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फैक्ट चेक: इस आयुर्वेदिक दवा की तीन खुराक से ही बढ़ जाएगा ऑक्सीजन का स्तर, जानिए क्या है सच्चाई?

Fri, 21 May 2021 11:46 AM IST
Abhilash Srivastava हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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आयुर्वेद से कोरोना का उपचार - फोटो : pixabay
देश कोरोना वायरस महामारी की दूसरी लहर से जूझ रहा है। यह समस्या अभी खत्म भी नहीं हुई थी कि देश में तीसरी लहर के भी दस्तक को लेकर लोगों को सचेत किया जा रहा है। हाल के दिनों में संक्रमण के आंकड़ों में थोड़ी कमी जरूर आई है, लेकिन स्थिति अब भी बेहतर नहीं है। स्वास्थ्य विशेषज्ञ कहते हैं कि इस दौरान होने वाली किसी भी तरह की समस्याओं में बिना डॉक्टरी सलाह के किसी भी दवा का सेवन नहीं करना चाहिए।
इस बीच सोशल मीडिया पर एक पोस्ट वायरल हो रहा है जिसमें आयुर्वेदिक दवा की तीन खुराक से ही ऑक्सीजन के स्तर को ठीक करने का दावा किया जा रहा है। आइए जानते हैं क्या वास्तव में यह दवा ऑक्सीजन की कमी को पूरा करने में सहायक हो सकती है?
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सोशल मीडिया पर वायरल खबर - फोटो : iStock
क्या है वायरल पोस्ट?
सोशल मीडिया पर वायरल तस्वीर के साथ एक पोस्ट में दावा किया जा रहा है कि यदि किसी व्यक्ति के शरीर में ऑक्सीजन का स्तर गिर रहा है तो अब उसे सिलेंडर के लिए भटकने की जरूरत नहीं है। त्रिलोक्यचिंतामणि रस नाम की दवा की 1-1 गोली दिन में 3 बार लेने से ऑक्सीजन का लेवल तुरंत सही हो जाएगा। ऑक्सीजन ढूंढने में समय न बर्बाद करें।
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आयुष मंत्रालय ने बताई सच्चाई - फोटो : social media
क्या है इसकी सच्चाई
भारत सरकार के आयुष मंत्रालय ने ट्वीट के माध्यम से इस वायरल खबर का खंडन करते हुए लोगों को जागरूक किया है। ट्वीट में बताया गया है कि यह दावा फर्ज़ी है। यह असत्यापित स्त्रोतों द्वारा पब्लिश की गई सूचना है। यह भ्रामक जानकारी है, इसपर विश्वास न करें। ऑक्सीजन की कमी होने पर तुरंत डॉक्टर से संपर्क करें।

 
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ऑक्सीजन को जरूरत हर रोगी को नहीं - फोटो : iStock
कब होती है मेडिकल ऑक्सीजन की जरूरत?
एम्स की डॉ शिवालक्ष्मी बताती हैं कि शरीर में यदि ब्लड ऑक्सीजन का स्तर 94-99 के बीच है तो इसे बेहतर माना जाता है। वहीं जब रोगी के ऑक्सीजन का स्तर (SpO2) 93 से कम हो जाए तो उसे मेडिकल ऑक्सीजन की जरूरत होती है। डॉ शिवालक्ष्मी कहती हैं कि देखने को मिल रहा है कि लोग सुरक्षा की दृष्टि से संसाधनों की अंधाधुंध जमाखोरी कर रहे हैं जोकि सही नहीं है। बिना प्रशिक्षित स्टाफ की निगरानी में मेडिकल ऑक्सीजन का प्रयोग करना खतरनाक हो सकता है।

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नोट: यह लेख केंद्र सरकार के के प्रेस सूचना ब्यूरो (पीआईबी) द्वारा किए गए फैक्ट चेक ट्वीट के आधार पर तैयार किया गया है। 

अस्वीकरण: अमर उजाला की हेल्थ एवं फिटनेस कैटेगरी में प्रकाशित सभी लेख डॉक्टर, विशेषज्ञों व अकादमिक संस्थानों से बातचीत के आधार पर तैयार किए जाते हैं। लेख में उल्लेखित तथ्यों व सूचनाओं को अमर उजाला के पेशेवर पत्रकारों द्वारा जांचा व परखा गया है। इस लेख को तैयार करते समय सभी तरह के निर्देशों का पालन किया गया है। संबंधित लेख पाठक की जानकारी व जागरूकता बढ़ाने के लिए तैयार किया गया है। अमर उजाला लेख में प्रदत्त जानकारी व सूचना को लेकर किसी तरह का दावा नहीं करता है और न ही जिम्मेदारी लेता है।
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