Medically Reviewed by
डॉ. राघव शर्मा
एमबीबीएस, एमडी (इंटरनल जनरल मेडिसिन)
मेडिट्रिना हॉस्पिटल, अंबाला कैंट
हम खुद को स्वस्थ रखने के लिए तरह-तरह के पोषण से यु्क्त फलों का सेवन करते हैं। ये न सिर्फ बीमारियों से कोसों दूर रखने में सहायक होते हैं साथ ही हमें अच्छा स्वाद भी देते हैं। पर डायबिटीज रोगियों के लिए यह इतना आसान नहीं है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक डायबिटीज से ग्रसित रोगियों को अपने आहार का विशेष ध्यान रखना चाहिए। पौष्टिक आहार के सेवन के साथ डायबिटीज रोगियों को इस बात का भी ध्यान रखना होता है कि इससे उनके शुगर का स्तर न बढ़ जाए। आमतौर पर ज्यादातर फलों का स्वाद मीठा होता है, ऐसे में डायबिटीज रोगियों के लिए इनका चयन करना हमेशा से बड़ा चैलेंज रहा है। यही कारण है कि ऐसे लोग चाहकर भी कई फलों का स्वाद नहीं ले पाते हैं। स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि किसी भी फल का सेवन करने से पहले मधुमेह रोगियों को इसके ग्लाइसेमिक इंडेक्स (जीआई) के बारे में जान लेना चाहिए। ग्लाइसेमिक इंडेक्स एक पैमाना है, जिससे निर्धारित किया जा सकता है कि वह खाद्य पदार्थ शरीर में कितनी तेजी से शुगर के लेवल को बढ़ा सकता है।
क्या हर मीठे फल शुगर लेवल को बढ़ा देते हैं? डायबिटीज रोगियों के लिए किन फलों का सेवन स्वाद और सेहत दोनों ही मामले में फायदेमंद हो सकता है, आइए इस लेख में जानते हैं?
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डायबिटीज में फायदेमंद है कीवी
- फोटो : social media
कीवी का सेवन
स्वास्थ्य विशेषज्ञों के मुताबिक डायबिटीज रोगियों के लिए कीवी फल का सेवन करना काफी फायदेमंद हो सकता है। यूएस डिपार्टमेंट ऑफ एग्रीकल्चर (यूएसडीए) के मुताबिक स्वाद और सेहत से भरपूर इस फल में 215 मिलीग्राम पोटेशियम, 64 मिलीग्राम विटामिन सी और 2 ग्राम फाइबर की मात्रा समाहित होती है। इसके अलावा कीवी में लगभग 42 कैलोरी और 10 ग्राम कार्बोहाइड्रेट भी पाया जाता है। विशेषज्ञ इसे मधुमेह रोगियों के लिए फायदेमंद फल के रूप में सेवन करने की सलाह देते हैं।
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डायबिटीज में खाएं सेब (प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : Pixabay
सेब खाने के फायदे
रोजाना एक सेब का सेवन आपको तमाम तरह की बीमारियों से दूर रखता है। यूएसडीए के मुताबिक एक मध्यम आकार के सेब में 95 कैलोरी और 25 ग्राम कार्बस पाया जाता है। इसके अलावा सेब में फाइबर और विटामिन सी की भी अच्छी मात्रा पाई जाती है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ बताते हैं कि सेब को छीले बिना ही खाना ज्यादा फायदेमंद है। इसके छिलके में फाइबर और एंटीऑक्सिडेंट की उपयुक्त मात्रा पाई जाती है। डायबिटीज रोगियों कि लिए रोजाना 100 ग्राम की मात्रा में सेब के सेवन की सलाह दी जाती है।
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पपीते का सेवन है कई तरह से फायदेमंद
- फोटो : Pixabay
पपीता
यूएसडीए के अनुसार, एक छोटे आकार के पपीते में 67 कैलोरी के साथ 2.67 ग्राम डाइट्री फाइबर, 286 मिलीग्राम पोटेशियम, 95.6 मिलीग्राम विटामिन सी, 33 मिलीग्राम मैग्नीशियम और करीब 31 मिलीग्राम कैल्शियम की उपस्थिति होती है। पपीते का ग्लाइसेमिक इंडेक्स 60 होता है इसलिए यह रक्त शर्करा को बहुत ज्यादा नहीं बढ़ाता है। इसमें मौजूद पोषक तत्वों को देखते हुए डायबिटीज रोगियों को पपीते के सेवन की सलाह दी जाती है।
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डायबिटीज में ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले फल का सेवन करें ( प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : Social media
कम ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले फल
फलों में पाया जाने वाला फाइबर उनके ग्लाइसेमिक इंडेक्स को कम कर देता है। आइए ऐसे ही कुछ फलों के बारे में जानते हैं जिनका जीआई स्केल 55 या उससे कम होता है और डायबिटीज रोगी इनका सेवन कर सकते हैं।
अधिक ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले फल न खाएं (प्रतीकात्मक तस्वीर)
- फोटो : Pixabay
अधिक ग्लाइसेमिक इंडेक्स वाले फल
मधुमेह रोग विशेषज्ञों के मुताबिक जिन फलों का ग्लाइसेमिक इंडेक्स 70 से अधिक हो, ऐसे फलों का सेवन डायबिटीज रोगियों को नहीं करना चाहिए। डायबिटीज में आम का सेवन बहुत ही कम करना चाहिए। तरबूज, अंगूर, चीकू, लीची जैसे फलों से परहेज करने की जरूरत है क्योंकि इसमें शर्करा की मात्रा अधिक होने के साथ इनका ग्लाइसेमिक इंडेक्स भी अधिक होता है। टाइप-1 और टाइप-2 डायबिटीज रोगियों के लिए भी फलों का निर्धारण अलग-अलग हो सकता है।
------------------ नोट: यह लेख डॉ. राघव शर्मा एमबीबीएस, एमडी (इंटर्नल जनरल मेडिसिन) से सुझावों के आधार पर तैयार किया गया है। डॉ. राघव शर्मा को डायबिटीज रोगियों के इलाज का लंबा अनुभव है।
अस्वीकरण: अमर उजाला के हेल्थ एंड फिटनेस कैटेगिरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर और विशेषज्ञों,व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं. लेख में उल्लेखित तथ्यों और सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा परखा व जांचा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठकों की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और ना ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श करें।