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फैक्ट चेक: तो क्या इस वजह से फिर बढ़ने लगे हैं कोरोना संक्रमण के मामले? सरकार ने किया स्पष्ट

Sun, 25 Jul 2021 02:05 PM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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कोरोना संक्रमण के बढ़ते मामले (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Pixabay
दुनिया के कई देशों में कोरोना का संक्रमण एक बार फिर से बढ़ने लगा है। इंग्लैंड और कई अफ्रीकी देशों में कोरोना के बढ़ते केस को देखते हुए फिर से लॉकडाउन जैसी स्थिति बन रही है। भारत की बात करें तो यहां भी पिछले कुछ दिनों से रोजाना के मामलों में उतार-चढ़ाव जारी है। कई अध्ययनों में दावा किया जा रहा है कि कोरोना के नए म्यूटेटेड वैरिएंट्स अधिक संक्रामक हैं, यह तीसरी लहर का कारण बन सकते हैं।
इन्हीं सबके बीच इन दिनों सोशल मीडिया पर एक पोस्ट तेजी से वायरल हो रहा है। इसमें कोरोना के बढ़ते मामलों को लेकर 5जी रेडिएशन को मुख्य कारण बताया जा रहा है। सोशल मीडिया के कई प्लेटफार्म पर वायरल हो रहे इस संदेश में दावा किया जा रहा है कि कोरोना के दोबारा से बढ़ते मामले 5जी रेडिएशन के कारण सामने आ रहे हैं। सरकार को इस प्रकार के परीक्षण पर तत्काल रोक लगानी चाहिए जिससे देश में दूसरी लहर जैसी स्थिति दोबारा से न बनने पाए।
तो क्या वास्तव में 5जी रेडिएशन कोरोना वायरस के संवाहक हो सकते हैं? यह सवाल इसलिए भी काफी महत्वपूर्ण हो जाता है क्योंकि हाल ही में हुए कुछ अध्ययनों में दावा किया जा रहा है कि ब्लैक कार्बन के साथ कोरोना के वायरस का संचार हो सकता है। आइए इस बारे में विस्तार से जानते हैं।
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सोशल मीडिया पर वायरल खबर (प्रतीकात्मक तस्वीर) - फोटो : Social media
क्या है सोशल मीडिया पोस्ट का दावा
सोशल मीडिया पर वायरस पोस्ट में कहा जा रहा है, ''देश में 5जी का परीक्षण कोरोना संक्रमण का प्रमुख कारण है। दूसरी लहर की मुख्यवजह यही 5जी टेस्टिंग रही है जिसके चलते कोरोना संक्रमण ने इतना भयानक रूप ले लिया है। अब एक बार फिर से संक्रमण के मामले तेजी से बढ़ने शुरू हो गए हैं, सरकार को इस प्रकार के परीक्षण पर जल्द से जल्द रोक लगा देनी चाहिए, वरना तीसरी लहर में देश के हालात और भी खराब हो सकते हैं।''
तो क्या वास्तव में कोरोना के मामले 5जी रेडिएशन के कारण तेजी से बढ़ रहे हैं? आइए जानते हैं।
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सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने किया स्पष्ट - फोटो : My GOV
सरकार ने किया स्पष्ट
सोशल मीडिया पर वायरल पोस्ट को लेकर ट्विटर पर सूचना और प्रसारण मंत्रालय ने इसकी सच्चाई बताई है। मंत्रालय ने इस दावे को सिरे से खारिज करते हुए इस तरह के पोस्ट को भ्रामक और झूठा बताया है। मंत्रालय की ओर से स्पष्ट किया गया है कि कोरोना का वायरस रेडिएशन वेब और मोबाइल नेटवर्क के माध्यम से संचारित नहीं होता है, ऐसे में 5जी नेटवर्क और कोरोना के संक्रमण का कोई संबंध नहीं है। वहीं कोरोना का संक्रमण उन देशों में भी फैल रहा है जहां पर 5जी का मोबाइल नेटवर्क है ही नहीं। ऐसे में पोस्ट का दावा भ्रामक है, लोगों को इसपर बिल्कुल भरोसा नहीं करना चाहिए।
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कोरोना का नए वैरिएंट्स बने चिंता का कारण - फोटो : iStock
तो आखिर दोबारा से कैसे बढ़ने लगा है संक्रमण?
वैज्ञानिकों का मानना है कि कोरोना का डेल्टा वैरिएंट कई देशों में दोबारा से बढ़ते संक्रमण का मुख्य कारण हो सकता है। इंग्लैंड में डेल्टा वैरिएंट जबकि कुछ अफ्रीकी देशों में कोरोना के लैम्बडा वैरिएंट्स के कारण संक्रमण के मामलों में उछाल देखने को मिल रहा है। भारत के संदर्भ में बात करें तो यहां कोरोना के डेल्टा प्लस वैरिएंट को वैज्ञानिक संभावित तीसरी लहर के मुख्य कारण के रूप में देख रहे हैं। देश के कुछ हिस्सों से अब भी लोगों के डेल्टा वैरिएंट्स से संक्रमित होने की खबरें सामने आ रही हैं।
ऐस में विशेषज्ञों का कहना है कि कोरोना का संक्रमण नए वैरिएंट्स के कारण बढ़ रहा है न कि 5जी का मोबाइल रेडिएशन के कारण।


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नोट: यह लेख सूचना और प्रसारण मंत्रालय द्वारा किए गए फैक्ट चेक ट्वीट के आधार पर तैयार किया गया है। कृप्या सोशल मीडिया पर बिना आधार के वायरल खबरों पर भरोसा न करें।

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है।
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