दवाओं की उपलब्धता
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क्या है विशेषज्ञों की सलाह?
अमर उजाला से बातचीत में नाम न छापने की शर्त पर नोएडा स्थित अस्पताल में इंटेंसिव केयर मेडिसिन के डॉक्टर (नाम न छापने की शर्त पर) कहते हैं, अगर हम विदेशों की तुलना करके भारत में भी इस तरह के नियम लागू करने पर विचार कर रहे हैं तो ये समझना जरूरी है कि यूएस-यूके जैसे देशों में हेल्थ केयर का रेगुलेटेड नेटवर्क है, जबकि भारत में अब भी ये बड़ी चुनौती रही है।
भारत में बहुत बड़ी आबादी क्वेक्स (झोलाछाप डॉक्टर्स) के पास जाती है, इसमें से ज्यादातर ऐसे हैं जो बिना रोगी की पूरी हिस्ट्री देखे दवा दे देते हैं जिसके कई मामलों में गंभीर स्वास्थ्य दुष्प्रभाव भी देखे जाते रहे हैं। अगर ये दवाएं जनरल स्टोर पर मिलने लगीं, जिनकी कोई मॉनीटरिंग नहीं है तो लोगों की सेहत पर इसके गंभीर दुष्प्रभाव हो सकते हैं। हम पहले से ही एंटीबायोटिक रेजिस्टेंस की समस्या को लेकर संकट में हैं, दर्द निवारक दवाओं के किडनी-लिवर पर गंभीर दुष्प्रभाव देखे जाते रहे हैं।