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बहेड़ा: सेहत के लिए बहुत लाभकारी है यह आयुर्वेदिक जड़ी-बूटी, इन बीमारियों को दूर करने की है क्षमता

Tue, 22 Jun 2021 09:39 AM IST
सोनू शर्मा हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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बहेड़ा के फायदे - फोटो : Pixabay
आचार्य मनीष
आयुर्वेदाचार्य, शुद्धि आयुर्वेद


भारत में ऐसी कई आयुर्वेदिक जड़ी-बूटियां हैं, जिनका इस्तेमाल वर्षों से तरह-तरह की बीमारियों को दूर भगाने में किया जा रहा है। ऐसी ही एक जड़ी-बूटी है बहेड़ा। सबसे दिलचस्प बात ये है कि बहेड़ा को संस्कृत में विभीतकी कहा जाता है, जिसे अंग्रेजी में 'फीयरलेस' यानी 'निर्भय' कहते हैं, यानी यह बीमारियों का भय दूर करता है। पेट संबंधी कुछ समस्याओं के उपचार और प्रबंधन के लिए इस जड़ी-बूटी का उपयोग सदियों से किया जा रहा है। यह त्रिफला के तीन प्रमुख अवयवों में से एक है, जबकि अन्य दो में आंवला और हरड़ शामिल हैं। इसमें रोगाणुरोधी, एंटी-ऑक्सीडेंट और प्रतिरक्षाविज्ञानी गुण मौजूद होते हैं। विशेषज्ञ कहते हैं कि इसके गुण त्रिदोष, जैसे वात, पित्त और कफ को संतुलित करने में सहायक हैं। इसका इस्तेमाल और भी कई तरह की समस्याओं से निजात पाने में किया जाता है। आइए जानते हैं बहेड़ा के इस्तेमाल से होने वाले फायदों के बारे में...
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
लिवर के लिए फायदेमंद है बहेड़ा 
  • बहेड़ा को लिवर के स्वास्थ्य के लिए अच्छा माना जाता है। दरअसल, इस जड़ी-बूटी में हेपेटोप्रोटेक्टिव गुण मौजूद होते हैं। कई अध्ययनों में यह पाया गया है कि बहेड़ा किसी हानिकारक पदार्थ के संपर्क में आने पर लिवर में सूजन होने से रोकता है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
डायबिटीज में भी है फायदेमंद 
  • बहेड़ा को डायबिटीज में भी फायदेमंद माना जाता है। इसमें एंटी-डायबिटिक गुण होते हैं। विशेषज्ञ कहते हैं कि इसका अर्क इंसुलिन के स्तर में सुधार करने के अलावा खून में शुगर या ग्लूकोज के स्तर को बढ़ने से रोकने में मदद कर सकता है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
पेट के लिए है उपयोगी 
  • पारंपरिक रूप से बहेड़ा का उपयोग गैस्ट्रिक, अल्सर और गैस्ट्राइटिस से निजात पाने के लिए किया जाता है। विशेषज्ञ कहते हैं कि इसका हाइड्रोक्लोरिक अर्क एसिडिटी को कम करने में मदद करता है, जो पेप्टिक अल्सर के जोखिम कारकों में से एक है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
दिल के लिए है फायदेमंद 
  • अध्ययनों में यह पाया गया है कि बहेड़ा में मौजूद गुण खून के थक्के बनने से रोकते हैं और पहले से मौजूद खून के थक्कों को तोड़ते भी हैं। विशेषज्ञ कहते हैं कि वाहिका में बनने वाले खून के थक्के की वजह से स्ट्रोक और हार्ट अटैक जैसी समस्याएं विकसित हो सकती हैं। 
नोट: आचार्य मनीष आयुर्वेद आचार्य हैं, जो आर्युवेद की दुनिया में एक लंबा अनुभव रखते हैं। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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