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Mouth Cancer: लॉलीपॉप का मजा लेते-लेते चल जाएगा पता, कहीं आपको मुंह का कैंसर तो नहीं?

Sun, 24 Mar 2024 04:41 PM IST
अभिलाष श्रीवास्तव हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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flavoured lollipops' to detect mouth cancer - फोटो : istock
कैंसर, वैश्विक स्तर पर मृत्यु के प्रमुख कारणों में से एक है। हर साल लाखों लोगों की मौत कैंसर के कारण हो जाती है। भारत के नजरिए से बात करें तो यहां मुंह में होने वाले कैंसर के मामले काफी ज्यादा रिपोर्ट किए जाते रहे हैं। अध्ययनकर्ता कहते हैं, भारतीय उपमहाद्वीप में मुंह का कैंसर, शीर्ष तीन प्रकार के कैंसर में से एक है।

भारत की प्रति एक लाख की जनसंख्या पर 20 लोगों में इस कैंसर का निदान होता है, ये देश में सभी कैंसर का 30% से अधिक हिस्सा है। हर साल लगभग 77,000 नए मामले सामने आते हैं और 52,000 मौतें रिपोर्ट की जाती हैं। हालांकि अब इस कैंसर का पता लगाना और समय पर उपचार कराना आसान होने वाला है।

मुंह के कैंसर का समय रहते पता लगाने के लिए वैज्ञानिक एक ऐसा लॉलीपॉप बना रहे हैं जो आसानी से सैंपल एकत्रित करने में मददगार हो सकता है। अब तक मुंह के कैंसर का पता लगाने के लिए नाक या मुंह के माध्यम से कैमरा डालकर जांच और सैंपल प्राप्त किया जाता रहा है, जो काफी असुविधाजन होता है। वैज्ञानिकों का कहना है कि ये लॉलीपॉप बड़ी आसानी से सैंपल एकत्र करने में मददगार हो सकता है, जिससे कैंसर के निदान की प्रक्रिया आसान हो जाएगी। समय पर कैंसर का पता चलने से इलाज प्राप्त करने में देरी नहीं होगी और मृत्युदर को भी कम किया जा सकेगा।
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Oral Cancer - फोटो : istock
लॉलीपॉप से ओरल कैंसर का हो सकेगा निदान

बर्मिंघम यूनिवर्सिटी द्वारा साझा रिपोर्ट में वैज्ञानिकों का कहना है, मुंह के कैंसर का पता लगाने वाले पारंपरिक तरीके प्रभावी होते हुए भी अधिक समय लेने वाले और दर्दकारक होते हैं, साथ ही इसके लिए विशेष कौशल की भी आवश्यकता होती है। इसके विपरीत, जिस लॉलीपॉप को तैयार करने पर काम चल रहा है उसके माध्यम से सैंपल कलेक्शन काफी आसान हो सकेगा।

कैंसर रिसर्च यूके और इंजीनियरिंग एंड फिजिकल साइंसेज रिसर्च काउंसिल (ईपीएसआरसी) के सहयोग से इस 'लॉलीपॉप' को विकसित करने पर काम चल रहा है। 
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माउथ कैंसर का खतरा - फोटो : istock
सैंपल एकत्र करना होगा आसान

यूके स्थित बर्मिंघम यूनिवर्सिटी में प्रोफेसर और शोधकर्ता डॉ. रुचि गुप्ता बताती हैं, स्मार्ट हाइड्रोजेल नामक सामग्री से हमारी टीम फ्लेवर्ड 'लॉलीपॉप' का प्रोटोटाइप बना रही है। स्मार्ट हाइड्रोजेल प्रोटीन जैसे बड़े अणुओं को आसानी से पकड़ने में मददगार पाए गए हैं। बाद में इससे प्राप्त सैंपल का प्रयोगशाला में विश्लेषण करके ये पता लगाया जा सकेगा कि मुंह के भीतर कुछ असामान्य या कैंसरकारक तो नहीं है?

लॉलीपॉप चूसने से लार का नमूना हाइड्रोजेल में स्थानांतरित हो जाता है, इसके माध्यम से उन प्रोटीन का पता लगाया जा सकेगा जो कैंसर कारक हो सकते हैं।
 

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ओरल कैंसर का पता लगाने के लिए जांच - फोटो : iStock
कठिन और कष्टकारक प्रक्रिया से मिलेगी मुक्ति

इस परियोजना को कैंसर रिसर्च यूके और ईपीएसआरसी से £350,000 की वित्तीय सहायता प्राप्त हुई है। कैंसर रिसर्च यूके में अनुसंधान और नवाचार के कार्यकारी निदेशक डॉ. इयान फॉल्क्स कहते हैं, मुंह के कैंसर के निदान के लिए बायोप्सी और नासोएंडोस्कोपी वैसे तो गोल्ड स्टैंडर्ड मानक रहे हैं, लेकिन इसके लिए बहुत कौशल की आवश्यकता होती है और यह प्रक्रिया रोगियों के लिए कष्टकारक और महंगी भी होती है।
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मुंह के कैंसर का चल सकेगा पता - फोटो : istock
ओरल कैंसर का समय पर पता चलने से कम होगी मृत्युदर

वैज्ञानिकों ने बताया, अभी ये प्रोजेक्ट शुरुआती चरणों में है। हालांकि लॉलीपॉप विकसित होने और ह्यूमन ट्रायल में अगर इसके परिणाम बेहतर देखे गए तो निश्चित ही ये भविष्य में ओरल कैंसर के समय रहते निदान की दिशा में बड़ी कामयाबी हो सकती है। आज भी दुनियाभर में बड़ी संख्या में मुंह या अन्य प्रकार के कैंसर के कारण लोगों की मौत सिर्फ इस वजह से हो जाती है क्योंकि इन कैंसर का पता ही तब चल पाता है जब ये आखिरी के स्टेज में पहुंच चुकी होती हैं।

कैंसर का अगर समय पर पता चल जाए तो इलाज आसान हो जाता है और रोगी के जीवित रहने की संभावना भी बढ़ जाती है। 


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स्रोत और संदर्भ
Birmingham scientists win funding to develop 'lollipops' for mouth cancer diagnosis


अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है। उपरोक्त लेख में उल्लेखित संबंधित बीमारी के बारे में अधिक जानकारी के लिए अपने डॉक्टर से परामर्श लें।
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