हींग (प्रतीकात्मक तस्वीर)
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खारगार के वाईएमटी आयुर्वेद कॉलेज में डॉक्टर महेश कार्वे एसोसिएट प्रोफेसर हैं। वे कहते हैं, 'आयुर्वेद में सबसे पुरानी किताब चरक संहिता है। इसमें भी हींग का जिक्र किया गया है, इसलिए निश्चित तौर पर हींग का इस्तेमाल यहां कई ईसा पूर्व हो रहा था।'
वे आयुर्वेद के हिसाब से हींग के महत्व को रेखांकित करते हैं। वे बताते हैं, 'हींग एक पाचक है, ये पाचन में सहायक है। इसके इस्तेमाल से गैस की समस्या कम होती है। चूंकि भारतीय खाने में स्टार्च और फाइबर की मात्रा ज्यादा होती है, इसलिए हींग ज्यादा उपयोगी साबित होता है। अगर आपको पाचन से संबंधित समस्याएं हैं तो हिंगास्तका चूर्ण लीजिए जिसमें मुख्य तौर पर हींग होता है। हींग के लेप का इस्तेमाल पेट दर्द ठीक करने में भी होता है। बहुत सारी दवाइयों में हींग का इस्तेमाल किया जाता है। हालांकि सिर्फ हींग का इस्तेमाल किसी दवाई में नहीं किया जाता है। आयुर्वेद के मुताबिक इसे हमेशा इस्तेमाल से पहले घी में पकाने की जरूरत होती है। अगर कच्चे हींग का इस्तेमाल किया जाए तो आपको उल्टी हो जाएगी।'