एस्ट्राजेनेका की कोविड वैक्सीन (भारत में कोविशील्ड) के दुष्प्रभाव सामने आने के बाद से दुनियाभर में टीकों का विश्वसनीयता पर प्रश्नचिन्ह लगा हुआ है। कंपनी का कहना है कि वैक्सीन के कारण होने वाले दुष्प्रभाव काफी दुर्लभ हैं, 10 लाख में से 8-10 लोगों में इसका जोखिम हो सकता है। कोविशील्ड को लेकर जारी चर्चा के बीच बनारस हिंदू विश्वविद्यालय (बीएचयू) द्वारा जारी हालिया अध्ययन में शोधकर्ताओं ने बताया है कि सिर्फ कोविशील्ड ही नहीं अन्य टीकों के कारण भी लोगों में कई प्रकार के दुष्प्रभाव देखे जा रहे हैं। शोध में अध्ययनकर्ताओं ने बताया है कि कोवाक्सिन लेने वाले भी करीब 30 फीसदी लोगों को कई तरह की स्वास्थ्य समस्याओं का सामना करना पड़ा है।
बीएचयू में शोधकर्ताओं की एक टीम द्वारा एक साल के अनुवर्ती अध्ययन के अनुसार, भारत बायोटेक की वैक्सीन कोवाक्सिन प्राप्त करने वाले लगभग एक-तिहाई लोगों एक साल बाद तक कई दुष्प्रभावों की शिकायत की है।
ऐसे में सवाल उठता है कि क्या कोविड के टीके वास्तव में सुरक्षित नहीं हैं? जिन लोगों ने वैक्सीन ले ली है उन्हें अब किस प्रकार की सावधानियां बरतनी चाहिए?