गरारे कराएं और शरीर को हाइड्रेटेड रखने के साथ पौष्टिक आहार दें। माइल्ड स्तर के संक्रमित बच्चों को एंटीबायोटिक्स की जरूरत नहीं है। ऐसे बच्चों के इलाज में हाइड्रॉक्सीक्लोरोक्वाइन, फेविपिराविर, रेमेडिसविर, प्लाज्मा इन्फ्यूजन या डेक्सामेथासोन आदि की कोई जरूरत नहीं होती है।
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बच्चों में कोरोना के लक्षणों को न करें नजरअंदाज - फोटो : Pixabay
मध्यम स्तर के संक्रमण वाले बच्चों की देखभाल
विशेषज्ञों के मुताबिक मध्यम स्तर के संक्रमण वाले बच्चों को निमोनिया की शिकायत हो सकती है। ऐसे बच्चों को कोविड स्वास्थ्य केंद्र या किसी अस्ताल में भर्ती कराने के साथ उनके लक्षणों की निगरानी करते रहना चाहिए। ऐसे बच्चों में फ्ल्यूड और इलेक्ट्रोलाइट का संतुलन बनाए रखा जाना चाहिए। बच्चों को मुंह से खाना दें (शिशुओं में स्तनपान), यदि इसमें बच्चे असमर्थ हैं तो उन्हें ड्रिप्स लगाने की जरूरत हो सकती है। बुखार में पैरासिटामॉल (10-15 मिलीग्राम/किग्रा/ खुराक) चार से छह घंटे में दे सकते हैं। जिन बच्चों में ऑक्सीजन सेचुरेशन 94 से कम हो उन्हें मेडिकल ऑक्सीजन दिया जाना चाहिए।
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ऑक्सीजन की मात्रा जांचते रहें - फोटो : Pixabay
गंभीर स्तर से संक्रमित बच्चों की देखभाल
जिन बच्चों का ऑक्सीजन सेचुरेशन 90 से कम हो उन्हें गंभीर स्तर में रखा जाना चाहिए। ऐसे बच्चों को गंभीर निमोनिया, एक्यूट रेस्पिरेटरी डिस्ट्रेस सिंड्रोम (एआरडीएस), सेप्टिक शॉक, मल्टी-ऑर्गन डिसफंक्शन सिंड्रोम या साइनोसिस की दिक्कत हो सकती है। नैदानिक रूप से ऐसे बच्चों के सीने में जलन, सुस्ती, लगातार तेज बुखार और सांस की दिक्कत हो सकती है। इन बच्चों को  तुरंत अस्पताल में भर्ती कराना चाहिए। कुछ बच्चों को आईसीयू की भी आवश्यकता हो सकती है। 
 
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गंभीर स्थिति में आईसीयू की हो सकती है जरूरत - फोटो : istock
बच्चों की पूर्ण रक्त गणना (सीबीसी), लिवर और किडनी की जांच के साथ छाती का एक्स-रे किया जाना चाहिए। बच्चों को नसों के माध्यम से कॉर्टिकोस्टेरॉइड-डेक्सामेथासोन 0.15एमजी/ किग्रा की खुराक की दी जानी चाहिए। 19 वर्ष से कम उम्र के बच्चों में रेमेडिसविर जैसी एंटी-वायरल दवाइयों के प्रभाव को जानने के लिए अभी और शोध की जरूरत है।

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स्रोत और संदर्भ: 
Protocol for Management of Covid - 19 in the Paediatric Age Group
https://www.mohfw.gov.in/pdf/ProtocolforManagementofCovid19inthePaediatricAgeGroup.pdf

अस्वीकरण नोट:  यह लेख कोविड संक्रमित बच्चों की देखभाल को लेकर केंद्रीय स्वास्थ्य और परिवार कल्याण मंत्रालय द्वारा जारी नई गाइडलाइंस के आधार पर तैयार किया गया है। लेख में शामिल सूचना व तथ्य आपकी जागरूकता और जानकारी बढ़ाने के लिए साझा किए गए हैं। किसी भी तरह की बीमारी के लक्षण हों अथवा आप किसी रोग से ग्रसित हों तो अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें।

 
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