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Coronavirus Drug: इस दवा से होगा कोरोना का इलाज, डब्ल्यूएचओ ने उठाया था सवाल पर अमेरिका ने दी मंजूरी

Fri, 23 Oct 2020 04:06 PM IST
निलेश कुमार लाइफस्टाइल डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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रेमडेसिविर दवा - फोटो : Social media
कोरोना महामारी के बढ़ते संक्रमण के बीच इसके इलाज में इस्तेमाल हो रही दवाओं को लेकर कई तरह की बातें कही जाती रही हैं। इलाज में प्रायोगिक तौर पर इस्तेमाल के बाद उपचार प्रोटोकॉल में शामिल करने से लेकर, शोध में कारगर नहीं साबित होने तक दवाओं पर सवाल उठते रहे हैं। हालांकि कोरोना के इलाज में शुरुआत से ही यह कहा जाता रहा है कि चिकित्सक की निगरानी में ही इलाज किया जाना चाहिए और बिना डॉक्टरी सलाह के कोई दवा नहीं लेनी चाहिए। कोरोना के इलाज में कारगर दवाओं की खोज के दौरान 'रेमडेसिविर' ने अच्छा असर दिखाया था। हालांकि हाल ही में विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस दवा पर सवाल उठाया है। वहीं, अमेरिका के फूड एंड ड्रग एडमिनिस्ट्रेशन (FDA) ने इसे पूर्णत: मंजूरी दे दी है। 
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रेमडेसिविर दवा - फोटो : social media
अमेरिका में पहले से ही कोरोना वायरस के इलाज के लिए इसका इस्तेमाल होता आ रहा था। पहले इसका इस्तेमाल केवल गंभीर संक्रमण वाले मरीजों के लिए होता था लेकिन अब अस्पताल में भर्ती होने वाले संक्रमित मरीजों को देने के लिए मंजूरी दी गई है। अमेरिका के एफडीए द्वारा दी गई मंजूरी इसलिए भी अहम है, क्योंकि अभी पांच दिन पहले ही विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इस दवा पर सवाल उठाया था। 
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सांकेतिक तस्वीर
विश्व स्वास्थ्य संगठन ने ‘सॉलिडेरिटी ट्रायल’ के अंतरिम नतीजे के हवाले से बताया था कि कोरोना के सिलसिले में चार दवाओं का मृत्यु दर कम करने, श्वसन क्रिया को सुचारू करने और अस्पताल में भर्ती रहने की अवधि पर कोई असर नहीं पड़ा। इन चार दवाओं में रेमडेसिविर, हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन, लोपिनाविर/रिटोनोविर और इंटरफेरोन शामिल हैं। इन दवाओं का 30 देशों के 405 अस्पतालों में 11 हजार से ज्यादा मरीजों पर परीक्षण किया गया था।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
विश्व स्वास्थ्य संगठन के ‘सॉलिडेरिटी ट्रायल’ का उद्देश्य यह जानना था कि इन चारों दवाओं का कोरोना वायरस संक्रमण के उपचार में कितना असर होता है। परीक्षण के नतीजे से पता चला कि ट्रायल के दौरान इस्तेमाल की गई दवाओं रेमडेसिविर, हाइड्रोक्सीक्लोरोक्वीन, लोपिनाविर/रिटोनाविर और इंटरफेरोन का कोविड-19 मरीजों पर या तो बेहद कम असर हुआ या फिर वे बिल्कुल भी कारगर साबित नहीं हुईं। 
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रेमडेसिवीर - फोटो : Hetero website
बता दें कि अमेरिकी कंपनी गिलिएड ने इस दवा को विकसित किया था और तब यह अफ्रीकी देशों में फैले इबोला वायरस संक्रमण के उपचार में प्रयोग की गई थी। हाल के दिनों में कोरोना मरीजों पर भी इसका असर दिखा है। भारतीय दवा कंपनी जायडस कैडिला (Zydus Cadila) समेत कई कंपनियों ने इसका जेनेरिक वर्जन भी लॉन्च किया है। जायडस कैडिला के रेमडेसिविर की कीमत 2,800 रुपये प्रति 100 मिलीग्राम है।
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