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मेथिलीन ब्लू: क्या कोरोना और ब्लैक फंगस संक्रमण में कारगर है यह दवा? जानिए इसके बारे में सबकुछ

Fri, 21 May 2021 11:35 AM IST
सोनू शर्मा हेल्थ डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
कोरोना वायरस ने पहले से ही लोगों को परेशान रखा हुआ था और अब तो कोरोना मरीजों में फैल रहे ब्लैक फंगस संक्रमण ने भी काफी चिंताएं पैदा कर दी हैं। कई राज्यों में इसके मामले देखने को मिले हैं। हालांकि इस बीच कई मीडिया रिपोर्ट्स में मेथिलीन ब्लू नाम की एक दवाई को लेकर खूब दावा किया जा रहा है कि यह दवा ब्लैक फंगस संक्रमण में कारगर साबित हो सकती है। कहा जा रहा है कि इस दवा से ब्लैक फंगस का खतरा काफी हद तक कम किया जा सकता है। आइए विशेषज्ञों से जानते हैं मेथिलीन ब्लू नामक इस दवा के बारे में सबकुछ... 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
हाल ही में डॉ. दीपक गोलवालकर, जो गुजरात के भावनगर में पल्मोनोलॉजिस्ट हैं, उन्होंने मेथिलीन ब्लू को लेकर एक प्रयोग किया है। उन्होंने ट्वीट के माध्यम से यह दावा किया है कि लगातार ऑक्सीजन पर रहने वाले कोरोना मरीजों के साथ एक आम समस्या म्यूकोरमाइकोसिस (ब्लैक फंगस संक्रमण) है, जिसे ऑक्सीजन ह्यूमिडिफायर में मेथिलीन ब्लू घोल डालकर रोका जा सकता है। 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
डॉ. दीपक गोलवालकर का दावा है कि मेथिलीन ब्लू 'पोस्ट कोविड पल्मोनरी (फेफड़े) फाइब्रोसिस' से पीड़ित मरीजों के मामले में भी मददगार है। इससे उन्हें पूरी तरह ठीक होने में कुछ महीने लग सकते हैं। दरअसल, 'लंग फाइब्रोसिस' का मतलब होता है फेफड़ों में सिकुड़न। इसके बारे में विशेषज्ञ कहते हैं कि कोरोना से ठीक हुए मरीजों में छह महीने बाद भी यह समस्या हो सकती है। 

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
किस बीमारी में किया जाता है मेथिलीन ब्लू का उपयोग? 
  • अमेरिका के मशहूर क्लीवलैंड क्लीनिक के मुताबिक, 'मेथिलीन ब्लू का उपयोग 'मेथेमोग्लोबिनेमिया' के इलाज के लिए किया जाता है। यह एक ऐसी स्थिति है, जिसमें रक्त पूरे शरीर में ऑक्सीजन ले जाने की क्षमता खो देता है। इस दवा का उपयोग अन्य उद्देश्यों के लिए भी किया जा सकता है, लेकिन बिना डॉक्टर की सलाह के नहीं।' 
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : iStock
अमर उजाला से खास बातचीत में लंदन में भारतीय मूल के वरिष्ठ नेत्र रोग विशेषज्ञ डॉ. सौरभ गोयल ने बताया, 'मेथिलीन ब्लू एक ऐसी शक्तिशाली दवा है, जो वायरस को मारती है और यह लैब में साबित भी हो चुका है। विश्व स्वास्थ्य संगठन ने इसे आवश्यक दवाओं की सूची में भी शामिल किया है। यह एक बेहद ही सस्ती दवाई है।'
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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
डॉ. सौरभ गोयल कहते हैं, 'मेथिलीन ब्लू के साथ सबसे बड़ी दिक्कत ये है कि इसको लेकर बहुत कम ट्रायल हुए हैं। एक ट्रायल स्विट्जरलैंड में हुआ है तो एक ईरान में। इस दवा को लेकर एक बड़े ट्रायल की जरूरत है, ताकि यह पता किया जा सके कि यह कोविड में कारगर है या नहीं।' पिछले साल एम्स ने भी मेथिलीन ब्लू को लेकर एक गाइडलाइन जारी की थी, जिसमें बताया था कि कोविड के प्रबंधन में मेथिलीन ब्लू की कोई भूमिका नहीं है। इसलिए आप सोच समझकर और डॉक्टर की सलाह पर ही इस दवा का उपयोग करें। 

स्रोत और संदर्भ:  
1. Methylene Blue injection
https://my.clevelandclinic.org/health/drugs/20881-methylene-blue-injection 
2. FAQs on COVID-19 from AIIMS e-ICUs 
https://www.mohfw.gov.in/pdf/AIIMSeICUsFAQs01SEP.pdf 

अस्वीकरण नोट: यह लेख अमेरिका के क्लीवलैंड क्लीनिक और एम्स की पिछले साल की एक गाइडलाइन, डॉ. दीपक गोलवालकर के ट्वीट्स और डॉ. सौरभ गोयल से बातचीत के आधार पर तैयार किया गया है। लेख में शामिल सूचना व तथ्य आपकी जागरूकता और जानकारी बढ़ाने के लिए साझा किए गए हैं। किसी भी तरह की बीमारी के लक्षण हों अथवा आप किसी रोग से ग्रसित हों तो अपने डॉक्टर से सलाह जरूर लें।  
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